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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

गांधी,,शास्त्री जी को नमन

 गांधी जी,शास्त्री जी को नमन

कुछ किताबें, पुराने जमाने की चटाई, पुरानी लालटेन और कुछ दिनचर्या का सामान शास्त्री संग्रहालय में देखकर आपका गला रूँध जाएगा। कहते हैं कि अंतिम समय उनके खाते में 12-13 सौ रुपये ही थे। रेलमंत्री और देश के दूसरे प्रधानमंत्री जी के जीवन को जब भी आप पढ़े तो आपको गर्व महसूस होगा कि देश की नींव रखने वाले हमारे पूर्वज कितने महान थे। 

जब शास्त्री जी जेल में थे तो लाजपतराय द्वारा स्थापित सर्वेंट्स ऑफ़ इंडिया सोसाइटी की स्थापना की तरफ़ से 50 रुपए प्रति माह घर चलाने को दिए जाते थे। शास्त्री जी ने जेल से अपनी पत्नी ललिता शास्त्री को पत्र लिखकर पूछा कि क्या उन्हें ये 50 रुपए समय से मिल रहे हैं और घर का ख़र्च चलाने के लिए पर्याप्त हैं ? प्रतिउत्तर में पत्र लिखकर उन्होंने जवाब दिया कि ये धनराशि उनके लिए काफ़ी है। वे 40 रुपये ख़र्च कर रही हैं और हर महीने 10 रुपये बचा रही हैं। इस पर शास्त्री जी ने सोसायटी को पत्र लिखा और कहा कि मेरे घर का खर्च 40 में चल जा रहा है। उतने ही भेजें। शेष 10 रू जरूरतमन्द लोगों को दिये जायें। एक बार सरकारी गाड़ी को बेटे ने घरेलू काम के लिये प्रयोग किया तो उन्होंने ड्राइवर को फटकार लगाई और पूछा कि जितने किमी चली है। लॉक बुक में घरेलू काम में लिखना और उतना पैसा पत्नी ललिता से दिला दिये। रेल मंत्री रहते हुए एक रेल दुर्घटना हुई तो इसकी जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

भारत पाकिस्तान के बीच ताशकंद समझौता हुआ तो उस रात लाल बहादुर शास्त्री ने घर पर फोन मिलाया। फोन बड़ी बेटी ने उठाया। उन्होंने कहा अम्मा को फोन दो। तो बेटी ने बताया कि अम्मा फोन पर नहीं आएंगी। उन्होंने पूछा क्यों? जवाब मिला कि आपने हाजी पीर और ठिथवाल पाकिस्तान को दे दिया। वो बहुत नाराज हैं।  इससे शास्त्री जी को बहुत धक्का लगा। कहते हैं इसके बाद वो कमरे का चक्कर लगाते रहे। बाद में उन्होंने अपने सचिव वैंकटरमन को फोन लगाकर देश से आ रहीं प्रतिक्रियाएं जाननी चाहीं। उनको बताया कि आपके फैसले की आलोचना हो रही है। वे इतने आहत हुये कि समझौते के 12 घंटे के भीतर 11 जनवरी 1966 उनकी मौत हो गयी। हालांकि आज भी उनकी मौत रहस्यमय बनी हुई है। कुछ लोग जहर देकर मारने के आरोप लगाते हैं। क्योंकि पोस्टमार्टम नहीं किया गया था। लेकिन सच सामने आना चाहिए।

 रेलमंत्री और देश के दूसरे प्रधानमंत्री के पास न तो आलीशान घर था, न ही कार और न ही बैंक बैलेंस।

ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता और उच्चकोटि का चरित्र वाले छोटे कद के दूसरे प्रधानमंत्री भारत रत्न, देश के सपूत के जन्मदिवस पर चरणधूलि को नमन।

,,,,

अधिक अच्छाइयां ग़ांधी जी की कुछ कमियों को पूरी तरह ढक जाती हैं। गांधी समय की जरूरत मगर उनके उसूलों, आदर्शों को आत्मसात करना कठिन। 

शास्त्री, गांधी जयंती की आप सबको बधाइयाँ। 

सोमवार, 14 सितंबर 2020

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की आप सबको बधाइयाँ

अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस की आप सबको बधाइयाँ

uno ने 2007 से लोकतंत्र के सिद्धांतों, मूल्यों को बढ़ावा देने और उनको बनाए रखने के लिए 15 सितंबर को प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय लोकतंत्र दिवस मनाने की घोषणा की।
लोकतंत्र सिर्फ लोगों का, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए शासन नहीं है, बल्कि व्यापक अर्थ में सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक भवना निहित है। देश के समस्त नागरिकों को समान सामजिक, राजनीतिक और आर्थिक आवसर और प्रतिष्ठा प्राप्त हो। ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना।
हालांकि ऐसा बहुत ही कम देशों में है। निष्पक्ष और पारदर्शी सिस्टम कोई भी देश लागू नहीं करना चाहता। तमाम देश लोकतांत्रिक व्यवस्था को कम करके तानाशाही की ओर बढ़ रहे। यह मज़लूमों के लिये बहुत ही खतरनाक है। व्यवस्था परिवर्तन के लिये लोगों को ही जागरूक होना होगा। हक़, अधिकारों के लिये खड़ा होना होगा। अपने लिये और देश के लिये।
,,,विश्व लोकतंत्र दिवस की एक बार फिर से बधाइयाँ 💐💐।

रविवार, 6 सितंबर 2020

केशवानन्द भारती जी को नमन

 संविधान के रक्षक माने जाने वाले केरल के शंकराचार्य केशवानन्द भारती का रविवार 6 सितम्बर को निधन हो गया। 

भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने में उनके योगदान को भुलाया नहीं जायेगा। 

1973 में केशवानन्द भारती मामले में सभी 13 जजों ने 68 दिनों तक सुनवाई की और अनुच्छेद 368 के अंर्तगत कहा कि संसद भी संविधान की मूल संरचना में परिवर्तन नहीं कर सकती है। बहुमत से दिये गये इस निर्णय से संविधान और मजबूत हुआ। जिस पर ये देश खड़ा है।

इस निर्णय के साथ केशवानन्द भारती जी भी अमर हो गये। 

ऐसे धर्मगुरू को मेरा नमन।

सोमवार, 31 अगस्त 2020

उत्तर भारत के पेरियार थे ललई सिंह यादव

 उत्तर भारत के पेरियार थे ललई सिंह यादव

सामान्य किसान परिवार में जन्मे उत्तर भारत के पेरियार, समाज सुधारक, लेखक ललई सिंह यादव जी की आज 110वीं जयंती है। समाज की बेहतरी के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले ललई सिंह ने पैरियार रामास्वामी नायकर की अंग्रेजी में लिखी पुस्तक ‘‘रामायण : ए ट्रू रीडि़ंग’’ का हिंदी में अनुवाद "सच्ची रामायण" से किया। एक जुलाई 1969 को प्रकाशित इस पुस्तक ने पाखण्डवाद, कपोलवाद को समाज के सामने रख दिया। सच्चाई पर लिखी यह पुस्तक हिन्दी पट्टी खासकर उत्तर और उत्तर पूर्व भारत में आते ही तहलका मचा दिया। धर्म की दुकानों पर असर होने लगा। इसके चलते 8 दिसंबर 1969 को सरकार ने जप्ती के आदेश दे दिये। मामला कोर्ट में गया। 19 जुलाई 1971 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस श्री एके कीर्ति, जस्टिस केएन श्रीवास्तव तथा जस्टिस हरी स्वरूप की खण्डपीठ ने बहुमत के साथ निर्णय दिया कि -

1. ‘सच्ची रामायण’ की जप्ती का आदेश निरस्त कर दिया।2. जप्तशुदा पुस्तकें ‘सच्ची रामायण’ ललईसिंह जी को देने के आदेश दिये।
3. जप्ती के खिलाफ अपील करने वाले श्री ललई सिंह जी को 300 रू खर्चा देने के आदेश दिये।
देश की नींव आडम्बरवाद, पखण्डवाद को दफ़न करके  सच्चाई पर ही रखी जा सकती है, जो 70-80 के दशक में ललई सिंह जी कर रहे थे।

उत्तर भारत के पेरियार, महानायक, ललई सिंह यादव जी के जन्मदिन पर उनके कार्यों को नमन, वन्दन। 

शनिवार, 29 अगस्त 2020

हॉकी के जादूगर को नमन

हॉकी के जादूगर को नमन
देश आज हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मना रहा है। देश का यह कोहिनूर जब खेल के मैदान में उतरता था तो गेंद मानों हॉकी स्टिक से चिपक सी जाती थी। ऐसा देखने वाले और खिलाड़ी कहा करते थे। इस पर कई बार शक भी किया गया।
हॉलैंड में उनकी हॉकी स्टिक में चुंबक होने की आशंका के चलते तोड़ कर देखी गई। जापान में उनकी हॉकी स्टिक से गेंद चिपके रहने के कारण जांच की गयी। मगर यह खेल के प्रति उनकी अथक मेहनत का नतीजा ही था।
लास एंजिल्स (1932) में हुये ओलंपिक के एक निर्णायक मैच में भारत ने अमेरिका को 24-1 से हराया था। तब एक अमेरिका समाचार पत्र ने लिखा था कि 
  "भारतीय हॉकी टीम तो पूर्व से आया तूफान थी। उसने अपने वेग से अमेरिकी टीम के ग्यारह खिलाड़ियों को कुचल दिया।" उस दिन हर अमेरिकी अखबार में भारतीय टीम छायी थी। 
1928 एम्स्टर्डम, 1932 लास एंजिल्स, 1936 बर्लिन ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक दिलवाये और देश का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखवा दिया। क्रिकेट का बादशाह सर डॉन ब्रेडमैन, जर्मन तानाशाह हिटलर भी उनकी हॉकी का मुरीद हो गया। 
सेना में सैनिक के पद से भर्ती हुआ यह कोहिनूर खेल के बल पर ही लांस नायक, नायक, सूबेदार, लेफ्टिनेंट, कैप्टन और मेजर बनाये गये। 
देश का मान, सम्मान ऊँचाई के शिखर पर लाने वाले 
इस लाल को पदम् भूषण, पदम् विभूषण पुस्कार तो मिले मगर वो भारत रत्न से भी बड़े सम्मान के हक़दार हैं। जो अब तक नहीं दिया गया। 
3 दिसंबर 1979 उनका अवसान हो गया। 
राष्ट्रीय खेल दिवस की बधाई। 

बुधवार, 3 जून 2020

जॉर्ज फ्लॉयड-अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक

जॉर्ज फ्लॉयड-अफ्रीकी-अमेरिकी नागरिक
दोष-बेरोजगार होने पर 20 डॉलर के नकली नोट से सिगरेट खरीदना
दुकानदार ने पुलिस बुलाई, फ्लॉयड भागे नहीं, मिनियापोलिस ने किया गिरफ्तार, पुलिस अफसर डेरेक चौवेन ने 8 मिनट 46 सेकेंड गले पर घुटने के बल बैठे रहे। इस दौरान वे सांस न ले पाने की और छोड़ने की बात करते रहे। इसका वीडियो बनाने वाले नागरिक भी छोड़ने का अनुरोध करते रहे। चिल्लाते रहे। बाद में उनकी मौत हो गयी। यह घटना आग की तरह फैल गयी। चार पुलिस अफसरों को बर्खास्त किया साथ ही डेरेक पर हत्या का मामला दर्ज हुआ।
अमेरिकी नागरिक इसको नस्लभेदी मानकर सड़कों पर उतरे, 40 शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। लोग न्याय और समानता के पोस्टर के साथ प्रदर्शन किया और जारी है।
वैसे तो नस्लभेदी की यह पहली घटना नहीं। अमेरिका में गोरे लोगों ने काले लोगों पर लंबे समय तक अत्याचार किया। उनको गुलाम या दास बनाकर रखा जाता रहा था। इसके शिकार मार्टिन लूथर किंग जूनियर भी हुये। आंदोलन भी हुए और समाज ने नस्लभेद को नकारा भी। यही बजह थी कि अमेरिका समानता के बल पर शक्तिशाली राष्ट्र बना। वैसे तो साल भर में 2-4 घटनाएं हुईं। लेकिन जॉर्ज फ्लॉयड हत्या और कोरोना महामारी का डर भी लोगों को नहीं डिगा पाये। बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरे और ये कह रहे कि अब ये भेदभाव खत्म हो, अब ये सहन नहीं करेंगे। इसमें सभी काले, गोरे बुद्धिजीवी, छात्र और हर वर्ग के नागरिक हैं। यही अमेरिकी समाज की खासियत और श्रेष्ठता है कि अन्याय के खिलाफ सभी एकजुट होकर विरोध करते हैं। कई जगह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के सामने घुटनों के बल पर बैठकर माफ़ी मांगने का प्रयास किया। यह प्रायश्चित करने का बेहतर तरीका लगा मुझे। पुलिस हो या कोई भी संस्था किसी को भी ज्यादती करने का अधिकार नहीं होना चाहिये। ,,,,हमें अभी हजारों कदम चलना है।

शुक्रवार, 29 मई 2020

किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह को पुण्यतिथि पर नमन

किसानों के मसीहा को पुण्यतिथि पर नमन
भारतीय राजनीति में उसूलों के पाबंद और साफ सुथरी छवि वाले असल चौधरी अर्थात चौधरी चरण सिंह की आज 34वीं पुण्यतिथि है।  (23 दिसम्बर 1902- 29 मई 1987)
वे भारत के पांचवें प्रधानमंत्री थे जिन्होंने संसद में प्रश्नों का सामना नहीं किया और करीब 6 माह तक प्रधानमंत्री रहे।  हालांकि इससे पूर्व वे 2 बार उ.प्र. के मुख्यमंत्री, केंद्र सरकार में गृह मंत्री, वित्त मंत्री और उप प्रधानमंत्री भी बन चुके थे।
महात्मा गांधी ने जब सविनय अवज्ञा आंदोलन का आह्वान किया तो उन्होंने हिंडन नदी पर नमक बनाकर साथ दिया और जेल भी गये।
वो किसानों के असल नेता थे। उनकी बदौलत ही यूपी से जमींदारी प्रथा खत्म हुई और गरीबों को अधिकार मिला। उन्होंने लेखापाल पद सृजन और नाबार्ड की स्थापना करवाई। किसानों के हित में 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून को पारित कराया।
एक समय उनका कद इतना बड़ा था कि वे उ.प्र., हरियाणा या राजस्थान में अपने बल पर विधायक चुनवा सकते थे। भारत सरकार के गृहमंत्री रहते हुये इंदिरा गाँधी को गिरफ़्तार करने के आदेश दिए, हालांकि अगले ही दिन मजिस्ट्रेट ने उनकी रिहाई के आदेश दे दिए। यह काम उस दौर में कोई सोच नहीं सकता था।
PM रहते हुये वे मामूली सी एंबेसडर कार में चला करते थे। वो जहाज़ पर उड़ने के ख़िलाफ़ थे और लखनऊ ट्रेन से जाया करते थे। घर में अतिरिक्त बल्ब जलने पर डांटते थे।
कई कमज़ोरियों के बावजूद चरण सिंह भारतीय राजनीति के असली 'चौधरी' थे।,,,जो कहा करते थे कि ''देश की खुशहाली का रास्ता खेतों और खलिहानों से होकर गुजरता है।"
पुण्यतिथि पर उनको नमन

गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

कमेरा वर्ग को नमन, मई दिवस की बधाईयां।

,,,कमेरा वर्ग को नमन
मजदूरों के दर्द को या यूं कहें कि मजदूरों को कभी समझा ही नहीं गया। ये एक दिन की बात नहीं। जो बुद्धिजीवी या पैसा वाले, उद्योगपति, अलीट वर्ग है, वह हमेशा उनके लिये जिंदा रहने लायक देते रहे। ताकि वह मरे न और उनको अमीर बनाता रहे। जिसके वो हक़दार थे और हैं, उतना उनको कभी नहीं मिला। नीति नियंताओं ने जो भी रोडमैप बनाया। उसमें उनका शोषण भी शामिल था। हम ऊपरी बातें और दिखावा तो बहुत करते हैं। एक दिन की छुट्टी या माला पहनाकर या मामूली पैसा बढ़ाकर या कुछ शब्द मीठे बोलकर इतिश्री कर लेना चाहते हैं। मगर किसी भी देश की बुनियाद तैयार करने वाले इस वर्ग का सम्पूर्ण भला सोच ही नहीं गया। यही कारण है कि कुपोषण मिटाने के लिये करोड़ों के बजट बनाये जाते मगर मूल जड़ पर बार नहीं किया जाता। दर दर की ठोकरें खाने के बाद भी वह दोष किसी को नहीं देता। बस हाड़-मांस के सूखे शरीर से मेहनत जानता है। जब पसीने की बूदें इस धरा को सींचतीं हैं तब जाकर अट्टालिकाएं तैयार होती हैं और फिर उनसे उसको धकेल दिया जाता। यही कहानी है उनकी।
ये देश किसानों, मजदूरों, हाथठेला वालों, कारीगरों, चप्पल बनाने वालों, गटर साफ करने वालों आदि का पहले है। वह लेता नहीं, हमेशा देता है। इस वर्ग के चेहरों पर जब खुशी नहीं आएगी तब तक कोई भी देश तरक़्क़ी की इबारत नहीं लिख सकेगा।
देश की नींव तैयार करने वाले कमेरा वर्ग को नमन, वंदन।

जिनके घरों में खाने का सामान भरा पड़ा है उनको विश्व मजदूर दिवस/ श्रमिक दिवस/मई दिवस की बधाईयां।
,,,बाकी तो उनकी स्तिथि किसी से छुपी नहीं।

उम्मीद है इन गरीबों, मजलूमों की स्तिथि कभी सुधरेगी।
,,,फूलशंकर

मंगलवार, 14 अप्रैल 2020

विश्व रत्न बाबा साहेब बी.आर. अम्बेडकर को नमन

विश्व रत्न को नमन
समानता, न्याय और ज्ञान के प्रतीक विश्व रत्न बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर को 129 वें अवतरण दिवस पर नमन।
क़ाबिलियत, इंसानियत, समझदारी और सूझबूझ से उन्होंने भारत ही नहीं विश्व को नई दिशा दी। देश का उद्धार किया। उनकी नींव पर ही ये देश खड़ा है।
कुछ लोग संविधान निर्माता पर कई सवाल उठाते हैं। कमजोर और लचीला संविधान बताते हैं। कुछ संविधान को उधार का पिटारा या थैला कहते हैं। यह बात डॉ आंबेडकर ने अपने जीवन में ही कह दी थी और कहा था कि जिस प्रकार के लोग सत्ता में होंगे वैसा ही देश चलायेंगे। हमने संविधान निर्माण में कोई कमी नहीं छोड़ी। हर नागरिक के हितों का ख्याल रखा। ताकि श्रेष्ठ भारत का निर्माण हो सके।
आपको विश्व समानता दिवस, चेतना दिवस की ढेरों बधाईयां।

जो सवाल उठाते उनके लिए,,,
कहना चाहता हूँ कि इतना खोज लेना कि कितने देशों में उनके जीवन परिचय को पढ़ाया जाता और कितने शोध हुये।
अब उनके ज्ञान की बात
भारत रत्न डॉ अंबेडकर के पास BA, MA, M.SC, P.H.D, L.L.D, DSC, D. Litt., Barrister-at-law समेत बत्तीस (32) डिग्रियां थीं। इसके अलावा वे कुल नौ भाषाओं के जानकार थे। विशेषज्ञ थे।
तीन साल कोलंबिया प्रवास के दौरान बाबा साहेब ने उनत्तीस कोर्स वाणिज्य में किये, ग्यारह कोर्स इतिहास में, छः कोर्स समाज शास्त्र में, पांच कोर्स दर्शन शास्त्र में, चार कोर्स मानवशास्त्र में, तीन कोर्स राजनीति शास्त्र में, एक एलिमेंट्री फ्रेंच में और एक जर्मन में कोर्स पूर्ण किया।
और हां जो तुम संविधान की प्रतियां जलाते हो। इतना जान लेना ये जो सांस ले रहे हो वह संविधान की ही देन है।
,,,न्याय के शिल्पकार महामानव को नमन।

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020

"ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू

"ऐ वतन, वतन मेरे, आबाद रहे तू
मैं जहाँ रहूँ जहाँ में याद रहे तू
तू ही मेरी मंजिल है, पेहचान तुझी से
पोहुंचू मैं जहां भी
मेरी बुनियाद रहे तू। "
जिस तेजी से केस बढ़ रहे उससे चिंतित हूँ, दुःखी हूँ। अब मुझे वो निश्चिंत नींद नहीं आ रही। खैर जो भी हो।
आप जिम्मेदारी से अपना, अपनों का बचाव करें। घर पर ही रहें।
लाखों चिकित्सा कर्मी, पुलिस के जवान, आर्मी के जवान आपनों से दूर रहकर दिन-रात सेवा कर रहे हैं। घर से बाहर निकलकर उनको अपमानित न करें।
घर पर रहकर साथ दें,,,हम एक दिन इस महामारी से जीत जायेंगे।

बुधवार, 25 मार्च 2020

लॉक डाउन का पालन ही देशभक्ति

लॉक डाउन का पालन ही देशभक्ति
देशभक्ति समझकर 21 दिन के लॉक डाउन का पालन कीजिये। ताकि कोरोना की चेन सिस्टम को तोड़ा जा सके। यह आपके, आपके परिवार के और देश के लिये बहुत ही जरूरी है। कोई पालन करवा रहा इसलिए नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनकर। आपको सिर्फ घर में रहने के लिये कहा जा रहा, सोचिये आपके लिये लाखों डॉ, लाखों आर्मी के जवान, लाखों पुलिस बल के जवान, लाखों विद्युत कर्मी, जल संस्थान कर्मी, दूरसंचार कर्मी मिलकर सेवा देने में लगे हुये हैं। ऐसा नहीं कि इन पर खतरा नहीं, लेकिन हर सम्भव सावधानी बरतकर परिजनों से दूर कर्तव्य निभा रहे हैं। ताकि देश पर आए संकट को टाला जा सके। आप अपनों के बीच रहकर ही देशसेवा का परिचय दें। यही काफी है।
देश में असंगठित क्षेत्र के 38 करोड़ से अधिक गरीब मजदूर हैं। इनके सामने बीमारी से बचने के अलावा खाने का भी संकट है। यही वो वर्ग है जिस पर सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा। इनके लिये सरकारें और स्थानीय प्रशासन हर सम्भव भोजन सामग्री भेजने का काम कर रहे हैं। कर्मचारी शिद्दत से जुटे हैं। फिर भी जागरूक लोग बनकर आसपास के गरीबों को भूखा न सोने दें यही मानवता है। जरूरी नहीं कि उसका प्रचार हो, सेल्फी सोशलमीडिया पर अपलोड हो।
WHO भी कह रहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी सुधारना होगा। वह लॉक डाउन के अलावा मुफ्त परीक्षण, मुफ्त इलाज़, मास्क और प्रतिरक्षण किट की ओर इशारा कर रहा है। उस दिशा में सरकारें जल्द काम करेंगी। यही देश को उम्मीदें हैं।
मौत का भय नहीं, मगर अपने महफूज़ रहें। इसलिए हम सड़कों पर तन, मन और धन से सेवा करने का काम करेंगे।
आप गैर जिम्मेदार होने का परिचय न दें।
अनावश्यक घर से बाहर न निकलें। किसी शहर से कोई व्यक्ति आया हो और बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो पुलिस को सूचित करें।
स्वयं बचें और देश बचायें।
देश में 70 मामले बढ़कर अभी तक 606 मामले, 10 मौतें, 41 ठीक भी हो गये।
दुनियाभर में 21 हजार से अधिक मौतें।
उम्मीद है आप पालन करेंगे।

गुरुवार, 19 मार्च 2020

जेनिफर हैलर आप दुनिया की महान मां हो

जेनिफर हैलर आप दुनिया की महान मां हो
जेनिफर हैलर सहित दुनिया के उन 45 लोगों को लाखों-करोड़ों बार नमन, वंदन, अभिनन्दन
जिन्होंने कोरोना जैसी महामारी से मानवता को बचाने के लिए अपनी जान को खतरे में डाल दिया। जो वैक्सीन बनायी जा रही, वह इन पर पहले प्रयोग की जा रही है। जाहिर है मौत भी हो सकती है। जेनिफर आप 2 बच्चों की मां हैं। मां शब्द को आपने जो ऊंचाइयों पर पहुँचाया। हम सोच नहीं सकते कि मां कितनी महान होती है। जब मानव पर  टेस्ट करने की बात आयी तो चार लोगों में आपने सबसे पहले सहमति दी और वॉशिंगटन रिसर्च इंस्टूट्यूट में स्वीकृति फार्म भरा। 43 वर्षीय हैलर छोटी सी अमेरिकी टेक कम्पनी में ऑपरेशनल मैनेजर की नौकरी करती हैं। आपके पति साफ्टवेयर टेस्टर हैं। आपके साहस को हम सलाम ही नहीं करते, नमन भी करते हैं। हालांकि 44 और भी लोग हैं, जिन्होंने स्वेच्छा से ये खतरा उठाने का निर्णय लिया है।
आप सबका नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाये तब भी कम।
वैक्सीन के सफल टेस्ट के लिए पहले किसी स्वस्थ व्यक्ति को उस बीमारी से इन्फ़ेक्ट किया जाता है और फिर उस पर वैक्सीन का रेस्पॉन्स देखा जा रहा है। इन 45 लोगों पर एक माह में विभिन्न टेस्ट होंगे। सफल होने पर विश्व को वैक्सीन मिलेगी।
बकौल हैलर कहतीं हैं-
“इस मोड़ पर हम अपनी ज़िंदगी हाथ धोकर और वर्क फ्रॉम होम की बजाए इस वायरस से लड़कर बिताना चाहते हैं.”

विश्व में मानव पर यह प्रयोग पहली बार ही रहा है। हम आप सबके सलामती की दुआ करते रहेंगे।

हैलर आप महान मां हो,,,,फूलशंकर।

रविवार, 23 फ़रवरी 2020

सन्त गाडगे को नमन

सन्त गाडगे को नमन
कबीर, रैदास की परम्परा को आगे ले जाने वाले, पाखंडवाद, जातिवाद, छुआछूत, कर्मकांड, मूर्ति पूजा, खोखली परम्पराओं का आजीवन विरोध करने वाले सन्त गाडगे को अवतरण दिवस पर नमन, वंदन। धोबी जाति में जन्मे सन्त गाडगे कहते थे कि मानव एक समान हैं। एक दूसरे के साथ भाईचारे एवं प्रेम का व्यवहार करो। वे हमेशा अपने साथ एक झाडू रखते थे और बिना झिंझक सफाई करने लग जाते थे। वे उस दौर में स्वच्छता का संदेश दे रहे थे। और,,,कहते थे कि-
 ‘‘सुगंध देने वाले फूलों को पात्र में रखकर भगवान की पत्थर की मूर्ति पर अर्पित करने के बजाय चारों ओर बसे हुए लोगों की सेवा के लिए अपना खून खपाओ। भूखे लोगों को रोटी खिलाओ, तो तुम्हारा जन्म सार्थक होगा। पूजा के उन फूलों से तो मेरा झाड़ू ही श्रेष्ठ है।’’ अंधभक्ति और धार्मिक कुप्रथाओं से बचने की सलाह देते रहे। ऐसे सन्त के उपदेश और विचार आज भी प्रासांगिक हैं।

शनिवार, 11 जनवरी 2020

अधिवक्ता समृद्धि कुशवाहा को सलाम

अधिवक्ता समृद्धि कुशवाहा को सलाम
2012 के निर्भया केस को 7 साल तक बिना फीस के लड़ने वाली अधिवक्ता समृद्धि कुशवाहा को दिल से सलाम, जिन्होंने मुफ्त केस ही नहीं लड़ा, बल्कि चारों दरिंदों को फांसी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मजबूर मां-बाप को सम्बल प्रदान किया और भरोसा भी दिलाया कि गरीबी न्याय में बाधा नहीं बन पायेगी। मन करता कि समृद्धि जैसे और आगे आयें। यही देशभक्ति और सच्ची मानवता है।
22 जनवरी सुबह जब चारों दोषियों को फांसी हो जायेगी तो सुकून तो मिलेगा, लेकिन कई सवाल अब भी जिंदा बने हुये हैं। जैसे न्याय में देरी अन्याय के बराबर है। हमारी व्यवस्था और समाज ऐसे केस रोकने में नाकाम क्यों हैं?
 न्याय दिलाने वाली अधिवक्ता समृद्धि कुशवाहा, निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह, मां आशा देवी को अभिनन्दन।(फ़ोटो में)

बुधवार, 27 नवंबर 2019

परिनिर्वाण दिवस पर महात्मा फुले को नमन

परिनिर्वाण दिवस पर महात्मा फुले को नमन
एक भारतीय समाज सुधारक, चिंतक, लेखक, दार्शनिक, महिलाओं और दलितों के उद्धारक ज्योतिराव गोविंदराव फुले के परिनिर्वाण दिवस पर उनके कार्यों को नमन, वंदन।
वे 'महात्मा फुले' एवं 'ज्‍योतिबा फुले' के नाम से भी मशहूर हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में सत्यशोधक समाज की स्थापना की। महिलाओं की दशा सुधारने के लिये 1848 में एक महिला स्कूल खोला। यह देश में पहला विद्यालय था। लड़कियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नहीं मिली तो उन्होंने स्वयं व अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले को इस कार्य मे लगाया।
जन्म- 11 अप्रैल 1827
परिनिर्वाण-28 नवंबर 1890 पुणे महाराष्ट्र
*जिस समय महात्मा फुले शिक्षा की ज्योति जला रहे थे। उस समय स्कूल के लिये जाते इस परिवार पर जातिवादी लोग, संगठन कीचड़/गोबर फेंक रहे थे।
ऐसे महात्मा को मेरा नमन।

बुधवार, 30 अक्टूबर 2019

अखण्ड भारत के निर्माता को नमन

अखण्ड भारत के निर्माता को नमन
आज भारत देश जिस नींव पर खड़ा है और अखंड रूप में विश्व में अपनी पताका फहरा रहा है। उसका अधिकांश श्रेय एक किसान के बेटे को जाता है। वे भारतीय गणराज्य के संस्थापक पिता थे। ऐसे महापुरुष, दूरदर्शी, अधिवक्ता, राजनीतिज्ञ, भारत रत्न, लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की 144 वीं जयंती है। हिन्दी, उर्दू, फ़ारसी में उनको सरदार अर्थात प्रमुख कहा जाता है। 
गरीब किसान झवेरभाई पटेल के परिवार में जन्मे सरदार बल्लभ भाई पटेल का जीवन संघर्षों से भरा रहा। वह अपनी पढ़ाई के साथ खेतों में पिता का साथ देते थे। यही कारण था कि वे 22 साल में हाईस्कूल की पढ़ाई कर पाये। बाद में कानून की पढ़ाई के लिए वे इंग्लैंड चले गये। 
खेड़ा और बारदोली किसान सत्यागृह से वे जुड़े और अंग्रेज सरकार को कर घटाने पर मजबूर कर दिया। 
562 छोटी-बड़ी देशी रियासतों को मिलाकर एक अखण्ड भारत देश का निर्माण किया। हालाँकि हैदराबाद, जूनागढ़, त्रावणकोर, जम्मू कश्मीर की रियासतों ने थोड़ी परेशानी खड़ी की, लेकिन उनकी सैनिक कार्यवाही और कूटनीति के चलते उनको भी मिला लिया गया।
1930 में जब गुजरात में प्लेग फैला तो एक दोस्त को बचाने और सेवा करने खुद पहुंच गये। उनको भी बीमारी लग गयी। महीनों बाद ठीक हुई।
राष्ट्रहित में उन्होंने आरएसएस पर 1948 में प्रतिबंध लगा दिया। क्योंकि उनको पता चला कि गांधी की मौत के बाद आरएसएस के लोगों ने जश्न मनाया था।
उनका दिल नरम था तो कठोर भी। कहते हैं कि 1909 में जब वे वकालत कर रहे थे तो पत्नी के निधन की चिट्ठी मिली। फिर भी वे विचलित नहीं हुये। वकालत पूरी करने के बाद ही उन्होंने जानकारी दी और चले गये।
राष्ट्रीय एकता दिवस की आप सबको बधाईयां। 
जन्म 31 अक्टूबर 1875 नडियाद गुजरात
अवसान-15 दिसंबर 1950 मुंबई।
ऐसे महान सपूत को ये देश नमन करता रहेगा।

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

अशफ़ाक़ उल्ला खां को नमन, वंदन।

"जाऊँगा खाली हाथ मगर, यह दर्द साथ ही जायेगा;जाने किस दिन हिन्दोस्तान, आजाद वतन कहलायेगा"।
अशफ़ाक़ उल्ला खां को नमन, वंदन।
स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख क्रांतिकारी, जिन्होंने काकोरी कांड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रामप्रसाद बिस्मिल के साथ अशफ़ाक़ उर्दू के बेहतरीन शायर थे। दोनों की दोस्ती मज़हब से ऊपर थी। दोनों एक दूसरे का सम्मान करते थे। पीठ पीछे भी कोई बुराई वे सुन नहीं सकते थे। उनमें देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी। वे हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। ब्रितानी हुक़ूमत ने 19 दिसम्बर 1927 को फैजाबाद जेल में फाँसी पर लटका दिया।
जन्म 22 अक्टूबर 1900 शाहजहांपुर
देश के सपूत को जन्मदिन पर उनको नमन, वंदन।
उनकी शायरी-
"जाऊँगा खाली हाथ मगर, यह दर्द साथ ही जायेगा;जाने किस दिन हिन्दोस्तान, आजाद वतन कहलायेगा।
बिस्मिल हिन्दू हैं कहते हैं, फिर आऊँगा-फिर आऊँगा; ले नया जन्म ऐ भारत माँ! तुझको आजाद कराऊँगा।।
जी करता है मैं भी कह दूँ, पर मजहब से बँध जाता हूँ; मैं मुसलमान हूँ पुनर्जन्म की बात नहीं कह पाता हूँ।
हाँ, खुदा अगर मिल गया कहीं, अपनी झोली फैला दूँगा; औ' जन्नत के बदले उससे, यक नया जन्म ही माँगूँगा।।"

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

डॉ सोनेलाल पटेल को परिनिर्वाण दिवस पर नमन,वंदन

बोधिसत्व डॉ. सोनेलाल पटेल के महापरिनिर्वाण दिवस पर उनके कार्यों को नमन, वंदन
किसानों, कमरों के सामाजिक नेता जिन्होंने आजीवन संघर्ष किया। वो अंधविश्वास के विरोधी और सामाजिक न्याय के पक्षधर थे। उन्होंने कर्म को प्रधानता देने वाली जाति कुर्मियों में राजनैतिक चेतना पैदा की। 1994 में बेगम हजरत महल पार्क लखनऊ में हुई उनकी रैली को बीबीसी लन्दन ने सबसे बड़ी जातीय रैली बताया था। 4 नवम्बर 1995 को उन्होंने अपना दल बनाने की घोषणा की। 15 फरबरी 1999 को लाखों समर्थकों के साथ उन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर भंते प्रज्ञानन्द से बौद्ध धर्म की दीक्षा ली और बोधिसत्व कहलाये।
उनकी बढ़ती ताकत को देखते हुये विरोधी घबरा गये। किसी कीमत पर उनकी बढ़ती लोकप्रियता को रोकना चाहते थे। 1999 में जब वे इलाहाबाद में रैली कर रहे थे तो साजिश के तहत मारने के इरादे से लाठीचार्ज करवाया गया। इस घटना को एक फ़ोटो पत्रकार ने कैमरे में कैद कर लिया और भाग गया। लिहाज़ा उनको जिंदा छोड़ दिया गया। हालांकि वे बच जरूर गये, लेकिन उनकी तबियत अक्सर खराब रहने लगी। 17 अक्टूबर 2009 में कानपुर में कार दुर्घटना में निर्वाण की प्राप्ति हुई। उनकी मौत की सीबीआई जांच की मांग की गयी, लेमिन ऐसा नहीं हो पाया।
ऐसी महान आत्मा को मेरा नमन, वंदन। 

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019

रावण कौन है?

रावण कौन है?
रावण को न पहचानते हो, न जानते हो
और न ही पहचानना चाहते हो।
तुम मारोगे कैसे?
तुम जाति, धर्म, सम्प्रदाय में बंटे लोग हो।
तुम संघटन, पार्टी, जमात में बंटे लोग हो।
तुम मारोगे कैसे?
वह कतिथ प्रकांड विद्वान था, बिना इजाजत
स्त्री को छूना पसन्द नहीं करता था।
अब भय, ताकत, रुतबा, पहुंच दिखाकर नोंच
रहे बालिकाओं के जिस्म को,तुमने पहचाना?
बेटी, बेटियों में फर्क करने वालो,बांटने वालो,
तुम मारोगे कैसे?
रेपिस्टों, अत्याचारियों, लिंचिंग के आरोपियों
का महिमा मंडन किसने किया और क्यों?
अनाचारियों को बचाने तिरंगा रैली और जयकारे
किसने लगाये और क्यों? तुम पहचानते ही नहीं,
तुम मारोगे कैसे?
रावण अजर, अमर है। मूर्खों की जमात और
व्यवस्था, अव्यवस्था के बीच।
बुराई, अत्याचार, अनाचार, रेपिस्टों के बीच आज
उसने फिर होने का पुख्ता सबूत दिया।