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शनिवार, 4 दिसंबर 2010

व्यस्तता...

दोस्तों नमस्कार, बहुत समय के बाद आपसे मिल रहा हूँ.  क्यूंकि मै भी किसी बड़े आदमी की तरह व्यस्त था. बड़ा आदमी हमेशा व्यस्त रहता है, इसीलिये वाह सफल है.  कारण साफ़ है व्यस्तता रहने के कारण या यूँ कहे  की व्यस्तता की काली चादर ओढ़ कर मै यानी एक व्यस्त आदमी आप से हमेशा यही कहता हूँ की... कुछ देर में फ़ोन करता हूँ. नहीं तो बाद में बात होगी. लोग जब मुझसे कहते हैं की कुछ लिखो यार तब मै कहता हूँ इतना काम है की यार फुर्सत ही नहीं मिलती. और मन ही मन मै बड़ा आदमी यह सोचता हूँ की मैंने अपना समय फालतू काम और फालतू समाज से बचा लिया.  ये फुर्सत न मिलना कितना बड़ा और सटीक बहाना है. खासकर मेरे लिए.. बड़ी-बड़ी बाते हांकना.  मेरे लिए बहुत आसान है, क्या हुआ कुछ देर जुबान ही तो खोलना और बंद करना है. व्यस्तता आप और सबके लिए बहुत सही है ख्याल रहे की ये व्यस्तता आपके और हमारे लिए कंही सामाजिक असफलता का कारण न बन जाए.

2 टिप्‍पणियां:

  1. कोई बात नहीं विवेक सर...अब नियमित हो जाईये.

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  2. mitr itne bhi vayast na hojana ki sabhi ko bhgul jao thodi vayatta me me samy nikla kar logo ki trf bhi dhyan dena.............jisse aapko log ye na kahe ki ye vivek bahut bada aadmi ho gya hai

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