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शनिवार, 27 अगस्त 2011

अन्ना ने लालू को दिया करारा जवाब..... कहा १०-१२ बच्चे पैदा करने वाले क्या जाने ब्रम्हचर्य का महत्व और अनशन की ताकत!










लालू
जी ने अन्ना के लम्बे अनशन का राज जानना चाहा था ......रिसर्च करने की बात कह रहे थे.......एक तरह से लालू अन्ना का मजाक ही उड़ा रहे थे....अन्ना ने जवाब दे दिया .....देश कि एक बड़ी समस्या बढती हुई जनसँख्या है......जिसमे लालू जैसों का अमूल्य योगदान है.....अन्ना ने बता दिया ....खैर लालू जी को इससे कोई फर्क नही पड़ने वाला.....इतना ही नही अन्ना के मंच पर पहुंचकर आमिर खान ने इमाम बुखारी का बुखार छुड़ा दिया.... ओम पूरी ने भी जान पर खेल कर जनता को सच्चाई से अवगत कराया.....जिसका खामियाजा उन्हें नेताओं से भुगतना पड़ सकता है.........कुल मिलाकर अन्ना अभी जीवित हैं........मतलब कि आगे भी अपना पराक्रम दिखाते रहेंगे......."राइट टू रिजेक्ट" और "राइट टू रिकाल" की बात भी अन्ना ने की है......कुल मिलाकर ये ही कहा जा सकता है कि धरती अभी भी वीरों से खाली नही है......१९४८ में गाँधी जी इस दुनिया को छोडकर चले गए थे.......लेकिन जाने से पहले सत्य और अहिंसा का जो हथियार दे गए हैं......उसकी धार कभी कमजोर नही होगी.....एक अन्ना ने हजारों अन्ना पैदा कर दिया.....आगे भी जरुरत पड़ने शिवाजी कि भाषा बोलने वाले गाँधी जी हमें मिलते रहेंगे........क्या पता मुझमें और आपमें ही अगले गाँधी जी प्रकट हो जाएँ......क्योंकि अन्ना ने कहा है कि करवाने वाले तो भगवान होते हैं .....अन्ना जैसे लोग तो निमित्त मात्र हैं॥






गुरुवार, 25 अगस्त 2011

लोकसभा में प्रधानमंत्री के बयां से प्रेरित ...


अलापो मत अपना राग
कुछ करके दिखाओ आज
माना ईमानदारी है तुम्हारा ताज
देश को भी बचाया जब अर्थव्यवस्था पर गिर रही थी गाज
तो आज क्यों ज़रूरत पड़ गई बीती बात याद दिलाने की
कही ऐसा करके बचा तो नही रहे हो आपनी लाज .

बुधवार, 24 अगस्त 2011

अन्ना जी, मैंने सुना है लातों के भुत बातों से नहीं मानते और कुत्तो का पूंछ कभी सीधा नही होता....

अन्ना हजारे १६ अगस्त से तिहाड़ जेल से ही अनशन शुरू कर चुके हैं....आज ९ दिन हो गया क्या पता कल १० वें दिन भी जारी रहे...आगे ११-१२-१३...वें दिन भी जरी रहे....अन्ना जी पुराने चावल हैं....जिनकी खुशबु से देश की जनता जाग रही है.... वे कितने दिन अनशन पर बैठ सकते हैं......ये तो भगवान ही जानता है ....लेकिन इस अनशन से भी हमारे देश की राजनितिक पार्टियों पर कोई खास असर पड़ता नहीं दिख रहा है... अन्ना की अपील पर जब जनता सांसदों के घरों के सामने धरना देने पहुंची तो कुछ नेताओं का दिमाग खुला...कांग्रेस के सांसद संजय निरुपम ने तो जनता के सामने गांधी टोपी पहनकर जनलोकपाल का समर्थन करने की बात कही...बीजेपी के शत्रुहन सिंहा ने कहा कि मै तो पहले से जन लोकपाल के समर्थन में हूं....प्रिया दत्ता भी अपनी पार्टी लाईन से हटकर बात की...वरुण गांधी तो रामलीला मैदान में पहुंचकर अपना समर्थन अन्ना को जाहिर कर आए.........लेकिन भाजपा ने जाने क्यों अपना रुख स्पष्ट नहीं किया....यहां तक कि यशवंत सिंहा ने इस्तीफे तक की पेशकर कर दी कि भाजपा अपना ऱुख स्पष्ट करे...कांग्रेस का तो कहना ही क्या जब उसके नेता संजय निरूपम ने भरी संसद में कह दिया कि यहां सभी चोर बैठे हैं....किसी की कमीज थोड़ी सफेद जरूर हो सकती है लेकिन चोर सभी हैं.....अब मूल बात पर आईये कि भला लातों के भूत( भ्रष्टाचारी नेता) कभी बातोँ से मानते हैं क्या....लेकिन अन्ना जी हैं कि जिद पे अड़ गये हैं....खैर मेरा ही नहीं भारत के लाखों- करोड़ों लोगों का समर्थन अन्ना जी को हासिल है....इसीलिए वे इतने कांफिडेंस के साथ अनशन पर बैठे हैं.....लेकिन अन्ना जी को मैं कैसे समझाऊं की कुत्तों की पूंछ कभी सीधी नहीं होती....ये भ्रष्टाचारी नेता कुत्तों के पूंछ जैसे ही हैं.....इन पूंछो को काटना ही पड़ेगा.....और जनता हर कुत्ते को पहचानती है....एक बार इशारा कर दो तो कुत्तो के पूंछ गायब हो जायेंगे....अहिंसा, लोकतंत्र, भाईचारा यही तो वे आदर्श हैं जिनसे हम बंधे हैं और ये नेता लोग इसी का नाम लेकर हमें छलते रहे हैं.....हमारे पास 500 रुपये नहीं है कि हम रेलवे या बैंक का फार्म भर सकें और ये 80000 रूपया महीना घोंटने के बावजूद घोटाला करते हैं.... मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि ये सरकार और अधिकांशत: चोरों से भरी ये संसद अन्ना के साथ न्याय कर पायेगी....(मैं संसद का अपमान नहीं कर रहा हूं लेकिन जो चोर संसद में घुस गये हैं उनको मै गरियाने में पीछे भी हटने वाला नहीं हूं)...सुना है संसद के स्थायी समिती में लालू प्रसाद यादव और अमर सिंह जैसे महाराजाधिराज लोग विराजमान हैं...फिर तो कैसा लोकपाल बनेगा ये बताने की जरूरत भी नहीं है.....अन्ना जी आप ठीक ही कहते हो कि देश के जागिर को चोरों से नहीं पहरेदारों से डर हैं और देश को दुश्मनों से नही इन गद्दारों से डर है....आपका इशारा हम खुब समझ रहे हैं.....और इन नेताओं से हमें कोई उम्मीद भी नहीं है फिर भी आप जो तपस्या कर रहे हो....तो इन गद्दारों को वोट खिसकने का डर लग रहा है...इसलिए अन्ना जी बारगेनिंग कर लो.....पूरा देश आपके साथ है...हमें बांटने के लिए इमाम बुखारी आगे आया था....लेकिन इस बार हम नहीं बंटेंगे...और हमें बांटने के लिए आगे आने वाले हर बुखारी का बुखार छुड़ा देंगे....अन्ना आप अनशन मत तोड़ना....आप जैसे लोग मरते नहीं हैं....मरते तो मनमोहन सिंह जैसे मूकदर्शक, मनीष तिवारी जैसे झूठे, कपिल सिब्बल जैसे चालाक लोग, राहुल गांधी जैसे- तमाशाबीन और अपना रूख स्पष्ट न करने वाले विपक्षी दल हैं...क्योंकि इन्हें मरने की जरूरत भी नहीं पड़ती.....ये तो जितेजी मरने के बराबर हैं....जनता इनकी इज्जत नहीं करती है....


मंगलवार, 23 अगस्त 2011

जिद पर मत अड़ो सरकार............


जिद पर मत अड़ो सरकार
चुपचाप न सही बातचीत को आधार बनाकर चले आओ अन्ना के दवार
जनता देख रही है , तुम्हरा डूब जायेगा संसार
छोड़ो ये जिद
जागो जागो जागो आओ मिलकर दूर करे भ्रस्टाचार
इस बार जो न जागे तो
जनता के हाथों खाओगे जूते चार
जिद पर मत अड़ो सरकार..............

बुधवार, 17 अगस्त 2011

दीपक चौरसियाजी ! पैसा- बाहुबल से वोट अरेंज किया जाता है सरकार बनती है तो वह लोकतंत्र है, जब लोग अन्ना के साथ है तो वह भीड़तंत्र कैसे हो जाता है?


आरक्षण फिल्म में अमिताभ साहब ने सही कहा है इस देश में दो भारत रहते हैं.......कहा जा सकता है एक अन्ना जैसो के साथ हैं और दुसरे भ्रस्ताचारियों के साथ ..दीपक चौरसिया स्टार न्यूज से करोड़ो नही तो लाखों रूपये महीना तो पाते ही होंगे......अतीत में वे क्या रहे! वे जाने......लेकिन आज अगर उन्हें भ्रस्टाचार का सामना नही करना पड़ता है तो......इसका मतलब ये नही हो गया कि.....वे आम जनता के सहारे चल रहे अन्ना के आन्दोलन को कमजोर करने वाली बात करें......उनके भीड़ तन्त्र की बात से और कुछ हो न हो.....कपिल सिब्बल जैसो को तो बल मिलेगा ही........खैर मै दीपक चौरसिया और उन जैसे पत्रकारों से आग्रह करूंगा कि अगर टीम अन्ना ने सरकारी लोकपाल और जन लोकपाल के बीच का अंतर जनता को नही समझाया या समझाने में असमर्थ रहे तो भी वे भीड़ तंत्र के सहारे नही हैं..... मीडिया भी जनता को जागरूक करने का काम करे.......लेकिन सरकार के पक्ष में झुकाव मत दिखाए.....

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

प्रगति पर राजनीति और परम्पराओं का प्रहार


" बीती ताहि बिशार दे अब आगे की सुधी ले " कुछ इसी अंदाज़ में दारुल उलूं के नवनियुक्त कुलपति गुलाम मोहम्मद वस्तानवी ने मुसलमानों को गुजरात के २००२ के दंगो को भूल कर आगे बढ़ने की बात कही थी जिसका खमियाजा उन्हें इस्तीफा दे कर चुकाना पड़ा.

दरअसल १० जनवरी २०११ को वस्तानवी को दारुल उल्लूम जो दुनिया के सबसे प्रभावशाली मदरसों में से एक है का कुलपति नियुक्त किया गया. इस मौके पर वस्तानवी ने ' द times औफ़ इंडिया ' को दिए एक साक्षात्कार में कहा की मुसलमानों को २००२ के दंगो को भूल कर आगे देखना चहिये.राज्य में मुसलमान तरक्की पर हैं, राज्य सरकार उनसे किसी भी तरह से भेदभाव नही कर रही हैं. वस्तानवी का ये प्रगतिशील बयां जंगल में आग की तरह फैला और मुसलमानों ने कड़ी pratikriya करनी शुरू कर दी. किसी ने वस्तानवी को आर.एस.एस. का मोहरा कहा तो किसी ने मोदी के गुणगान का आरोप लगाया. कइयों ने तो फत्बे जारी किये. हालाँकि अपनी सफाई में वस्तानवी ने सभी आरोपों का खंडन किया और उन्होंने कहां की मेरा साक्षात्कार गुजराती में था और इंग्लिश मीडिया ने मेरे बयां को तोड़-madod कर पेश किया है.मोदी को किसी भी तरह से मैंने क्लीन चिट नही दिया हैं. दारुल उलूम को परम्पराओं से आलग ले जाने के आरोप पर उन्होंने साफ कहा की मैं ऍम.बी.ए. के पहले दारुल उलूम का छात्र भी रहा हूँ. मैं दारुल उलूम और उसके उसूलो को अच्छे से जानता हु. मुझ पर लगाये गए सभी इलज़ाम बेबुनियाद हैं.

इन तमाम स्पश्तिकर्नो के बाबजूद उनका विरोध जमकर होता रहा. वस्तानवी के इस्तीफे और दारुल उलूम में फेरबदल की मांग को ले कर छात्रों का एक धरा हड़ताल पर चला गया. मामले को निपटाने के लिए मज्लिश-ए शूरा ने तीन सदस्यीय कमिटी का गठन किया जिसमें मालेगाव के मुफ्ती इस्माइल और चेन्नई के मोहम्मद इब्राहीम दोनों वस्तानावी के समर्थक थे और तीसरे सदस्य कानपूर के मुफ्ती मंजूर अहमद मज़ाहरी शुरू से ही वस्तानवी के खिलाफ थे. हालाँकि कमेटी ने २४ जुलाई २०११ को अपनी रिपोर्ट पेश की लेकिन कमेटी वस्तानवी को कसूरवार साबित करने में नाकामयाब रही. इसके बाद भी वस्तानवी पर इस्तीफे के लिए दबाव डाला जाता रहां जिसपर वस्तानवी ने साफ़ शब्दों में कहां की जब कमेटी अपनी रिपोर्ट में मुझ पर आरोप साबित नही कर पाई तो मैं क्यूँ इस्तीफा दू. गौरतलब वस्तानवी को हटाने के लिए दारुल उलूम ने हद ही पर कर दिया.एक तरफ कमेटी आरोप साबित नही कर पाई तो दूसरी तरफ शूरा ने बहुमत के आधार पर पद से बर्खास्त कर मौलना अबुल कासिम नोमानी को कुलपति के पद पर नियुक्त कर दिया.
असल में वस्तानवी की नियुक्ति के समय ही दारुल उलूम का एक धरा वस्तानवी से सहमत नही था, और ये असहमत धरा कुलपति के पद पर अपना व्यक्ति चाहत था. इस असहमत धरे को डर था की वस्तानवी जो की पशिच्म भारत में आधुनिक और पारम्परिक इस्लामिक शिक्षण की कई संस्थाए चलाते हैं, कही अपने सुधर और प्रगतिशील विचारधारा से सभी को अपने तरफ न करले. इस तरह असहमत धारे का ये डर प्रगतिशील विचारधारा के वस्तानवी को ले डूबा.१४५ साल का इतिहास रहां हैं दारुल उलूम का और देश की आज़ादी में इस धरे ने अहम् भूमिका अदा किया हैं. कांग्रेस के साथ भी इसके गहरे सम्बन्ध रहे है और इधर आते ही वस्तानवी ने गुजरात के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी समर्थक बयां दे दिया हो की उनके लिए खतरनाक साबित हुआ. जिसका अंजाम ही था की वस्तानवी को कुलपति के पद से हटना पड़ा.
सियासत चाहे जो हो लेकिन गौर करने वाली बात ये हैं की मुस्लिम समाज में आज भी प्रगतिशील विचारधारा रखनेवाले मुसलमानों के लिए कोई जगह नही हैं तो सुधार की गुंजाईश कैसे संभव हैं ?

रविवार, 14 अगस्त 2011

भ्रष्टाचारियों के चिताओं पर शुशु करेंगे हर वर्ष कुत्ते.....गरीबों का पैसा डकारने वालों को हासिल यही मुकाम होगा...






















देश
में भ्रष्टाचार के खिलाफ माहौल बन गया है... अन्ना हजारे तो सिर्फ एक बहाना मात्र हैं....दरअसल विगत कुछ वर्षों में भ्रष्टाचार ने इतनी ऊंचाईयां छू ली हैं....कि हर किसी का ध्यान इस ओर चला ही जाता है....हमने अखबारों में यहां तक पढ़ लिया कि 2-जी स्पेक्ट्रम के केस में एक न्यायधीश के मुंह से निकला कि बाप रे बाप ये कितना बड़ा घोटाला है.....जितने रूपये का ये घोटाला हुआ है उतना जीरो तो मैने कभी नहीं देखा....खैर ये भ्रष्टाचार एक सच्चाई है.....प्रेमचंद ने नमक का दरोगा कहानी में इसी भ्रष्टाचार को उजागर किया था....उस कहानी के अंत में भ्रष्टाचारी पं अपोलीदीन उस ईमानदार दरोगा वंशीधर के घर पर जाता है.....भले ही उसने वंशीधर को नौकरी से निकलवाया था.....लेकिन वह वंशीधर की कर्तव्य परायणता से प्रभावित हुए बिना नही रह पाता.....वह वंशीधर को प्रणाम करते हुए उसे अपने सम्पत्ति का मैनेजर नियुक्त कर देता है...... लेकिन आज स्थिति ही पलट गई है......आज का सिस्टम तो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले में ही खामी ढूंढना शुऱू कर देता है.....चाहें वह बाबा रामदेव का मामला हो या अब अन्ना हजारे का....जब तक इन लोगों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ नही कहा तब तक इन्हे कुछ नहीं कहा गया....वही लोग जो इन पर आज उल्टे-सीधे आरोप लगा रहे हैं....कल तक बाबा रामदेव के भक्त थे....उनके शिविर में जाते थे....योगा करने....उनको माला पहनाने....लेकिन ज्योंही बाबा रामदेव ने कान पकड़ने की कोशिश की तो बाबा के भक्त गिरगिट के माफिक रंग बदल लिये.....और बाबा को ठग कहने से नहीं चुके....उन्हें बाबा रामदेव की 1100 करोड़ का साम्राज्य अखड़ने लगा.....और आज वही लोग अन्ना हजारे पर भी ट्रस्ट के 2.2 लाख रूपये के दुरूपयोग का आरोप लगा रहें है....सवाल ये है कि ये लोग वर्षों तक चुप क्यों रहें....सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर ही बाबा रामदेव और अन्ना पर आरोप क्यों लगाया गया....मतलब साफ है....ये लोग देश के ज्यादातर राजनितिक पार्टियां चोर-चोर मौसेरे भाई के सिंद्धांत पर काम करती हैं.....और एक-दुसरे की गल्तियों को याद दिलाकर ही एक-दुसरे को शांत कर देती हैं.....लेकिन इस बार इन बेईमान शेरों को अन्ना के रूप में एक ईमानदार बब्बर शेर मिल गया है....आर-पार का निर्णायक समय आ गया है....अंत में हेडलाईन .... भ्रष्टाचारियों के चिताओं पर शुशु करेंगे हर वर्ष कुत्ते.....गरीबों का पैसा डकारने वालों को हासिल यही मुकाम होगा.....को दोहराते हुए अपनी बात को समाप्त करता हूं...













.जय हिंद......जय हिंद......जय हिंद.....अन्ना गो अहेड..... वे आर विद यु .

शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

लालू जी को मालूम कि..... भीमराव अंबेडकर भी इंसान थे.....

ये लालू प्रसाद यादव ही थे जो संसद में सांसदों की सेलरी 16 हजार से सीधे ८० हजार करने के लिये दहाड़ रहे थे...और शेष सांसद भी अपने फायदे की बात देखकर थोड़ा बहुत शोर मचाकर शांत हो गये...और लालू प्रसाद 80 हजार सेलरी करवाकर ही दम लिये... उस समय लालू को नही याद आया कि देश मे दलित और पिछड़ा वर्ग भी है....उनमे से लाखो नही करोड़ों लोग 20 रुपये प्रतिदिन पर गुजारा कर रहे हैं.....भीमराव अंबेडकर ने जिस समानता की बात करते थे....उस समानता से लालू जैसों का कुछ लेना देना नही है.....ये तो वोट के सौदागर लोग हैं...जो समाज को गरीब-अमीर की बजाय दलित-पिछड़ा, हिंदू-मुसलमान में बांटकर सत्ता पर अपनी पकड़ बनाये रखना चाहते हैं...... जिस अंबेडकर जी का नाम लेकर लालू आरक्षण फिल्म का विरोध कर रहे हैं... उस भीमराव अंबेडकर साहब ने कब कहा था कि आरक्षण कभी खत्म नहीं होगा....अगर उन्होंने कुछ कानून बनाया है तो वह समय के साथ परिवर्तित हो सकता है...समीक्षा होनी चाहिए....क्योंकि बाबा साहब भी इंसान ही थे.....लालू-माया जैसे लोगों ने उनका नाम लेकर करोड़ों रूपया बनाया है....प्रकाश झा जैसे लोग तो बधाई के पात्र हैं....जो आज के समय में कुछ साहस का परिचय दिया....आज लालू जी को आरक्षण फिल्म के सदस्य और बालीवुड के सिरमौर अमिताभ साहब सबसे बुरे एक्टर नजर आ रहे हैं.....कारण क्या है ये तो वे ही जाने....लेकिन हाल ही में खबर आई थी कि अमिताभ जी बिहार में जाकर नितीश कुमार कि तारीफ कर आये......लालू जी को ये बात नागवार तो लगी ही होगी.....जनता ने वैसे ही लालू जी को ठुकरा रखा है....ऐसे में अमिताभ का बिहार दौरा और नितीश कुमार की तारीफ... लालू को अमिताभ और आरक्षण फिल्म का विरोध करने का कारण तो दे ही देती है....खैर लालू जी समेत बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर का नाम लेकर अपनी राजनीती चमकाने वाले सभी नेता पहले सांसदों का वेतन कम करवाएं.....तब समानता की बात करें तो अच्छा लगेगा.....वरना ढोंग करने की जरूरत नही है.....जनता सब समझती है.

गुरुवार, 11 अगस्त 2011

राम मिलाए जोड़ी एक आन्हर एक कोढ़ी...

भोजपुरी में एक कहावत है राम मिलाए जोड़ी एक आन्हर एक कोढ़ी...यह कहावत यूपीए-2 सरकार में साफ देखने को मिलती है..इसका प्रधानमंत्री आन्हर है..वित्त मंत्री कोढ़ी है... बाकी सब मंत्री इनके संघी-साथी... एक विदेश मंत्री है जो पीएम की टीम का है जब भी कुछ पढ़ता है तो गलत ही पढ़ जाता है... अपने देश में बंद पाकिस्तानी आतंकी को पाकिस्तान में बताता है... जैसे पीएम को टूजी मामले में कुछ नहीं दिखा और घोटाला हो गया... वित्त मंत्री प्रणब कोढ़ी है तो और गृहमंत्री भी उसी कटेगरी का... नक्सलवाद, आतंकवाद से निपटने के मामले में उसे कोई उपाय नहीं दिखता... चादर ओढ़े हमेशा ही ठण्डा ही नजर आता है... लोगों की मौत से इसका खून खौलता ही नहीं... इससे अच्छा तो अजय माकन ही है जो खेल में हुए घोटाले को लेकर संसद में गरम दिखता है... और इत्तेफाक से शीला को हटाने में भी तत्पर... असल में यह सरकार ही त्याग का परिणाम है... लेकिन इसके नेता और पीएम अपना पद त्यागना नहीं चाहते...
( इन पंक्तियों के लेखक मुकेश पाण्डेय हैं....जो विगत 11 वर्षों से पत्रकारिता में है....)

सियासी कठपुतली का भारतीय चैनलों पे फैशन परेड


पिछले महीनें पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार तीन दिनों के भारतीय दौरे पे आईं तो खबरिया चैनेलो ने उनकी कूटनीति और दोनों देश के संबंधो को सुधारने के के बजाय उनके फैशन और लाइफ स्टाइल को महत्व दिया. चैनलों ने उनके कपडे, चश्मे, ऊँची हील की सेंडल का मूल्याकन कर खबरों को दिखा दिया.जो पाकिस्तान की विदेश मंत्री को नागवार गुजर रहा हैं.खार ने पाकिस्तान से ही भारतीय मीडिया की जम कर आलोचना की और कहा कि अब तक मैं भारतीय मीडिया को ज़िम्मेदार और संवेदनशील समझती थी.लेकिन ये मेरा भ्रम ही साबित हुआ.
हिना रब्बानी खार का भारतीय दौरा विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली यात्रा थी.खार भारतीय सरज़मी पर पहुंचते ही अपने प्रतिनिधि मंडल के साथ भारत में पाकिस्तान के उच्चायोग में हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों धडो के नेताओं से मिली.हुर्रियत को लेकर ये जग जाहिर है कि ये एक अलगाववादी संगठन हैं जिसकी भाषा और विचाराधारा दोनों ही पाकिस्तान द्वारा संचालित होती हैं.हुर्रियत के कट्टरपंथी धड़े का नेतृत्य सैयद अली शाह गिलानी के हाथ में है जो कश्मीर घाटी में अमन और शांति के कट्टर दुश्मन रहें हैं. हाल ही में मुंबई ब्लास्ट हुए हैं जिसमे भारतीय खुफिया एजंसिय पाकिस्तान की तरफ ही इशारा कर रही हैं.भारत और पाकिस्तान का संबधं भी अपने नाजुक दौर से गुजर रहा हैं ऐसे में आते ही हुर्रियत नेताओ से मिलना पाकिस्तान के अलगाववादी मंसूबो को हवा देने जैसे कदम लगता हैं.बाद में विदेश मंत्रिओं की बैठक में एस.ऍम. कृष्णा ने नाराजगी जताई हैं.बातचीत में २६/११ के मुकद्दमें पर धीमी गति पर आम सहमती नहीं बन पाई. कश्मीर मुद्दे पर सकारात्मक नजरिया अपनाते हुए भविष्य में बातचीत जारी करने की बात पर आम सहमति बनी.साल के शुरू से अब तक सचिव, गृहसचिव और विदेश मंत्री स्तर तक की बात हुई लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नही आया हैं.सकारात्मक पहल के तौर पर पिछले दो साल से जो समग्र वार्ता रुकी थी उसको ज़रूर प्रगति मिली है. अन्यथा परिणाम ढाकके तीन पात ही रहा है.
ऐसे नाज़ुक दौर पर नौसिखिया रब्बानी को विदश मंत्री बनाना पाकिस्तान की सोची समझी साजिश नज़र आती हैं.हुआ यूँ हैं कि यूसुफ़ राजा गलानी ने फरवरी में अपने मंत्रिमंडल में व्यापक फेरबदल किया जिसमे पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को हटा कर हिना रब्बानी खार को विदेश राज्य मंत्री का पद सौप दिया. हालांकि कुरैशी को मजबूरन हटाना पड़ा क्युकिशाह महमूद कुरैशी ने अमेरिका खुफिया एजेंसी रेमन डेविस पर दो पाकिस्तानी युवाओं की हत्या के मामले में कड़ा रूख आख्तियार कर लिया जो अमेरिका की एजंसियो को को नही भाया.और शाह महमूद कुरैशी को मंत्रिमंडल के विस्तार के नाम पर बड़े आराम से हटा दिया गया. और अब इस पद पर खार को नियुक्त किया गया हैं .हालाँकि खार इससे पहले मुशर्रफ की पार्टी मुस्लिम लीग (क्यू) और बाद में युसूफ रजा गिलानी की पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी में आर्थिक मामलो की राज्यमंत्री रह चुकी हैं. इसके अलावा देश और प्रधानमंत्री को वित्तीय मामलो पर भी सलाह देती रही हैं.विदेशी मामलों पर भी पिछले पांच महीने से राज्येमंत्री की भूमिका में हैं. लेकिन विदेशमंत्री के लिए विदेश मामलो की जानकारी का होना ज़रूरी हैं जो हिना रब्ब्नी खार को नही हैं. हालाँकि गिलानी को खार की नियुक्ति से पहले काफी आलोचनाओं का सामने करना पड़ा था .लेकिन इस नियुक्ति से गिलानी ने एक तीर से दो निशान साधा है.पहले तो ये की कुरैशी को हटा कर अमेरिका को खुश किया जो की पाकिस्तान की राजनीति के लिए बेहद ज़रूरी है. खार की नियुक्ति से अमेरिका को ये सन्देश दिया हैं गिलानी ने की अब से कोई भी शाह महमूद कुरैशी जैसे करवाई करने की हिम्मत नही करेगा. दूसरा ये कि हिना रब्ब्नी खार विदेशी मामलो की जानकारनही है तो वो हर अहम् फैंसले ले लिए नौकरशाहों की तरफ ही देखेगी. इस तरह सेना का वर्चस्व हमेशा की तरह रहेगा जिससे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई. एस.आई. भी खुश रहेगा.इस चाल से गिलानी ने अपने लिए लम्बे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने के लिए रास्ता साफ़ कर दिया है.कूटनीति चाहे जो भी रही हो लेकिन अभी सियासी कठपुतली तो हिना रब्ब्नी खार ही हैं. एक तरफ भारतीय मीडिया खार की बातों के बजाये उनके कपड़ो को तरजीह दे रहा है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान मीडिया उन्हें पसंद नही करता और गिलानी ने तो सियासी कठपुतली बना कर पेश किया हैं खार को . ऐसे में खार अगर पाकिस्तान की राजनीती में बेनजीर भुट्टो की तरह मील का पत्थर बनाना चाहती है तो देश के साथ-साथ विदेशी मुद्दों पर मौलिक विचार बनाने के साथ सियासी चालो को भी अपनी चातुर्य (जिसके लिए वो जानी जाती हैं) से समझना होगा .

सोमवार, 8 अगस्त 2011

दिलवालों- दिल्लीवालों - ये मौका तुम मत गंवाना.....क्योंकि---- "सरकारी लोकपाल बिल धोखा है - देश बचालो मौका है" ...........



16 अगस्त को अन्ना हजारे अनशन करने जा रहे हैं...........कहने को तो ये अनशन अन्ना हजारे कर रहे हैं...लेकिन हकीकत में वो और उनकी टीम ये अनशन जनता के दम पर कर रही है.............जिसको लेकर कांग्रेस की यूपीए सरकार का चिंतित होना लाजमी है......कांग्रेस के तथाकथित बड़े नेता जब-तब ये कह रहे हैं कि वे ही लोकतंत्र के सच्चे सेवक हैं...........और अन्ना को अगर अपना बिल लागू करवाना है तो वे चुनाव लड़लें....और संसद मे बहुमत में आकर अपना बिल पेश करें.................खैर ज्यादा गहराई में जाने की जरूरत नहीं है...........आपने वो कहावत तो सुनी होगी कि '' ना नौ मन तेल होगा...और ना राधा नाचेगी''.... शायद ऐसा ही कुछ कहावत है........मेरे कहने का मतलब ये है कि इन नेताओं ने लोकतंत्र के नाम पर ऐसा तंत्र खड़ा कर रखा है कि आम आदमी चुनाव लड़ने की सोच ही नही सकता....धर्म-जाति...धनबल-बाहुबल- परिवारवाद का ऐसा जाल बुन दिया गया है कि आम आदमी चुनाव लड़ने की कभी सोचे ही न....आज के जमाने में चुनाव तो सिर्फ प्रणव मुखर्जी के बेटे ही लड़ सकते हैं....या प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के बेटे...या फिर अन्य नेताओं के बेटे......इन नेताओं ने जाल खुद बुना है....और वे अन्ना को चुनाव के जाल में उलझाने का ऑफर दे रहे हैं......जो कि सरासर धोखा है.....हालांकि अन्ना इस धोखे में आते नहीं दिख रहे हैं....लेकिन अन्ना को मालूम होना चाहिए कि जनता उनके पीछे चलने को तैयार है तो इसलिए कि वे राजनेताओं के वादों और इरादों से तंग आ गये हैं...अब इन नेताओं से छुटकारा पाने के लिए जनता किसी (जरा अलग ) के भी पीछे चलने को
तैयार है...पहले बाबा रामदेव के पीछे चलकर लाठी खाई...और अब अन्ना एण्ड कम्पनी के साथ चलने को तैयार है....अन्ना अपना अनशन वापस न लें और वार्ता के भ्रम मे भी न पड़ें..................दिल्ली मे रहने वाले बहुत लकि हैं कि वे अन्ना के अनशन में भाग लेने का मौका मिलेगा............उम्मीद है कि आम नागरिकों का हक खाने वाले नेताओं को औकात बताने का बेहतरीन मौका कोई दिल्नी-वासी छोड़ना नही चाहेगा.......मेरी भी बहुत इच्छा है कि मै दिल्ली आकर अन्ना के अनशन में शामिल होऊं.....कोशिश करूंगा.......मै गुजारिश करूंगा कि जो कोई दिल्ली में न रहता हो...16 अगस्त को वो जहां रहे...वहीं से यथा संभव स्थानीय स्तर पर हो रहे अनशन-धरना-प्रदर्शन में शामिल होकर देश से भ्रष्टाचार को मिटाने में अन्ना का सहयोग करे..........लेकिन दिलवालों- दिल्लीवालों ये मौका तुम मत गंवाना....................................क्योंकि - "सरकारी लोकपाल बिल धोखा है - देश बचालो मौका है" ...........

गुरुवार, 4 अगस्त 2011

राम-राज का बिहार

 बिहार.दस करोड़ से ज्यादा की आबादी.  अतीत और भविष्य के द्वन्द में. वर्तमान की कोई व्याख्या नहीं. पत्रकार, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, वैज्ञानिक किसी के पास नहीं. सभी के पास केवल अतीत का ज्ञान. भविष्य का ताना-बाना. वर्तमान की व्याख्या कोई कर रहा है तो केवल सरकार.  बोलकर और कागजो के ढेरो पर. जिसे प्रचारित करने की ज़िम्मेदारी वफादारी के साथ मीडिया निभा रही है.  अपराध पर लगाम कसा.   खुल गए दो- चार सिने-हाल. नेता-अभिनेता आने लगे राजधानी. चमकने लगे हैं बाज़ार. अब निकल सकते हैं  देर रात . धकाधक चल रहे मंहगे होटल. आये दिन लगते शासन - प्रशासन के दरबार. राम-राज लौटा. विकसित हो रहा पटना.  विकास का मानक बन रहा पटना. अगर केवल देख कर लौटेंगे तो धोखा खा सकते हैं.  एक साल में ये बदलाव हुए हैं. जिन्हें आप महसूस करके लौटेंगे.   हम भी कही- कही जाकर खांचे में फिट हो जाते हैं. हमे भी  इन्ही चीजों में विकास महसूस होता है. हो सकता है किसी के लिए यही विकास हो.  
ये जो आज बिहार में विकास के मानक नहीं है -  
शिक्षा - प्रारम्भिक शिक्षा प्रणाली, हाई क्लास शिक्षा प्रणाली के साथ चरमरा रही है. बात करने वाला कोई नहीं. हज़ारो स्कूल. केवल नाम के. स्थिति - शिक्षक है, बच्चे नहीं हैं. बच्चे हैं तो शिक्षक नहीं है. दोनों हैं, तो बैठने के लिए स्कूल नहीं है. मिड डे मील - मिड डे माल बना है.  अच्छा अन्न शिक्षक के घर गोदाम में. बुरा अन्न स्कूली  बच्चे के पेट में.   सरकार डकार लेती है. जिनका दाखिला नहीं वे प्लेट धोने की पढ़ाई - कैटरिंग प्रशिक्षण किसी ठेले पर ले रहे हैं.  जो बचे हैं वे किसी अपराध में शामिल होने की तयारी कर रहे हैं. सरकार का विज्ञापन है हर बच्चा पढ़ेगा, ये उसका हक है. आर टी ई क़ानून लागू है.

स्वास्थ्य- हाल में बिहार में स्वास्थ्य मेला चला. मेडिकल प्रोटेकसन एक्ट लागू हुआ. काफी काम हुआ. हेल्थ कार्ड बटा.  अब बस कुछ नहीं हो रहा तो इलाज़. सरकार ने कान बंद कर लिए हैं. बयानों के तीर छोड़ने शुरू कर दिए हैं. हकीकत यंहा के सबसे बड़े मेडिकल महाविद्यालय पीऍमसीएच में देखने को मिलती है,. रोज़ एक बड़े गरीब तबके का इलाज़ पैसे के अभाव में नहीं हो पाता.

आगे तथ्यों के साथ पेश होगी रिपोर्ट.....इंतज़ार कीजिये