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मंगलवार, 7 दिसंबर 2010

याद तेरी बेसबब नहीं आती.........

शकील "जमशेद्पुरी"
www.gunjj.blogspot.com
मैं खुद ही मुलाक़ात को चल देता हूँ
मायूसी जब चलके दो कदम नहीं आती
तेरी हर अदा मेरी एहसास में बसी है
याद तेरी बेसबब नहीं आती.........

समंदर आज फिर से खौफज़दा  है
चेतावनी दी है किसी ने सुनामी की
वही होगा जो पहले हो चुका है
अंजाम जैसे तेरी-मेरी कहानी की

इन बातों से कोई दहशत नहीं आती
याद तेरी बेसबब नहीं आती....... 

बहुत करीब थे अपनी मंजिल के हम
ज़रा सा आगे बढ़ कर हाथ बढ़ाना था
में तेरा हूँ, सिर्फ तेरा हूँ
ये बात तुम्हें ज़माने को बताना था

काश के तुझमें कोई झिझक नहीं आती
याद तेरी बेसबब नहीं आती.......

शहर से दूर पहाड़ों के दामन में
मोहब्बत का अपना भी एक घर था
हर एक कोणा, दरो-दीवार और फिजा
सब तेरी खुशबू से तर था.

बड़ी दिनों से तेरी महक नहीं आती
याद तेरी बेसबब नहीं आती.....

कभी जो तू निकल आती थी सावन में
घटा तुझको देख कर बरसती थी.
गुज़र होता जो तेरा बाग़ से तो
तुझे छूने को हरेक डाली लचकती थी.

इन डालियों में अब वो लचक नहीं आती.
तेरी याद बेसबब नहीं आती.....

सोमवार, 6 दिसंबर 2010

धरती पर क्या-क्या मंजर फैला है....

धरती पर क्या क्या मंजर फैला है
आज लगा यहाँ लाशों का मेला है
ऐसे तो जनाजे को लेकर इंसान आता है
पर
मुर्दे को आग देने आज मुर्दा आया है

जिन्दा थे तो सब कहते थे तू मेरा है
लेकिन
इस शमशान में आज शिर्फ़ मुर्दों का डेरा है
कल
दूसरों के तमाशे में हम तमाशबीन बने
उसी दहशत के निशाने पर आज घर मेरा है.....

रविवार, 5 दिसंबर 2010

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कुछ तस्वीरे आपके लिए लेकर आया हूँ... लम्बे समय से आपसे दूर था... दिवाली की छुट्टी मनाकर अभी लौटा हूँ.... बहुत व्यस्त हो गई है लाइफ .... केव्स टुडे में लिख भी नही पा रहा हूँ इन दिनों..... आदित्य अपनी पत्रिका के बारे में लिख चुके है...ख़ुशी इस बात की है कि" विहान " पत्रिका का प्रवेशांक निकल चूका है ... अब दिसंबर की अंक की तैयारी चल रही है... बाजारवाद की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच पत्रिका लगातार निकालते रहना एक बड़ी चुनोती है ... लेकिन हमारे साथ टीम अच्छी है ...... उम्मीद है पत्रिका प्रगति करेगी......
साथियो , इन दिनों लिखने का समय नही मिल पा रहा है .... विहान को लेकर भागादौड़ी कर रहा हूँ ..... अगर लेखन करूँगा तो पत्रिका के लिए समय नही निकल पाउँगा..... वैसे हमारे {सी ऍम डी साहब }"परमार " जी के सख्त निर्देश है कि इन दिनों ब्लॉग पर लिखना और नेट पर बैठना कम ही करे तो ठीक रहेगा क्युकि यही समय है जब पत्रिका को एस्टेब्लिश करना है... इसी के चलते लिखना कम कर दिया है .... परमार जी की बातें माननी पड़ेगी क्युकि वही प्रधान संपादक जो है.... नही तो फटकार सुनने को मिलेगी......क्या पता नौकरी से भी हाथ धोना पद सकता है वैसे भी २००८_२०१० बीच के हमरे केव्स के साथी नौकरी की तलाश में ठोकरे खा रहे है .... लेकिन हमारे (सी ऍम डी ) अलग तरह के है.... जितनी आज़ादी उन्होंने मुझे दे राखी है और शायद ही कोई देता होगा... लिखने से लेकर महत्वपूर्ण फैसले लेने को मैं स्वतन्त्र हूँ.... हमारी टीम के एक साथी रजनीश पाण्डेय का स्वास्थ्य इन दिनों ख़राब चल रहा है.... उनकी कमी खल रही है... आशा है वह जल्द ठीक होकर पत्रिका में अपना योगदान देंगे......
आपको बता दू पत्रिका का प्रचार काफी हो चूका है... ऍम सी यू में हमें हर कोई पहचानने लगा है ..... प्रमोशन बिलकुल "पीपली लाइव " वाले अंदाज में हुआ है पत्रिका के लिए ज्यादा प्रचार करने की जरुरत नही हुई ...... विवेक, आदित्य आपके हाथो में जल्द ही पत्रिका होगी.... भिजवाने की व्यवस्था की जा रही है.......एक खुशखबरी है विवेक भाई आपको विहान का बिहार ब्यूरो चीफ बनाया जा रहा है.... परमार जी के संपर्क में रहिये और वहां से कुछ खबरे हम तक पहुचाये ..........आदित्य जी आप भी खबरे भेजना शुरू कर दीजिये......
घुमक्कड़ी करते हुए कुछ तस्वीरे उतारी है .....नजर फेरियेगा ऐसी उम्मीद है ......डोट कॉम के भी कई प्रकार मार्केट में आ चुके है... सांप , बिच्छु के बाद अब बारी केकड़े की है ....स्वर्णिम मध्य प्रदेश में अब कई तरह के ग्रुप बन्ने लगे है ..... शिव राज मामा अपना प्रदेश की भावना जगा रहे है ....... ग्रुप तस्वीर पर मामा का प्रभाव लगता दिख रहा है...."शनि देव " का तो क्या कहना .... ग्लोबल हो गए है..... जिधर देखता हूँ उधर तू ही तू है... या तो " साईं " या "शनि " देव.... संजय टेलर का भी क्या कहना ॥ अपना प्रचार कर रहे है और पोस्टर चिपकाना मना कर रखा है .....प्रेस की इससे बड़ी आज़ादी और क्या हो सकती है ..... आज़ाद प्रेस नाम से पेपर ............


"भाइयो! मैंने आप पर बहुत ज़ुल्म किया है. इसलिए अपने पापों का......"

शकील "जमशेदपुरी"
www.gunjj.blogspot.com
एक बस्ती थी, जहाँ चूहों का दर्जनों परिवार हसी-खुशी अपनी जिंदगी बसर कर रहा था. दुनिया के भय-आतंक और ईर्ष्या-द्वेष से दूर वो स्वतंत्र हो कर विचरण करते थे। लेकिन उनकी खुशियों को एक दिन किसी की नजर लग गई। चूहे यह देख कर काफी भयभीत हो गए कि एक बिल्ली उसके गांव में घुस आई है। पहले तो चूहों ने सोचा कि शायद ये बिल्ली इस गाँव से होकर गुजर रही है. उधर बिल्ली ने जैसे ही गाँव में कदम रखा, उसे आभास हो गया कि यह चूहों की बस्ती है. उसने इस गाँव में डेरा डाल दिया. फिर तो चूहों का बुरा वक़्त शुरू हो गया. बिल्ली घात लगा कर चूहों का शिकार करने लगी. चूहों का अपने घरों से निकलना भी मुश्किल हो गया. खाने कि तलाश में अब वो बिल से बहार भी नहीं आ सकते थे. स्थिति बद से बदतर होती जा रही थी. चूहों को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालना था. अन्यथा भूख से मरने कि नौबत आ सकती थी. इसी के तहत चूहों के मुखिया ने एक आपात बैठक बुलाई. बैठक में इस बात पर विचार-विमर्श हो रहा था कि बिल्ली से कैसे निपटा जाए? तभी एक चूहे ने कहा- "क्यूं न हम सभी मिल कर बिल्ली पर हमला कर दें." लेकिन से आसान नहीं था. बिल्ली काफी चालाक थी और फुर्तीली भी. साथ ही इसमें जान का जोखिम भी था. तभी पिछली पंक्ति से एक युवा चूहे  ने कहा- "बगल के गाँव में मेरा एक कुत्ता दोस्त रहता है.वो हमारी मदद कर सकता है. अगर उसे यहाँ बुला लिया जाए तो वो बिल्ली को खदेड़ देगा." यह राय सभी को पसंद आई. चूहे के मुखिया ने आदेश दिया कि कल ही वो उस कुत्ते से जाकर इस संदर्भ में बात करे.

अगली सुबह वो चूहा बिल्ली कि नज़रों से बचते बचाते बगल के गाँव के लिए प्रस्थान किया. उस चूहे ने कुत्ते के सामने अपना प्रस्ताव रखा. कुत्ते ने साफ़ इनकार कर दिया, ये कह कर कि २४ दिसम्बर से उनके फर्स्ट सेमेस्टर कि परीक्षा है और वो अभी भौकने  कि प्रक्टिस कर रहा है. चूहे के काफी निवेदन करने के बाद आखिरकार कुत्ता तैयार हो गया.
जैसे ही वो कुत्ता चूहों के गाँव में आया, बिल्ली अपने घर में दुबक गयी. कुत्ते ने बिल्ली के घर के सामने डेरा दाल दिया. अब बाज़ी पलट चुकी थी. बिल्ली का घर से निकलना मुश्किल हो गया और चूहों के पुराने दिन वापस लौट गए. कुत्ते के लिए नाश्ते और खाने का इंतज़ाम चूहे ही करते थे. कुत्ता दिन-रात बिल्ली के घर के बाहर बैठा रहता था. ऐसे में बिल्ली के लिए मुसीबत बढ़  गयी. कुछ दिन तक तो बिल्ली कुत्ते के जाने का इंतज़ार करती रही, लेकिन अब भूख से उनकी हालत पतली होने लगी थी. वो अपने घर से बाहर भी नहीं निकल सकती थी, क्यूंकि बाहर कुत्ता २४ घंटे मुस्तैद रहता था.
तभी बिल्ली के शातिर दिमाग में एक योजना आई. एक कुतिया से उनका अच्छा-ख़ासा परिचय था. बिल्ली ने सोचा कि वो उस कुतिया से बात करेगी और कहेगी कि वह इस कुत्ते को अपने प्यार में फंसा कर यहाँ से दूर ले जाये. बिल्ली ने तत्काल उस कुतिया से संपर्क किया. कुतिया एक झटके में तैयार हो गयी. अगले दिन वो कुतिया उस गाँव में आई और कुत्ते पर डोरे डालने लगी.कुत्ते को पता था कि बिल्ली काफी शातिर दिमाग है. इसलिए कुतिया के प्यार भरे इशारों में उसे साजिश कि बू आ रही थी. उस कुतिया ने अपने स्तर  से काफी प्रयास किया, पर कुत्ते के ईमान  को डगमगाने में नाकाम रही. बिल्ली कि ये योजना पूरी तरह नाकाम हो गयी. भूख प्यास के मारे उसका और भी बुरा हाल हो गया था. अगर जल्द ही वह कोई वैकल्पिक उपाय नहीं करती तो भूख से वैसे भी मारी जाती. आखिरकार बिल्ली ने तुरुप का इक्का निकाला और कुत्ते से निपटने का पूरा बंदोबस्त कर  लिया.

अगली सुबह से वह स्वयं कुत्ते पर प्यार के डोरे डालने लगी. पहले तो कुत्ते ने अपने ऊपर संयम रखा, लेकिन बिल्ली को दूसरी बिरादरी कि लड़की होने का फायदा  मिला. एक रात बिल्ली ने खिड़की को खुला छोड़ दिया और निवस्त्र हो गयी. कुत्ते का धैर्य ज़वाब दे गया. उसका ईमान डगमगाने लगा. उस रात दोनों एक-दूसरे के आगोश में आ गये. बिल्ली के पास ये सुनहरा मौका था कुत्ते से छुटकारा पाने का. मौका पाते ही बिल्ली ने चूहे के गले पर वार किया और अगले ही क्षण कुत्ता ढेर हो गया.

चूहे के बुरे दिन फिर से वापस आ गए. बिल्ली का तांडव फिर से अपने चरम पर पहुँच गया. चूहों के पास अब कोई विकल्प भी नहीं था, सिवाय बिल्ली के ज़ुल्म को सहने के और खौफ के साए में जीने के अलावा. चूहों को मार कर खाने का बिल्ली का सिलसिला अनवरत चलता रहा, और फिर एक दिन........

एक दिन चूहे ये देख कर हैरान हो गए कि बिल्ली उसका गाँव छोड़ कर जा रही है. वास्तव में महीनों चूहे का मांस खाने से बिल्ली उब गयी थी. इसलिए बिल्ली यहाँ से दूर जा रही थी. लेकिन बिल्ली ने जाते जाते भी कोई मौका नहीं छोड़ा. वह चूहों को संबोधित करते हुए बोली- "भाइयो! मैंने आप पर बहुत ज़ुल्म किया है. इसलिए अपने पापों का प्रश्चित  करने तीर्थ यात्रा पर जा रही हूँ. हो सके तो मुझे माफ़ कर देना."

प्यारे साथियो! कहानियों के पठन-पाठन की भारतीय परम्परा बेहद पुरानी है. हर कहानी में कुछ न कुछ संदेश छुपा होता है. खासकर जब कोई संदेशपरक कहानी हो तो उसका अर्थ और भी गूढ़ हो जाता है. तो इस कहानी से आपको क्या सन्देश मिला, हमें ज़रूर बताईयेगा, अपने बहुमूल्य टिप्पणियों के जरिये.
                                                

शनिवार, 4 दिसंबर 2010

व्यस्तता...

दोस्तों नमस्कार, बहुत समय के बाद आपसे मिल रहा हूँ.  क्यूंकि मै भी किसी बड़े आदमी की तरह व्यस्त था. बड़ा आदमी हमेशा व्यस्त रहता है, इसीलिये वाह सफल है.  कारण साफ़ है व्यस्तता रहने के कारण या यूँ कहे  की व्यस्तता की काली चादर ओढ़ कर मै यानी एक व्यस्त आदमी आप से हमेशा यही कहता हूँ की... कुछ देर में फ़ोन करता हूँ. नहीं तो बाद में बात होगी. लोग जब मुझसे कहते हैं की कुछ लिखो यार तब मै कहता हूँ इतना काम है की यार फुर्सत ही नहीं मिलती. और मन ही मन मै बड़ा आदमी यह सोचता हूँ की मैंने अपना समय फालतू काम और फालतू समाज से बचा लिया.  ये फुर्सत न मिलना कितना बड़ा और सटीक बहाना है. खासकर मेरे लिए.. बड़ी-बड़ी बाते हांकना.  मेरे लिए बहुत आसान है, क्या हुआ कुछ देर जुबान ही तो खोलना और बंद करना है. व्यस्तता आप और सबके लिए बहुत सही है ख्याल रहे की ये व्यस्तता आपके और हमारे लिए कंही सामाजिक असफलता का कारण न बन जाए.

दिल जलाते हैं और शम्मा बुझाए रखते हैं...

       शकील "जमशेदपुरी"

 अपने वजूद को दर्द से सजाए रखते हैं
 दिल जलाते हैं और शम्मा बुझाए रखते हैं

ये मेरे रात भर रोने की गवाही है
पत्तियों पर शबनम का जो पहरा है
इतनी सी बात कब समझेंगे वो  
जख्म दिल का तेरे प्यार से गहरा है

फिर भी तेरी तस्वीर दिल में समाए रखते हैं
दिल जलाते हैं और शम्मा बुझाए रखते हैं

रात भर मैंने जो आसमां की निगहबानी की
                                      चांद और तेरे हुस्न की आजमाइश में
                                      और तुम जो जागती रही रात भर 
                                    खलल पड़ता रहा सितारों की नुमाइश में

अब तेरी तस्वीर को पलकों में छुपाए रखते हैं
दिल जलाते हैं और शम्मा बुझाए रखते हैं

हम समझते थे वो समझती है खामोशी की जुबां
अब उनके समझ की इंतेहा हो गई
चुप रहने को बेहतर समझते रहे "शकील"
तेरी यही खामोशी एक दास्तां हो गई

जागते अरमां को अब सुलाए रखते हैं
दिल जलाते हैं और शम्मा बुझाए रखते हैं

परेशान है लोग वोडाफोन की चोरी से....

वोडाफ़ोन एक नेटवर्क कम्पनी जो लोगो को सस्ते दामो पर सेवाए प्रदान करने का विज्ञापन करती है और हच कम्पनी को खरीद कर भारत आयी है आज लोगो की जेबों पर भरी पड़ रही है, कही यह एक साजिश तो नहीं कुछ हो पर इसका काम करने का अंदाज ईस्ट इंडिया कम्पनी की याद दिलाती है इस कम्पनी ने हमरे देश के गाँव गाँव तक पहुच बना लेने के बाद अब देश की गरीब औए अशिक्षित जनता की जेब पर डाका डालने का काम शुरु कर दिया ।
हमारे देश की बड़ी आबादी जो गाँवो में रहती है वो या तो अशिक्षित या यूँ कह ले की अल्प शिक्षित है खास तौर से तकनीकी संबंधी जानकारी रखने वालो की संख्या तो न के बराबर है वह जनता बेबाकी से इस संचार क्रांती युग में मोबाईल फ़ोन का प्रयोग करती है ऐसे में वोडाफ़ोन कम्पनी ग्राहक की मांग के बिना ही उनके फ़ोन पर विभिन्न तरह की सेवाए शुरू कर देते है और उसके एवज में मासिक किराया उनके बैलेंस से कट लेते है लोग दुखी तो बहुत होते है मेरा पैसा कट लिया गया पर वो इसके बारे में शिकायत कहा करे इसका ज्ञान उनको नहीं और वो संतोष कर के बैठ जाते है की चलो इतना ही कटा फिर कटेगा तब किसी से बात करेंगे और इस बहाने कंपनी को लाखो का फायदा चोरी से हो जाता है, यह क्रम लगातार महीने दर महीने चलता रहता है और लोग परेशां होकर भटकते रहते है , उनके पास एक उपाय है की वो नंबर बदल दे लेकिन समस्या यह है की उनके घर के लोग परदेश कमाने गए होते है और नया नंबर लेने में तमाम तरह की कानूनी औपचारिकताये पूरी करनी पड़ती है जो एक नाजायज खर्च भी है।
इस समस्या के बारे में मै सुनता तो बहुत दिन से था पर भरोसा तब हुआ जब दीपावली की छुट्टी पर मै घर गया मेरे गावों के वोडाफोन उपभोक्ताओ में से ८०% लोग इस समस्या से पीड़ित थे जिनमे से कईयों के लिए मैंने कस्टमर केयर पर फ़ोन करके उनकी सेवाए बंद करवाई और भी प्रबल भरोसा तब हुआ जब बिना मेरी अनुमति लिए यह सुबिधा मेरे फ़ोन पर चालू कर दी गयी, जब मैंने इस बीमारी के बारे में जनसंपर्क स्थापित किया तो लोग इस कंपनी को गालिया देकर कह रहे थे की यह कम्पनी चोर है और बिमारो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी मेरे घर के सभी लोगो ने अपना सिमकार्ड बदल दिया था कारण पूछा तोबस वही वोडाफ़ोन चोर है ।
समस्या इतनी ही होती तो भी काम चल सकता था पर आगे की कहानी कुछ यूँ है की जब मेरा पैसा कटा गया तो मैंने भी निर्धारित प्रक्रिया की तरह कस्टमर केयर में बात की वहा से पहला जबाब यह आया की की सर अगर आपका पैसा काट लिया गया है तो निश्चित ही आपने इस सेवा के लिए मांग की होगी अर्थात मै झूठा कई तरह से संतुस्ट करने के बाद मुझे कई अंको का एक शिकायत नंबर दिया गया और साथ ही यह बतया गया की आप निश्चिन्त रहे अगर आप का पैसा गलत कटा गया होगा तो ७२ घंटो के अन्दर आप को वापस कर दिया जायेगा । धीरे धीरे ७२ घंटे बीते पैसा वापस नहीं आया मैंने फिर बात की जवाब - सर अगर आपका पैसा वापस नहीं हुआ है तो इसका मतलब आपका पैसा सही कटा गया है और आपने इस सेवा की मांग अवश्य की होगी । इसके बाद सब ख़तम पैसा भी गया झूठे भी बने और अब कुछ नहीं करसकते है सिर्फ एक रास्ता की सिम बदल दू । अब से पहले मैंने अपने आपको इतना कमजोर कभी नहीं समझा था मै लाचर था मेरे पास सब कुछ है सबूत है गवाह है खुद को सही प्रमाणित करने के लिए पर मै कुछ नहीं कर सकता ज्यादा से ज्यादा अपनी भड़ास निकालने के लिए फिर से उस गरीब को गली दे सकता हू जो इस विदेशी चोर कंपनी की गुलामी कर रहा है लेकिन मै जनता हू वह तो मजबूर है ...
पर वह रे हमारी भारतीय निजी क्षेत्र की कंपनी एयरटेल एक फोन पर पैसा वापस बस इतना बताना पड़ा की बिना मेरी अनुमति के फला नंबर पर यह सुबिधा लगा दी गयी है जिसके एवज में पैसा काट कर मुझे दुविधा में दल दिया गया है मै छठा हू की इस सुबिधा को मेरे फोन से हटा दिया जाये और मेरा पैसा वापस कर दिया जाये -जबाब ओके सर कुछ देर में आपके फोन पर एक सन्देश आएगा और आपका पैसा वापस कर दिया जायेगा और ५ मिनट के अन्दर पैसा वापस ....
इन विदेशियों से निपटने की कोई कारगर योजना सरकार बना नहीं रही या बनाना नहीं चाहती यह तो मै नहीं जनता पर यह जरूर जनता हू की यह सब बड़े पैसे वाले लोग है और कुछ भी खरीद सकते है लोगो की जमीर को भी और तो किया था ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने दूसरी बात थ्री जी स्पेक्ट्रम यह भी बताता है की अब कोई भी बिक सकता है बस कीमत मुफीद हो .......
मै तो बस इतना ही कहूँगा की लोग वोडाफोन की चोरी से परेशान हैबाकी जाने सरकार और जनता........

शुक्रवार, 3 दिसंबर 2010

....जब से यह करम हुआ.

शकील "जमशेदपुरी"
तस्वीर गूगल के सौजन्य से!
छत पे तुम जो आ गई तो लोगों पे सितम हुआ
अमावस की रात में भी चांद का भ्रम हुआ

जिंदगी लगी थिरकने दूर रंजो-गम हुआ
मुझपे तेरे प्यार का जब से यह करम हुआ

याद तेरी आ गई और मुझसे यूं लिपट गई
गीत लिखने के लिए हाथ में कलम हुआ

लोग पूछते है मुझसे राज मेरे गीत का
क्या कहूं मैं उनसे कि बेवफा सनम हुआ

मिट सकेगी क्या कभी हीर-रांझे की दास्तां
"शकील" तेरे प्यार का किस्सा क्यों खत्म हुआ?

बुधवार, 1 दिसंबर 2010

करीब से देखा मैंने ...................

चीख पुकार का वो मोत का मंज़र ,
उस मनहूस रात कों करीब से देखा मैंने ...

न जाने कितने गुनहगारो कों लील गयी वो
अपने ही हाथो से मोत कों फिसलते हुए, करीब से देखा मैंने...

धरती कों प्यासा छोड़ गयी वो
भूख से तडपते हुओ कों करीब से देखा मैंने ...

शहर का हर वो कोना जिसमे बस लाशे ही लाशे
कयोंकि लाशे से पटती धरती कों करीब से देखा मैंने .....

चिमनी से निकलता हुआ वो ज़हरीला धुँआ
शहर कों मोत की आगोश में सोते हुए, करीब से देखा मैंने ..

२६ साल स बाकि है अभी वो दर्द
लोगो को आंधे,बहरे और अपंग होते हुए, करीब से देखा मैंने ....

याद आता है माँ का वो आचल
माँ के आसुओ कों बहते हुए, करीब से देखा मैंने ....

(मेरे यह कविता भोपाल गैस त्रासदी के ऊपर लिखी गयी है, जिसको २ & ३ दिसंबर कों पूरे २६ वर्ष होने जा रहे है ....)
.वर्ष १९८४ की वह मनहूस रात कों यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक सयंत्र से मिथाईल आइसोनाइड गैस का रिसाव होने से हज़ारो लोगो की मोत हो गयी थी

ललित कुमार कुचालिया
09752395352

शनिवार, 27 नवंबर 2010

हर्ष , रजनीश और प्रवीण परमार ......आप लोगो को विहान पत्रिका निकालने के लिए बहुत - बहुत शुभकामना.......


आज जहाँ एक ओर मीडिया में नौकरी की अनिश्चितता दिखाई दे रही है....कोई तरीका नही समझ आ रहा है की आखिर अच्छी नौकरी पाई कैसे जाए....नौकरी पक्की कैसे हो.....हमारे अंदर सब कुछ है....डिग्री ही नही ज्ञान भी .....और जितना अनुभव होना चाहिए उतना अनुभव भी....बावजूद इसके ....कहीं न कहीं कुछ कमी है....भले ही वो सिस्टम की हो या हमारी.....लेकिन कमी  है.....अधिकतर लोग दिल्ली से भोपाल....महाराष्ट्र से दिल्ली....मै खुद रीवा से दिल्ली और भोपाल का चक्कर लगाता  रहता हूँ.....क्यों, सिर्फ और सिर्फ अपने मन मुताबिक नौकरी के लिए.......
    इस बीच माखनलाल विश्वविद्यालय के कैव्स के तीन योद्धा हर्ष-प्रवीन और रजनीश विहान नाम की पत्रिका  निकाल रहे हैं..और भी तमाम लोगो का सहयोग है इसमें सभीके बारे में मै ज्यादा नही बता पाउँगा.....लेकिन  कैव्स का स्टुडेंट रहने के कारण मेरे लिए यह ....बहुत ही खुसी और गर्व की बात है......मै हर्ष जी के लिए चार पंक्तियाँ कहूँगा..........
                      ...........गुमनामो की पहचान हो  तुम
                                 संघर्ष के दूजा- नाम   हो   तुम
                                 ऐ  हर्ष  तुम्हारा   क्या   कहना
                                विहान हो तुम-विहान हो तुम ........

जी हाँ अपने व्यक्तित्व के अनुरूप ही इस पत्रिका का नाम विहान रखा है हर्ष भाई ने......एक बात और कह दू की हर्ष जी की तारीफ के साथ-साथ  मै .......विहान के प्रबंध सम्पादक रजनीश जी और प्रधान  सम्पादक प्रवीण परमार जी को भी बहुत बधाई और धन्यवाद देता हू....इस पत्रिका का सभी को इंतजार है........कोशिश अच्छी है......मात्र दो पंक्तियों  के साथ......... 
                     ........बाधाओं   से  डरकर  नौका  पार   नही  होती 
                             कोशिश करने वालो की कभी  हार  नही होती.......
विहान विहान विहान विहान और बार-बार विहान पत्रिका की सफलता के लिए सुभकामना देता हू......चूँकि विहान की टीम मेरे दोस्तों की है इसलिए ....कुछ ज्यादा या गलत लिख दिया हू तो सभी दोस्तों और पाठको से माफ़ी चाहूँगा..... 
                                                         

शुक्रवार, 26 नवंबर 2010

विहान

निष्पक्ष ............

निर्भीक.................


जनपक्षीय सरोकारों की दिशा में .............


एक पहल...................

" विहान "


निष्पक्ष एवम रचनात्मक सोच की पक्षधर पत्रिका .............




कीजिये कुछ इन्तजार..............

जल्द ही आपके हाथो में होगी


" विहान "

बुधवार, 24 नवंबर 2010

फ्रस्टेट लालू क्या किया , खैनी दिया बनाय.........

बिहार में नितीश को भारी बहुमत मिला  और एन डी ए  की सरकार फिर बन गई  .....इसमें आस्चर्य जैसी कोई बात नही है.....लेकिन मीडिया को रोज कोई न कोई मसाला चाहिए....मिल गया मसाला.....नीतिस की जीत...एन डी ए की जीत.... विकास की जीत...बात लालू की भी होनी चाहिए.....मै करता हू..........दरअसल लालू कभी नेता थे ही नही......वे तो नेता कम नही बल्कि जोकर हैं..... ऐसी बात नही है की लालू की जरुरत इस देश की जनता को नही है.....है जरुर है...... लालू की बहुत जरूरत है.....गरीब जनता को लालू की बहुत जरूरत है .....लेकिन मुख्यमंत्री और रेलमंत्री  की कुर्सी पर बैठने के लिए नही बल्कि लाफ्टर शो में जाकर लोगो को हंसाने के लिए...... वैसे भी आज के भाग दौड़ की इस दुनिया में बहुत टेंशन है.....लालू कुछ  टेंशन कम करदें यही उनकी तरफ से इस देश की जनता के लिए सच्ची सेवा होगी........रही बात नितीश के जीत की तो एक तो उन्होंने बिहार में कुछ काम किया था.....दूसरी बात मैदान में कोई था भी नही......राहुल गाँधी हर समय युवाओं को बेवकूफ बनाकर वोट बैंक बनाने  में कामयाब नही हो सकते.......आगे भारत माता की जय.....

मंगलवार, 16 नवंबर 2010

हुनर हमको भी आता है.....

शकील "जमशेदपुरी"
फोटो गूगल के सौजन्य से!
फूल में खुशबू है तुझसे, महकता है तेरे खातिर
चिंगारी शोलों में भी है, भड़कता है तेरे खातिर
बेशर्मी चांद की देखो ये तकता है तुझे अब तो
बेशर्मी इस दिल की देखो, धड़कता है तेरे खातिर

अंधेरा फिर घना छाया जुल्फ तूने जो लहराई
तेरा चेहरा जो देखे तो चांद लेता है अंगड़ाई
बहुत सुनते थे चर्चा फूल, कलियां और शबनम की
तुझे देखा तो जाना है कि सब तेरी है परछाई
 

पल्लू में चेहरा छुपाना भी तेरा यूं मुस्कूराना भी
गजब ढाता है यह मुझपर तेरा पलकें छुकाना भी
मुझे हर एक पन्ने में तेरा चेहरा झलकता है
पढूं कोई कहानी या पढूं कोई फसाना भी

प्यार शाजिस है गर तेरी तो इश्क है मेरा पेशा
दिखावा दिल मिलाने का भला यह खेल है कैसा!
निगाहों में बसाकर फिर निगाहों से गिरा देना
हुनर हमको भी आता है मगर करते नहीं वैसा

संघ आतंकवादी क्यों नहीं हो सकता!

फोटो गूगल के सौजन्य से.
यह पहला मौका था जब कोइ संघ प्रमुख खुद धरने में शामिल हुआ हो। हलांकि धरना प्रदर्शन न तो संघ की संस्कृति रही है न ही स्वभाव। तो फिर क्यों खुद संघ प्रमुख धरने पर बैठ गए। इतना ही नहीं, शायद यह पहला मौका होगा जब संघ को अपना अस्तित्व साबित करने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा हो। उधर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के पूर्व प्रमुख सुदर्शन ने तो सोनिया गांधी को अवैध संतान तक कह डाला। साथ ही राजीव गांधी और इंदिरा गांधी की हत्या में भी उनके हाथ होने की बात कही। और तो और सुदर्शन साहब ने तो सोनिया गांधी पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA की जासूस होने का इल्जाम भी मढ़ दिया।
आखिर क्या वजह है कि संघ की ओर से ऎसे बेसिर पैर वाले बयान आ रहे हैं। आखिर क्यों उन्हें धरना प्रदर्शन पर बाध्य होना पड़ा। इसका उत्तर एक शब्द में दिया जा सकता है- "बौखलाहट"।

संघ की यह बौखलाहट स्वभाविक भी है। पहले तो गृह मंत्री ने "भगवा" आतंकवाद शब्द का प्रयोग किया। फिर राहुल गांधी ने संघ की तुलना सिमी से की दी। और अब राजस्थान ATS द्वारा किए जा रहे जांच में नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अजमेर, हैदराबाद, मालेगांव और समझौता एक्सप्रेस धमाकों के तार संघ से जुड़ रहे हैं। अभी हाल ही में संघ के पदाधिकारी इंद्रेश का नाम अजमेर धमाकों से जुड़ा। ऎसे में संघ की बौखलाहट स्वभाविक है। "सच्चे देशभक्त" की छवि दांव पर लगती दिख रही है। हलांकि संघ आतंकी गतिविधियों में अपनी संलिप्तता को कांग्रेस की साजिश करार दे रहा है।

अब मेरी संघ से कोइ जाती दुश्मनी तो है नहीं। मैं मान लेता हूं कि संघ जो कह रहा है वो शत-प्रतिशत सही है। यानी कांग्रेस संघ को बदनाम करने के लिए जांच एजेंसि का दुरुपयोग कर रही है। मुझे यह मानने में भी कोइ आपत्ति नहीं कि संघ परिवार सबसे बड़े देशभक्त और भारतीय सभ्यता एंव संस्कृति के रक्षक हैं। और एक देशभक्त कभी आतंकी गतिविधियों में लिप्त नहीं हो सकता! उन्माद से उनका दूर-दूर तक कोइ सम्बंध नहीं हो सकता! इस तथ्य के मूल्यांकन के लिए हमें इतिहास के पन्ने पलटने होंगें।

1920 में पूरा देश गांधी जी के नेतृत्व में आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। इस दौरान हिंदू-मुस्लिम संगठित हो गए थे। अंग्रेजी हूकूमत को यह एहसास होने लगा था कि यदि भारत पर अधिक समय तक शासन करना है तो हिंदू-मुस्लम एकता को विघटित करना होगा। इसी दौरान RSS का गठन हुआ। कहा तो यहां तक जाता है कि RSS का गठन अंग्रेजों ने हिंदू-मुस्लिम के बीच फूट डालने के उद्देश्य से कराया था। यह बहुत हद तक सच भी लगता है जब हम पाते हैं कि 1920 से 1947 तक कोई भी RSS का नेता जेल नहीं गया। 1920 के बाद के राजनीतिक परिदृश्य पर गौर करने पर हम पाते हैं कि अंग्रेजों ने हर तरह से हिंदू-मुस्लिम के बीच मतभेद कायम करने की योजना बनाई। मुस्लिम लीग को दोबारा गांधी से अलग करना  इसी योजना का प्रतिफल था। आरएसएस का गठन भी करवाया गया और उन्हें यह जिम्मेदारी भी सौंपी गई कि देश के हिंदू को गांधी से दूर ले जाएं। भीष्म साहनी की पुस्तक "तमस" से पता चलता है कि किस तरह 1947 में बंटवारे से पहले आरएसएस वालों ने एक गरीब आदमी को पैसे देकर मस्जिद में सूर फुंकवाए। साम्प्रदायिकता फैलाने वाले इसी तरह से अपना काम करते हैं। यह बात और है कि बदलते वक्त के साथ उन्होंने नए-नए तरीके ईजाद कर लिए हैं। स्वतंत्रता प्राप्ति के साढ़े पांच महीने के अंदर महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई। यह हत्या एक विचारधारा द्वारा की गई थी। वर्तमान में संघ उसी विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है।

ऐसे एतिहासिक परिपेक्ष्य में यह कहना कितना उचित है कि संघ वाले उन्माद नहीं फैला सकते? वह धमाके नहीं कर सकते? और वह एक सच्चे देशभक्त हैं? जाहिर है संघ की हिमायत की उम्मीद उसी से की जा सकती है जो खुद संघ परिवार से हैं-----एक हिंदूस्तानी से कदापि नहीं। दशहरे के दिन संघ वाले "शस्त्र" पूजा करते हैं जो इस बात का प्रमाण है कि अपनी नीतियों को पूरा करने के लिए हिंसा का सहारा लिया जा सकता है। संघ की नीतियों से हम सभी वाकिफ है। उनकी नीति हिंदूत्व पर आकर समाप्त होती है।
                                                                                                                           

शुक्रवार, 12 नवंबर 2010

राहुल गाँधी जी आप चुप क्यों हैं......


.......आपने कहा था कि आर एस एस और सिम्मी एक जैसे संगठन यानि कि राष्ट्र विरोधी हैं....अब संघ के  पूर्व प्रमुख ने कहा कि सोनिया गाँधी ने  इंदिरा गाँधी और  राजीव गाँधी कि हत्या का साजिस  रचा था.....१२ नवम्बर 2010 के भास्कर अख़बार में ये भी लिखा है की सुदरसन जी ने सोनिया गाँधी को अवैध सन्तान कहा था...किसने गलत कहा किसने सही......ये साबित करने का काम मेरा नही है....लेकिन आप से गुजारिस है कि अगर आर एस एस राष्ट्र विरोधी संगठन है तो इस पर प्रतिबंध लगवाइए .....केंद्र में आपकी सरकार है......और अगर ऐसा कराने का साहस नही है तो बे सर पैर कि बात करके अपनी राजनीती चमकाने की  आइन्दा  कोशिस मत करिए......वर्ना कोई और सुदरसन आपको कुदर्शन करा देगा और आप दूरदर्शन पर देखते रह जाएँगे.....

बुधवार, 10 नवंबर 2010

हिंदुस्तान के अगुआ यानि कि सरदार मनमोहन सिंह जी आप जनता कि भावनाओं का कद्र क्यों नही करते...आपको सिर्फ सोनिया और राहुल जी के इशारे का इंतजार रहता है क्यों....

70 हजार करोड़ रुपया किसानो का कर्ज  माफ़ करके केंद्र सरकार आज तक दहाड़ती है......जबकि स्पेक्ट्रम वितरण  में केवल 1658 करोड़ रुपया केंद्र को मिला...1, लाख 76 हजार  7 सौ करोड़  रुपया घोटाले में कोई जवाब देने वाला नही है.....क्यों.....गठबंधन कि सरकार क्या इसी तरह चलेगी.....ए राजा को हटाया क्यों नही जा रहा है.....फैसला मनमोहन सिंह को करना चाहिए ....लेकिन करूणानिधि पर फैसला छोड़ा जा रहा है.......जबकि जयललिता ने कहा है कि राजा को हटाओ मै बिना शर्त समर्थन देने को तैयार हू.....साहस दिखाने का वक्त है.....मनमोहन सिंह जी ये देश का अबतक का सबसे बड़ा घोटाला है.....क्या आप  हिंदुस्तान के सबसे बड़े अर्थशास्त्री के राज में सबसे बड़ा घोटाला कराने  का रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं..........कुर्सी का मोह छोड़ दीजिये ...खुलकर फैसला लीजिये.......हिंदुस्तान कि विशाल  आम जनता का लाभ लेने अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा तक आ पहुंचे....लेकिन हिंदुस्तान के अगुआ  यानि कि सरदार मनमोहन सिंह जी  आप जनता कि भावनाओं का कद्र क्यों नही करते...आपको सिर्फ सोनिया और राहुल जी के इशारे का इंतजार रहता है क्यों.........ए राजा को हटाओ--देश बचाओ,   पाई--पाई वसूलकर एक बार फिरसे किसानो के हित में कुछ कमाल कर दिखाइए.....

शनिवार, 6 नवंबर 2010

              माफ़ कीजियेगा पत्रकार किसीको नही चाहिए...

वर चाहिए---वधु चाहिए  .....डाक्टर चाहिए
                                          इंजीनियर चाहिए
                   प्राइमरी स्कूल का सरकारी मास्टर भी चलेगा
                   सेना का जवान तो दौड़ेगा
                   पुलिस  या  रेलवे में तो क्लर्क क्या चपरासी भी चल सकता है.................................................लेकिन लेडिज एंड जेंटल मैन, माफ़ कीजियेगा पत्रकार किसीको नही चाहिए..........................


 क्यूँ नही चाहिए ......इसका कारण ये है की पत्रकारों की स्थिति अब  वो नही रही जो पहले कभी हुआ करती थी........गली-गली जर्नलिज्म के फैक्ट्री खुलते जा रहे हैं...और मीडिया के लिए सस्ते दर  पे मजदूर आसानी से मिल जा रहे हैं........खैर कुछ लोग जो इत्तेफाक से सेटल हो चुके हैं......वो इंकार कर देंगे.....वो कहेंगा.....म्य्लोर्ड ये सब बकवास है लेकिन आपको यकीं दिलाने के लिए कि मेरी बात सही है ये कहानी काफी है........................................एक समाचार पत्र के सम्पादक महोदय हैं.....उनके दो लड़के हैं....एक है पत्रकार....बोले तो नई दुनिया में रिपोर्टर है....जबकि दूसरा जो कि उनका छोटा बेटा है ......प्राइमरी स्कूल में मास्टर है.....बोले तो उसने बीए के बाद बीएड  किया था......अब सम्पादक जी परेसान हैं कि उनके छोटे बेटे के लिए लड़की वाले आ रहे हैं ...कोई दस लाख तो कोई पन्द्रह लाख देने को तैयार है.....सम्पादक जी बहुत दुखी हैं क्योंकि पहले वो अपने बड़े बेटे कि शादी करना चाह रहे हैं ......उनकी समस्या ये नही है कि बड़े लडके के लिए कोई नही आ रहा है.....बल्कि मुख्य समस्या ये है कि 2 .5  -3  लाख से ज्यादा कोई दे नही रहा है .....जबकि लड़का जागरण मीडिया इंस्टिट्यूट नॉएडा से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट है ..........आगे आप समझ सकते हैं.....कि पत्रकारों को आम लोग इज्जत तो देते हैं....लेकिन समझते हैं कि झोला लेकर घूमेगा......खैर कहानी यहीं ख़त्म करता हू....और ये कहानी बुझदिलों को डरा  सकती है ......हम जैसे लोग तो सोच समझ कर आये हैं....खासकर माखनलाल यूनवर्सिटी के लोग तो बिंदास होकर पत्रकारिता कर रहे हैं....और आगे भी करेंगे........आपको ऐसा लग रहा होगा कि बात को कहाँ से सुरु किया था और कहाँ ख़त्म कर रहा हूँ........लेकिन ..........फिर से ये बताना चाहूँगा कि मेरे परिचय के वो सम्पादक जी गाँव क्षेत्र से बिलोंग करते हैं......और गाँव में इन सरकारी मास्टर आदि को बहुत इज्जत मिलती है.....जबकि .......पत्रकार को जुझारू प्राणी समझा जाता है जो कि वो है.......आगे मै अपनी बात को ख़त्म नही कर पा रहा हू.....सब कुछ के बाद माफ़ कीजियेगा ......मै पत्रकारिता में आकर फिलहाल खुस हू.....उम्मीद है कि आप अगर पत्रकार हैं या पत्रकारिता कि पढाई कर रहे   हैं तो आप भी इस पेशे से हमेशा  खुस रहेंगे............खुदा हाफिज.....

हिंदुस्तान में असली भी कुछ है क्या..............हो तो बताना ............हिंदुस्तान में असली भी कुछ है क्या..............हो तो बताना .... हिंदुस्तान में असली भी कुछ है क्या..............हो तो बताना ... .


होशियार ये सरदार  नकली है ....इसके राज में हर चीज नकली है...
रोजाना न्यूज पेपर में निकल रहा है......होशियार.........
1 ...दीपावली में खोवा नकली , मिठाई नकली.
२ ..देशी घी नकली..
3 ..पेठा नकली..
4 ...सब्जी नकली ..( केमिकल वाला इंजेक्शन लगाकर तैयार  )
5 ..फल नकली...( वही सब्जी वाला हाल  )
6 ..डिग्री नकली...फर्जी डिग्री वाले लोग नौकरी कर रहे हैं...यूपी में शिक्षा मित्र बनाया जा रहा है डिग्री के अंको के आधार पर ( कुछ लोग सीधे फर्जी डिग्री लगा देते हैं तो कुछ थोडा शर्म वाले हैं जो गांव-देहात में जाकर नकल वाले सेंटर से नकल करके डिग्री हासिल कर रहे हैं और नौकरी पाकर आने वाली पीढ़ी का भविष्य खराब करने को तैयार हैं  और जो बेचारे कम नम्बर पाने वाले ईमानदार लोग हैं वो सरकार के इस निति को कोसते  नही थकते ज्यादा विस्तार में क्या जाऊं  बात आको समझ में आ ही गई होगी ...इस निति के जिम्मेदार माननीय मुल्ला मुलायम सिंह और हमारी आपकी मुहबोली  बहन मायावती जी हैं.....इस धरती पर इन लोगों का साम्राज्य ख़त्म करने वाला तो कोई फ़िलहाल दिखाई नही देता...हो सकता है पूतना और कंस को सबक सिखाने वाला कन्हैया भी इनके कारनामो को देख रहा हो ....आएगा....एक दिन वही आएगा  )
7 ..हितग्राही नकली....नकली लोग गरीबी रेखा के निचे का राशन कार्ड बनवाकर ऐश कर रहे हैं ...और गरीब लोग इधर से उधर दौड़ रहे हैं की मेरा राशन कार्ड बनवा दो नेता जीc....नेता जी कह रहे हैं की इतना नोट खर्च करके चुनाव जीता हू ..इसीलिए की राशन कार्ड बनवाता फिरू....
8 ...दवा नकली....
9 ....दारू नकली....
10 ....बेटा नकली.........ये हम नही कह रहे हैं ....ये तो अपने नारायण दत्त तिवारी जी का कहना है की रोहित उनका बेटा नही है.....मतलब .....आप समझ जाइये...
11 .....
१२ ...
13 ....ये लिस्ट ख़त्म होने वाली  नही है लेकिन जो सबसे महत्वपूर्ण बात मै इन नकली चीजों के लिस्ट को गिनाकर बताना चाह  रहा हूँ ....वो है अपने देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा नकली सरदार मनमोहन सिंह....जी हाँ सरदार नकली है......ये बात भी मै नही कह रहा हू...ये बात भी सिद्ध होती है .....फोर्ब्स पत्रिका द्वारा जारी दमदार सख्सियतों के लिस्ट से.....सोनिया गाँधी को 9 वां स्थान हासिल हुआ है और नकली सरदार को 18 वां स्थान...ये कैसा हिंदुस्तान है की प्रधानमन्त्री की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति ताकतवर नही है बल्कि सोनिया गाँधी महोदया हैं जिनकी कोख से हिंदुस्तान का युवराज पैदा हुआ है...........मनमोहन सिंह शर्म करो.....सुना था सरदार असरदार होते हैं......लेकिन आप जैसे सरदार जब पिछलग्गू होकर जी मैडम --यस मैडम करने लगते हैं तो ऐसे सरदार असरदार की बजाय बेकार हो जाते हैं....और नकली सरदार ही कहे  जाने योग्य रह जाते हैं........
                              मनमोहन सिंह जवाब दो--------जब आर एस एस  और सिम्मी एक जैसे संगठन हैं, जैसा की राहुल गाँधी ने कहा है तो आपने आर एस एस पा प्रतिबंध  क्यों नही लगाया.....जबकि सिम्मी पर तो प्रतिबंध लगा दिया है........डर  के आगे जीत है मोहन .......आगे बढ़ो जी हुजुर और येस मैडम करना बंद करदो.....

बुधवार, 3 नवंबर 2010

शर्मिला चानू की भूख हडताल को एक दशक पूरा हुआ

मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला चानू की भूख हडताल को आज दस साल पूरे हो गए। वे मणिपुर से विवादित आम्र्ड फोर्सज स्पेशल पावर्स एक्ट (एएफएसपीए) 1958 हटाने की मांग को लेकर भूख हडताल पर है।

देश के कुछ ही इलाकों में यह कानून लागू है जिनमें मणिपुर भी है। शर्मिला इस कानून के विरोध में 2000 से अनशन पर है। प्रशासन और सरकार ने उनकी भूख हडताल को तुडवाने के लिए कई तरीके आजमाए लेकिन वे नाकाम रहे। इम्फाल स्थित जे एन अस्पताल में भर्ती शर्मिला को नाक के जरिए आहार दिया जा रहा है। अब शर्मिला को ग्लूकोज और दवाओं के सहारे ही जिंदा रखा जा रहा है। इम्फाल के अस्पताल के जिस कमरे में उन्हें रखा गया है उसे एक जेल में तब्दील कर दिया गया है। वे न्यायिक हिरासत में हैं। आज शर्मिला के आंदोलन के समर्थक राज्य के विभिन्न हिस्सों में धरना प्रदर्शन कर रहे है। शहर के रिक्शाचालकों ने भी रैली निकाली।
by --khaskhbar

सोमवार, 1 नवंबर 2010

ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के नाम पर छलावा...........


हफ्ता भर लेखक मध्य प्रदेश के जनसंपर्क विभाग में प्रदेश की उद्योग मंत्री कैलाश विजय वर्गीय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाने का अवसर मिला... मौका था ग्लोबल इन्वेस्टर मीट को लेकर सरकार की नीतियों का गुणगान करनेका... मै इस प्रेस मीटिंग में देरी से पंहुचा.... जनसंपर्क विभाग के जिस कक्ष में इन्वेस्टर मीट की पी सी रखी गई थी वहां पैर रखने भर की जगह नही थी.... आमतौर पर भोपाल में बड़े बड़े चैनलों के रिपोर्टर कभी फील्ड में अपने कैमरामैनों के साथ नजर नही आते है ..... लेकिन जब भाजपा के बड़े बड़े नेताओं की प्रेस वार्ताए और पत्रकारों की मंत्रियो के आवासों पर दावते हुआ करती है तो अपने को बड़ा चैनल कहने वाले कुछ पत्रकार ऐसी पार्टियों में सबसे पहले मंत्रियो के सामने बैठा करते है....

कैलाश
विजय वर्गीय की इस पी सी में भी यही नजारा दिखायी दिया ..... मंत्रियो की चरण वंदना करने भास्कर से लेकर अमर कीर्ति तक के सारे पत्रकार पहुच गए... चैनलों की बात करू तो अपने को सबसे तेज कहने वाले पत्रकारों से लेकर डोट कॉम तक के सारे पत्रकार इस आयोजन में पहुचे..... भला पहुचे भी क्यों ना क्युकि खजुराहो में बड़े बड़े उद्योग मंत्रियो का कुनबा जो जुट रहा था .... मंच पर भाजपा के मध्य प्रदेश के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा के साथ प्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजय वर्गीय विराजमान थे.......

कैलाश
की पूरी पी सी सरकार की उद्योग नीति पर केन्द्रित थी... उसमे बड़े बड़े वायदे किये जा रहे थे... टाटा सेलेकर अम्बानी ...रुइया से लेकर सुभाष चंद्रा के कसीदे पड़ने के साथ ही उन महानुभावो का गुणगान किया जा रहा था जो अपने लाव लश्कर के साथ शिवराज सिंह चौहान के मध्य प्रदेश में उद्योग लगाने की संभावनाओ को तलाशने यहाँ आये थे ....कैलाश विजयवर्गीय ने पूरी पी सी में अपनी सरकार का गुणगान किया और कहा कि मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के प्रयासों से बड़े बड़े उद्योग राज्य में आये है और यहाँ निवेश की सम्भावनाये मजबूत हुई है..... शायद कैलाश को यह बात मालूम नही थी कि मध्य प्रदेश में निवेश करने से देश के उद्योगपति कतराने लगे है..... यह सवाल किसी पत्रकार के जेहन में नही आया .... अगर आता तो उनसे जरुर सवाल जवाब होते और वह पत्रकारों के जाल में फस जाते .....
मै पी सी में देरी से पंहुचा... मेरे साथ एक चैनल के एक रिपोर्टर और थे ... हम दोनों ने पी सी वाले रूममें देरी से प्रवेश किया... मेरे साथी रिपोर्टर तो पी सी में खड़े ही रह गएलेकिन भारी भीड़ को दरकिनार करते हुए मै सीधे पत्रकारों के बीच पंहुचा ... मेरे बगल में एक हिंदी समाचार पत्र के पत्रकार बैठे थे... उन्होंने बड़ी आत्मीयता से मुझसे हाथ मिलाया और मेरे लिए जगह बनाई.... उनसे जब मेरी गुप्तगू हुई उस समय कैलाश की पी सी पर चल रही थी तो खजुराहो का मुद्दा भी गर्मजोशी के साथ उठ गया ... मैंने उनसे कहा शिवराज सरकार की अब तक की सारी इन्वेस्टर मीट छलावा ही साबित हुई है.... ऐसा कहने के बाद उन्होंने मेरे सुर में सुर मिलाया और कहा हर्ष जी आपकी बात सोलह आने सच है.... लेकिन किसी पत्रकार ने उनसे वैसे सवाल करने की जहमत नही उठाई .... अगर उठाते तो शायद खजुराहो के प्रचार प्रसार के लिए मिलने वाले विज्ञापन से उन्हें महरूम होना पड़ता .....कैलाश विजय वर्गीय"शिव" के जिन आकड़ो के सहारे अपनी जादूगरी कर रहे थे वह उनको नही भाई और तपाक से कैलाश के सामने उन्होंने सवाल दागा ... करोडो रुपये फूकने के बाद मध्य प्रदेश में किसी निवेशक का ना आना चिंता का विषय है .... इस प्रश्न के उत्तर में कैलाश ने फिर एक बार अपने विभाग की चरण वंदना करनी शुरू कर दी......जब पत्रकार ने यह पूछा कि पिछले पांच इन्वेस्टर मीट में कितने उद्योग लगे है तो कैलाश नाराज हो गए और उस पत्रकार की बात को टालते हुए चालाकी से अलग विषय को पत्रकार वार्ता में रखने लगे...... | यह वाकया ये बताने के लिए काफी है कि आम आदमी के सरोकारों की बात करने वाली हमारी सरकारे विकास को लेकर कितना संवेदनशील है..... ?
मजे की बात यो यह है जिस मुखिया के उद्योग मंत्री को अपने विभाग द्वारा किये गए करारो के बारे में कोई जानकारी नही हो , वहां विकास की गाड़ी किस तरीके से हिच्खोले खाते चल रही होगी इसकी कल्पना आप बखूबी कर सकते है......यकीन जानिये मध्य प्रदेश में कोई उद्योगपति चाहकर भी नही आना चाहते ....इसका कारण यहाँपर बुनियादी सुविधाओं की कमी है... हालाँकि शिवराज के आने के बाद यहाँ पर विकास की रफ़्तार में तेजी आई है लेकिन अभी बहुत से ऐसे मामले है जहाँ बीमारू राज्य का कलंक मध्य प्रदेश नही छूट रहा है...|
शिवराज कहते है मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड विकास हो रहा है.... कैलाश तो आकड़ो की बाजीगरी करना बखूबी जानते हैवह भी उनके सुर में सुर मिलते कहते है हम निवेशको को अपनी ओर खीचने में कामयाब हुए है ....लेकिन यह बात प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को नही सुहाती वह शिवराज और विजयवर्गीय के आकड़ो को सिरे से नकार देते है.....बात खजुराहो की करे तो यहाँ भी हर घंटे ढाई करोड़ के निवेश की बात की गई लेकिन प्रदेश में आकर भारी उद्योग मंत्री अरुण यादव शिवराज सरकार के दावो को सिरे से नकार कर चले गए..... और तो और कांग्रेस पार्टी का कोई बदा नेता खजुराहो की मीत में शिरकत करने आमंत्रण दिए जाने के बाद नही आया ....

आकड़ो
की बाजीगरी करने में शिवराज सरकार सबसे तेज है... उनके भाषणों में यह अंदाज झलकता है.... ऐसा नही है मै शिवराज जी की बुराई कर रहा हूँ.... उनकी काबिलियत पर तो किसी तो कोई संदेह नही होना चाहिए लेकिन नौकरशाह के साथ उनके मंत्री मिलकर सरकार की छवि खराब करने में तुले रहते है जिसके छींटे उनकी साख को भी प्रभावित करते है.....अब कैलाश का ही मामला अगर ले तो यह बात अच्छी से समझ आती हैकि कैलाश अपने विभाग की कार्यशैली से कितना वाकिफ है .... अगर उनको अपने विभाग की जानकारी सही से होती तो जनसंपर्क की पी सी में उस पत्रकार के सवाल को कैलाश चालाकी से नही टालते.......

शिवराज सरकार ने पिछले कुछ वर्षो में निवेशको को आकर्षित करने के लिए पांच इन्वेस्टर मीट पर करोड़ से ज्यादा पैसा लुटा दिया लेकिन इस अवधि में प्रदेश में उस अनुपात में उद्योग नही लगे जिस अनुपात में लगने चाहिए थे.....तीन सालो में तकरीबन मीटो में जनता की गाड़ी कमाई को पानी की तरह बहाया गया.... लेकिन जनता को इन करारो से कुछ भी हासिल नही हुआ... इन्वेस्टर के नाम पर विदेश यात्राये करने में भी मध्य प्रदेश के मंत्री पीछे नही रहे....तीन से ज्यादा विदेश यात्रा में भी करोड़ रुपये फूकने के बाद बमुश्किल १०० करोड़ से भी कम का निवेश हुआ है....

अब तक अपने राज्य में हुई मीटो का जिक्र करे तो तीन सालो की समिट में ३३३ ऍम यू हुए जिनमे १३ ऍम यू पर ही आज तक अमल हो सका हैयही नही खजुराहो , इंदौर , ग्वालियर , बुंदेलखंड की जिन मीटो में उद्योगों को लगाये जाने की बात उद्योगपति कर रहे थे वह आज मध्य प्रदेश में उद्योग लगाने की अपनी घोषणा से मुकर चुके है.....| ६८ के पीछे हटने और ७५ मामलो में जमीन नही ढूढे जाने के चलते मध्यप्रदेश की सरकार की पिछली मीट इन्वेस्टर मीट छलावा ही साबित हुई है....|खजुराहो की जिस मीट पर प्रदेश के मुख्य मंत्री और उद्योग मत्री अपनी पीठ थपथपा रहे है उनको यह मालूम नही कि सरकार की पिछली मीट कितनी बेनतीजा रही है ....१३ उद्योग तो बिना इन्वेस्टर मीट के भी मध्य प्रदेश में लग सकते थे....लेकिन ये मनमोहनी इकोनोमिक्स वाला इंडिया है यहाँ आम आदमी की किसी को परवाह नही है.... अगर परवाह होती तो जनता की गाडी कमाई शिवराज सरकार इस तरह इन्वेस्टर मीटो के आयोजन में नही लुटाती................................

( लेखक युवा पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक है..... आप बोलती कलम ब्लॉग पर जाकर समसामयिक विषयो पर इनके विचार पढ़ सकते है)

दीपावली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाये...... छुट्टियों को मनाने अपने घर उत्तराखंड आज जा रहा हूँ..... वहां से लौटने के बाद ब्लॉग पर नई पोस्ट पड़ने को मिलेगी..... सब्र रखिये , कीजिये थोडा इन्तजार..... एक अंतराल के बाद फिर आपसे जुड़ता हूँ...........