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बुधवार, 11 अगस्त 2010

अमर हरिशंकर परसाई जी की पुण्यतिथि पर ......

इस महान व्यंग्य पुरोधा का जन्म १९२४ में जमानी (इटारसी) के पास हुआ,अपने समय से आगे कालजयी सार्थक रचना का प्रयास बहुत ही कम उम्र से ,नौकरी को एक साइड फेंक लिखने को ही पेशा बना लिया,जीवनचर्या जो चलानी थी,जबलपुर से "वसुधा" नाम की साहित्यिक पत्रिका को घाटे के बावजूद निकालते रहे,सिस्टम ने पत्रिका तो नहीं चलने दी लेकिन आप की कलम निरंतर पैनी होकर समाज के सुलझे- अनसुलझे मुद्दों,पूर्वाग्रहों.ढर्रो.कुरीतियों,आडम्बर,आदि पर बराबर चलती रही,सबसे खास नई दुनिया  में "सुनो भाई साधो" में कई स्तम्भ लिखते रहे जो काफी लोकप्रियता को प्राप्त हुआ,साहित्य की परिभाषा के अनुकूल सबका हित चाहते हुए इनकी लेखनी ने जो कुछ दिया है वः दिनों दिन और भी सार्थक होता दिख रहा है,लेकिन परसाई जी शायद ऐसा नहीं चाहते थे,इनका देहवसान तो ज़रूर १० अगस्त  १९९५ में हो गया लेकिन आज भी और आगे भी ये हममे आपमें जिंदा रहेंगे,अमर रहेंगे ,आप चाहते थे बदलाव हो तो अब हम नई पीढ़ी को उनकी कलम को संभालना होगा,और तब तक लिखते रहना पड़ेगा जब सर्व समाज के अनुकूल बदलाव नहीं होता,एक बार फिर हम सभी केव्स टुडे के छात्र आपको शत शत नमन करते हैं.....
प्रमुख रचना - कहानी संग्रह-हँसते हैं रोते हैं,  जैसे उनके दिन फिरे,
 उपन्यास--रानी नागफनी की कहानी,तट की खोज .
निबंध- तब की बात और थी, भूत के पाँव पीछे,वैष्णव की फिसलन पगडंडियों का ज़माना,सदाचार की ताबीज विकलांग श्रद्धा के दौर,बैमानी की परत आदि
इसके अलावा कई निबंध भी आप के द्वारा लिखा गया है...केव्स टुडे के युवा पत्रकारों ज़रूर पढो....  

2 टिप्‍पणियां:

  1. cavs today ki or se sabse pahle महान साहित्यकार को शत- शत नमन ur aapko bhi .....aapne pundya tithi per unke bare me kuch awgat karaya..

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  2. vivek carray on dnt back beside whats going on need not to see.......we are cavs star, one days most of world stupid come to say salam sir .........

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