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शनिवार, 6 नवंबर 2010

हिंदुस्तान में असली भी कुछ है क्या..............हो तो बताना ............हिंदुस्तान में असली भी कुछ है क्या..............हो तो बताना .... हिंदुस्तान में असली भी कुछ है क्या..............हो तो बताना ... .


होशियार ये सरदार  नकली है ....इसके राज में हर चीज नकली है...
रोजाना न्यूज पेपर में निकल रहा है......होशियार.........
1 ...दीपावली में खोवा नकली , मिठाई नकली.
२ ..देशी घी नकली..
3 ..पेठा नकली..
4 ...सब्जी नकली ..( केमिकल वाला इंजेक्शन लगाकर तैयार  )
5 ..फल नकली...( वही सब्जी वाला हाल  )
6 ..डिग्री नकली...फर्जी डिग्री वाले लोग नौकरी कर रहे हैं...यूपी में शिक्षा मित्र बनाया जा रहा है डिग्री के अंको के आधार पर ( कुछ लोग सीधे फर्जी डिग्री लगा देते हैं तो कुछ थोडा शर्म वाले हैं जो गांव-देहात में जाकर नकल वाले सेंटर से नकल करके डिग्री हासिल कर रहे हैं और नौकरी पाकर आने वाली पीढ़ी का भविष्य खराब करने को तैयार हैं  और जो बेचारे कम नम्बर पाने वाले ईमानदार लोग हैं वो सरकार के इस निति को कोसते  नही थकते ज्यादा विस्तार में क्या जाऊं  बात आको समझ में आ ही गई होगी ...इस निति के जिम्मेदार माननीय मुल्ला मुलायम सिंह और हमारी आपकी मुहबोली  बहन मायावती जी हैं.....इस धरती पर इन लोगों का साम्राज्य ख़त्म करने वाला तो कोई फ़िलहाल दिखाई नही देता...हो सकता है पूतना और कंस को सबक सिखाने वाला कन्हैया भी इनके कारनामो को देख रहा हो ....आएगा....एक दिन वही आएगा  )
7 ..हितग्राही नकली....नकली लोग गरीबी रेखा के निचे का राशन कार्ड बनवाकर ऐश कर रहे हैं ...और गरीब लोग इधर से उधर दौड़ रहे हैं की मेरा राशन कार्ड बनवा दो नेता जीc....नेता जी कह रहे हैं की इतना नोट खर्च करके चुनाव जीता हू ..इसीलिए की राशन कार्ड बनवाता फिरू....
8 ...दवा नकली....
9 ....दारू नकली....
10 ....बेटा नकली.........ये हम नही कह रहे हैं ....ये तो अपने नारायण दत्त तिवारी जी का कहना है की रोहित उनका बेटा नही है.....मतलब .....आप समझ जाइये...
11 .....
१२ ...
13 ....ये लिस्ट ख़त्म होने वाली  नही है लेकिन जो सबसे महत्वपूर्ण बात मै इन नकली चीजों के लिस्ट को गिनाकर बताना चाह  रहा हूँ ....वो है अपने देश के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठा नकली सरदार मनमोहन सिंह....जी हाँ सरदार नकली है......ये बात भी मै नही कह रहा हू...ये बात भी सिद्ध होती है .....फोर्ब्स पत्रिका द्वारा जारी दमदार सख्सियतों के लिस्ट से.....सोनिया गाँधी को 9 वां स्थान हासिल हुआ है और नकली सरदार को 18 वां स्थान...ये कैसा हिंदुस्तान है की प्रधानमन्त्री की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति ताकतवर नही है बल्कि सोनिया गाँधी महोदया हैं जिनकी कोख से हिंदुस्तान का युवराज पैदा हुआ है...........मनमोहन सिंह शर्म करो.....सुना था सरदार असरदार होते हैं......लेकिन आप जैसे सरदार जब पिछलग्गू होकर जी मैडम --यस मैडम करने लगते हैं तो ऐसे सरदार असरदार की बजाय बेकार हो जाते हैं....और नकली सरदार ही कहे  जाने योग्य रह जाते हैं........
                              मनमोहन सिंह जवाब दो--------जब आर एस एस  और सिम्मी एक जैसे संगठन हैं, जैसा की राहुल गाँधी ने कहा है तो आपने आर एस एस पा प्रतिबंध  क्यों नही लगाया.....जबकि सिम्मी पर तो प्रतिबंध लगा दिया है........डर  के आगे जीत है मोहन .......आगे बढ़ो जी हुजुर और येस मैडम करना बंद करदो.....

सोमवार, 1 नवंबर 2010

ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के नाम पर छलावा...........


हफ्ता भर लेखक मध्य प्रदेश के जनसंपर्क विभाग में प्रदेश की उद्योग मंत्री कैलाश विजय वर्गीय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाने का अवसर मिला... मौका था ग्लोबल इन्वेस्टर मीट को लेकर सरकार की नीतियों का गुणगान करनेका... मै इस प्रेस मीटिंग में देरी से पंहुचा.... जनसंपर्क विभाग के जिस कक्ष में इन्वेस्टर मीट की पी सी रखी गई थी वहां पैर रखने भर की जगह नही थी.... आमतौर पर भोपाल में बड़े बड़े चैनलों के रिपोर्टर कभी फील्ड में अपने कैमरामैनों के साथ नजर नही आते है ..... लेकिन जब भाजपा के बड़े बड़े नेताओं की प्रेस वार्ताए और पत्रकारों की मंत्रियो के आवासों पर दावते हुआ करती है तो अपने को बड़ा चैनल कहने वाले कुछ पत्रकार ऐसी पार्टियों में सबसे पहले मंत्रियो के सामने बैठा करते है....

कैलाश
विजय वर्गीय की इस पी सी में भी यही नजारा दिखायी दिया ..... मंत्रियो की चरण वंदना करने भास्कर से लेकर अमर कीर्ति तक के सारे पत्रकार पहुच गए... चैनलों की बात करू तो अपने को सबसे तेज कहने वाले पत्रकारों से लेकर डोट कॉम तक के सारे पत्रकार इस आयोजन में पहुचे..... भला पहुचे भी क्यों ना क्युकि खजुराहो में बड़े बड़े उद्योग मंत्रियो का कुनबा जो जुट रहा था .... मंच पर भाजपा के मध्य प्रदेश के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा के साथ प्रदेश के उद्योग मंत्री कैलाश विजय वर्गीय विराजमान थे.......

कैलाश
की पूरी पी सी सरकार की उद्योग नीति पर केन्द्रित थी... उसमे बड़े बड़े वायदे किये जा रहे थे... टाटा सेलेकर अम्बानी ...रुइया से लेकर सुभाष चंद्रा के कसीदे पड़ने के साथ ही उन महानुभावो का गुणगान किया जा रहा था जो अपने लाव लश्कर के साथ शिवराज सिंह चौहान के मध्य प्रदेश में उद्योग लगाने की संभावनाओ को तलाशने यहाँ आये थे ....कैलाश विजयवर्गीय ने पूरी पी सी में अपनी सरकार का गुणगान किया और कहा कि मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के प्रयासों से बड़े बड़े उद्योग राज्य में आये है और यहाँ निवेश की सम्भावनाये मजबूत हुई है..... शायद कैलाश को यह बात मालूम नही थी कि मध्य प्रदेश में निवेश करने से देश के उद्योगपति कतराने लगे है..... यह सवाल किसी पत्रकार के जेहन में नही आया .... अगर आता तो उनसे जरुर सवाल जवाब होते और वह पत्रकारों के जाल में फस जाते .....
मै पी सी में देरी से पंहुचा... मेरे साथ एक चैनल के एक रिपोर्टर और थे ... हम दोनों ने पी सी वाले रूममें देरी से प्रवेश किया... मेरे साथी रिपोर्टर तो पी सी में खड़े ही रह गएलेकिन भारी भीड़ को दरकिनार करते हुए मै सीधे पत्रकारों के बीच पंहुचा ... मेरे बगल में एक हिंदी समाचार पत्र के पत्रकार बैठे थे... उन्होंने बड़ी आत्मीयता से मुझसे हाथ मिलाया और मेरे लिए जगह बनाई.... उनसे जब मेरी गुप्तगू हुई उस समय कैलाश की पी सी पर चल रही थी तो खजुराहो का मुद्दा भी गर्मजोशी के साथ उठ गया ... मैंने उनसे कहा शिवराज सरकार की अब तक की सारी इन्वेस्टर मीट छलावा ही साबित हुई है.... ऐसा कहने के बाद उन्होंने मेरे सुर में सुर मिलाया और कहा हर्ष जी आपकी बात सोलह आने सच है.... लेकिन किसी पत्रकार ने उनसे वैसे सवाल करने की जहमत नही उठाई .... अगर उठाते तो शायद खजुराहो के प्रचार प्रसार के लिए मिलने वाले विज्ञापन से उन्हें महरूम होना पड़ता .....कैलाश विजय वर्गीय"शिव" के जिन आकड़ो के सहारे अपनी जादूगरी कर रहे थे वह उनको नही भाई और तपाक से कैलाश के सामने उन्होंने सवाल दागा ... करोडो रुपये फूकने के बाद मध्य प्रदेश में किसी निवेशक का ना आना चिंता का विषय है .... इस प्रश्न के उत्तर में कैलाश ने फिर एक बार अपने विभाग की चरण वंदना करनी शुरू कर दी......जब पत्रकार ने यह पूछा कि पिछले पांच इन्वेस्टर मीट में कितने उद्योग लगे है तो कैलाश नाराज हो गए और उस पत्रकार की बात को टालते हुए चालाकी से अलग विषय को पत्रकार वार्ता में रखने लगे...... | यह वाकया ये बताने के लिए काफी है कि आम आदमी के सरोकारों की बात करने वाली हमारी सरकारे विकास को लेकर कितना संवेदनशील है..... ?
मजे की बात यो यह है जिस मुखिया के उद्योग मंत्री को अपने विभाग द्वारा किये गए करारो के बारे में कोई जानकारी नही हो , वहां विकास की गाड़ी किस तरीके से हिच्खोले खाते चल रही होगी इसकी कल्पना आप बखूबी कर सकते है......यकीन जानिये मध्य प्रदेश में कोई उद्योगपति चाहकर भी नही आना चाहते ....इसका कारण यहाँपर बुनियादी सुविधाओं की कमी है... हालाँकि शिवराज के आने के बाद यहाँ पर विकास की रफ़्तार में तेजी आई है लेकिन अभी बहुत से ऐसे मामले है जहाँ बीमारू राज्य का कलंक मध्य प्रदेश नही छूट रहा है...|
शिवराज कहते है मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड विकास हो रहा है.... कैलाश तो आकड़ो की बाजीगरी करना बखूबी जानते हैवह भी उनके सुर में सुर मिलते कहते है हम निवेशको को अपनी ओर खीचने में कामयाब हुए है ....लेकिन यह बात प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को नही सुहाती वह शिवराज और विजयवर्गीय के आकड़ो को सिरे से नकार देते है.....बात खजुराहो की करे तो यहाँ भी हर घंटे ढाई करोड़ के निवेश की बात की गई लेकिन प्रदेश में आकर भारी उद्योग मंत्री अरुण यादव शिवराज सरकार के दावो को सिरे से नकार कर चले गए..... और तो और कांग्रेस पार्टी का कोई बदा नेता खजुराहो की मीत में शिरकत करने आमंत्रण दिए जाने के बाद नही आया ....

आकड़ो
की बाजीगरी करने में शिवराज सरकार सबसे तेज है... उनके भाषणों में यह अंदाज झलकता है.... ऐसा नही है मै शिवराज जी की बुराई कर रहा हूँ.... उनकी काबिलियत पर तो किसी तो कोई संदेह नही होना चाहिए लेकिन नौकरशाह के साथ उनके मंत्री मिलकर सरकार की छवि खराब करने में तुले रहते है जिसके छींटे उनकी साख को भी प्रभावित करते है.....अब कैलाश का ही मामला अगर ले तो यह बात अच्छी से समझ आती हैकि कैलाश अपने विभाग की कार्यशैली से कितना वाकिफ है .... अगर उनको अपने विभाग की जानकारी सही से होती तो जनसंपर्क की पी सी में उस पत्रकार के सवाल को कैलाश चालाकी से नही टालते.......

शिवराज सरकार ने पिछले कुछ वर्षो में निवेशको को आकर्षित करने के लिए पांच इन्वेस्टर मीट पर करोड़ से ज्यादा पैसा लुटा दिया लेकिन इस अवधि में प्रदेश में उस अनुपात में उद्योग नही लगे जिस अनुपात में लगने चाहिए थे.....तीन सालो में तकरीबन मीटो में जनता की गाड़ी कमाई को पानी की तरह बहाया गया.... लेकिन जनता को इन करारो से कुछ भी हासिल नही हुआ... इन्वेस्टर के नाम पर विदेश यात्राये करने में भी मध्य प्रदेश के मंत्री पीछे नही रहे....तीन से ज्यादा विदेश यात्रा में भी करोड़ रुपये फूकने के बाद बमुश्किल १०० करोड़ से भी कम का निवेश हुआ है....

अब तक अपने राज्य में हुई मीटो का जिक्र करे तो तीन सालो की समिट में ३३३ ऍम यू हुए जिनमे १३ ऍम यू पर ही आज तक अमल हो सका हैयही नही खजुराहो , इंदौर , ग्वालियर , बुंदेलखंड की जिन मीटो में उद्योगों को लगाये जाने की बात उद्योगपति कर रहे थे वह आज मध्य प्रदेश में उद्योग लगाने की अपनी घोषणा से मुकर चुके है.....| ६८ के पीछे हटने और ७५ मामलो में जमीन नही ढूढे जाने के चलते मध्यप्रदेश की सरकार की पिछली मीट इन्वेस्टर मीट छलावा ही साबित हुई है....|खजुराहो की जिस मीट पर प्रदेश के मुख्य मंत्री और उद्योग मत्री अपनी पीठ थपथपा रहे है उनको यह मालूम नही कि सरकार की पिछली मीट कितनी बेनतीजा रही है ....१३ उद्योग तो बिना इन्वेस्टर मीट के भी मध्य प्रदेश में लग सकते थे....लेकिन ये मनमोहनी इकोनोमिक्स वाला इंडिया है यहाँ आम आदमी की किसी को परवाह नही है.... अगर परवाह होती तो जनता की गाडी कमाई शिवराज सरकार इस तरह इन्वेस्टर मीटो के आयोजन में नही लुटाती................................

( लेखक युवा पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक है..... आप बोलती कलम ब्लॉग पर जाकर समसामयिक विषयो पर इनके विचार पढ़ सकते है)

दीपावली की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाये...... छुट्टियों को मनाने अपने घर उत्तराखंड आज जा रहा हूँ..... वहां से लौटने के बाद ब्लॉग पर नई पोस्ट पड़ने को मिलेगी..... सब्र रखिये , कीजिये थोडा इन्तजार..... एक अंतराल के बाद फिर आपसे जुड़ता हूँ...........




बुधवार, 27 अक्टूबर 2010

Shopian ight again

Shopian ight again

If the Central Bureau of Investigation (CBI) has already pronounced its verdict on the Shopian double rape and murder case ruling out both the rape and murder of the victims why did the interlocutors meet the affected family? The question has generated suspense among the observers after the interlocutors’ panel on Kashmir visited Shopian yesterday, reportedly on the instructions of Prime Minister Manmohan Singh and Home Minster P Chidambaram.
While justice still eludes the family of Asiya Jan and Neelofar, allegedly raped and murdered by men in uniform in May 2009, the interlocutors’ visit to Shopian hasn’t enthused anyone—not even Shakeel Ahmad Ahanger, the husband of Neelofar and brother of Asiya Jan who told the media that he had “no expectations” from them.
If their visit to the area has done anything, it has renewed the focus on the gruesome case which triggered massive protests across Kashmir, leading to a CBI probe. “I was surprised to read that the interlocutors met the family of the Shopian victims when the Central government itself has closed the case and failed to ensure justice to the victims,” said a political scientist, insisting not to be named.
“It indicates that the case still haunts the Government of India, given the fact that it marked the beginning of unrest in the Valley when the present government led by Omar Abdullah took over.” In December 2009, the CBI filed a charge sheet against 13 people including six doctors and lawyers for allegedly “fabricating” evidence in the aftermath of the recovery of two bodies. The CBI informed the Jammu and Kashmir High Court that a charge sheet had been filed before a Chief Judicial Magistrate against 13 people for allegedly creating false evidence and witnesses.
But notwithstanding the verdict, which was duly endorsed by the state government, the interlocutors’ panel led by journalist Dilip Padgaonkar visited Shopian on Tuesday and met Shakeel Ahanger.“The Home Minister is well aware of all the facts about the rape and murder case, which was hushed up by the CBI. The culprits are roaming free while the victims were made the culprits,” Shakeel told the interlocutors, who had to leave the place in a state of dismay, though they reportedly told him that they had been sent by the Prime Minister and Home Minister to get “their side of the story.”
A member of the Majlis-e-Mashawarat, which is fighting for justice to Shopian victims, questioned why the government of India was bothered about “their side” of the story when the facts were known to all.“So far countless agencies and organizations visited Shopian to ascertain the facts. But at the end, the CBI gave clean chit to the accused and made victims appear like culprits. Now which side of the story does the GOI want to hear? Some credible agencies have already reported that rape and murder took place. But the GOI has been in the state of denial,” the member said. “This is just adding salt to the injuries of the victims’ relatives and family. Either the GOI must ensure justice to the families, which it doesn’t seem to be interested in, or it must not send people to hear the stories which it ultimately ignores.”
It is not only the interlocutors’ visit but a statement by noted writer and Booker Prize winner Arundhati Roy that has renewed focus on Shopian tragedy. “Yesterday I travelled to Shopian, the apple-town in South Kashmir which had remained closed for 47 days last year in protest against the brutal rape and murder of Asiya and Nilofer, the young women whose bodies were found in a shallow stream near their homes and whose murderers have still not been brought to justice. I met Shakeel, who is Nilofer’s husband and Asiya’s brother. We sat in a circle of people crazed with grief and anger who had lost hope that they would ever get Insaf—justice—from India, and now believed that Azadi—freedom— was their only hope,” she said in a statement yesterday.
Pertinently, an autopsy report had confirmed that the women were raped and the government-appointed commission said that four police officers were involved in destroying some of the key evidence following which they were suspended and arrested. The case was then handed over to CBI which concluded that the women “died of drowning”—a ruling which evoked severe protests in Kashmir after being rejected by one and all, including Majlis-e-Mashawarat.
The drowning theory corroborated the Chief Minister Omar Abdullah’s initial statement on the case, though he later said he had been misled by the Shopian district administration and police.
The Delhi-based Independent Women’s Initiative for Justice (IWIJ), which had sent its team to the valley on a fact finding mission, in its report said that the Jammu and Kashmir government was involved in a major hush-up of the case. The report argued that as for “accidental drowning of the two women in the nallah (stream), where no one in recent or living memory has ever drowned, we would need to be more than merely credulous to believe that”.
The IWIJ said that during its team’s visit to Shopian in August 2009 it found that the water in the stream was only ankle-deep -- not enough for anybody to drown in it.
In September this year, the state government reinstated the four police officials allegedly involved in the incident.

गुरुवार, 21 अक्टूबर 2010

Bihar wants only development, not a face of nepotism

Bihar wants only development nothing else. The day of election divided into six phase and before starting of ruling and ruler war their peoples has been cleared, we are going with progresses of bihari and bihar. They are saying,we never want to go any other zone for feed up their want but condition of state not more good so we could not stay a long here. India most of state has own resources due to their fellows spends a good life better than us.A point to be essential which always swirls into our mind, that is when bihar and jharkhand separate to each other that year our government said "1000 thousand crore rupee provides to bihar but now many year past that could not come to hand why ?? ". BJP OUT congress in and then after vajpei ji announcing could not get a space cause is congress disappear. although now a judgment of result come into the hand of here aawam and they prefer whom, who really love him. Rahul Gandhi can not our ideal because he is a face of nepotism....please do not make a part of this fabrication and drop your vote after thinking.

बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

विहार में पहले चरण का चुनाव 21 अक्तूबर को

विहार में पहले चरण का चुनाव 21 अक्तूबर को
तमाम आरोपों प्रत्यारोपों के बीच 20 अक्तूबर को आखिरकार चुनाव प्रचार खत्म हो गया. बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के लिए सभी दलों ने शंखनाद किया. कोसी-सीमांचल क्षेत्र में 21 अक्तूबर से होने जा रहे पहले चरण के चुनाव में विकास मुख्य मुद्दा रहा. वर्तमान नीतीश सरकार विकास के नाम पर लोगों से वोट जुटाने में लगी रही तो वहीं कांग्रेस और राजद-लोजपा गठबंधन ने विकास कहा हुआ के नारे के साथ नीतीश एनडीए गठबंधन को घेरते नजर आए. गौरतलब है कि इस क्षेत्र में कोसी बाढ़ आपदा के समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जो काम किया था उसे अभी तक यहां के लोगबाग नहीं भूले होंगे. लेकिन उनके हाथों हुए एक गुनाह को भी यहां की जनता अभी तक भूल नहीं सकी है और वों था, इस क्षेत्र के दिग्गज नेता जगन्नाथ मिश्र के सुपुत्र नीतीश मिश्र को बिना कसूर के पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना. इस कारण भी यहां के सवर्ण वोट खासकर ब्राह्मण शायद इनसे खफा है और इस चुनाव में वों अपना रंग दिखा सकते हैं. हालांकि चुनाव के मद्देनजर सबे के मुखिया ने अपनी गलती को सुघार का जामा पहनाते हुए एक बार फिर नीतीश मिश्र को गले लगा लिया है. फिर भी उनके द्वारा किए जाने वाले अवसर बाद की राजनीति को सीमांचलवासी अच्छी तरीके से समझ चुके हैं. अबकी सामाजिक, आर्थिक,मुद्दों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दें जैसे कि बिजली,पानी बेरोजगारी भी चुनाव पर अपना रंग बिखेरने को तैयार है. जदयू-भाजपा गठबंधन की ओर से 55 बनाम 5 साल की तरक्की का नारा पूरे बिहार में तेजी के साथ गूंज रहा है. बिदित हो कि कोस-सीमांचल क्षेत्र के जिन 47 सीटों के लिए चुनाव होने जा रहे हैं, उनसे 28 सीटों पर एनडीए का ही कब्जा रहा है. लेकिन इस दफा चुनावी समीकरण साफ नहीं होने के कारण कुछ भी कहना मुश्किल है कि कौन इस क्षेत्र में फतह हासिल करेगा और कौन पराजय का मुंह देखेगा. कांग्रेस के पास खोने को तो कुछ भी नहीं है मगर पाने के लिए बहुंत कुछ है. अगर इस बार कांग्रेस यहां मुसलमान वोट हासिल करने में सफल रही तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा अगर किसी को भुगतना पड़ेगा तो वह है जेडीयू-भाजपा गठबंधन को. राहुल गांधी कांग्रेस के स्टार प्रचारक रहें हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सभा चुनाव के दौरान अपना जलावा दिखाया था. इसके अलावा प्रधानमंत्री और कांग्रेस सुप्रीमों सोनिया के किशनगंज रैली ने जरूर नीतीश के नीव को हिलाने का काम किया है. आनंद मोहन, लवली आनंद, पप्पू यादव सरीखे नेता के कांग्रेस के साथ चले जाने से सभी चुनावी समीकरण बिगड़ता नजर आ रहा है. पिछले साल एनडीए की रणनीति बनाने वाले किशोर कुमार मुन्ना के निर्दलीय चुनाव लड़ने से राजपूतों का वोट भी खिसकता नजर आ रहा है. जेदयू के दो यादव चहरे बिजेंद्र यादव और दिनेश चंद्र यादव के आपसी रस्सा-कशी के कारण भी वर्तमान सरकार को नुकसान झेलना पड़ सकता हैं. यदि बात करें शरद यादव की तो उनका प्रभाव केवल मधेपुरा तक ही सिमटा है. अति पिछड़े वोटों का लाभ एनडीए को मिल सकता है,बशर्ते वे लोग मतदान केंद्र तक पहुंचे. नीतीश की महादलित खेमे का लाभ जरूर उनके पक्ष में जायेगा, मगर सवाल यह है कि क्या केवल इनके आने से चुनावी समीकरण बदल जाएंगे. किशनगंज में कांग्रेस का दबदबा कायम है, इसका जीता जागता सबूत है सोनिया की रैली, लेकिन नीतीश ने भी कांग्रेस के घर में सेंध डालने के उदेश्य से मुसलमान वोट को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए इलाके के दिग्गज नेता तस्लीमुद्दीन को अपने साथ जोड़ लिया है, जिससे जरूर नीतीश मजबूत स्थिति बनाने में सफल नजर आ रहे हैं, मगर एक बाद साफ है कि नीतीश के इस कारनामें से उनका साथी दल भाजपा कतई खुश नहीं हैं. इसका कारण यह कि भाजपा शुरू से ही तस्लीमुद्दीन का विरोद्ध करती आई ही ऐसे में यदि उसका साथी ही उसे गले लगाने के लिए आतुर है तो वह बेचारा आखिर क्या कर सकता है. बहादुरगंज और ठाकुरगंज में बीजेपी के अधिकार क्षेत्र में आता है, जहां वह एक तरफे वोट से बिजयी होता रहा है. इन क्षेत्रों में बीते 15 साल से अपना अधिकार जमाए राजद को पिछले विधानसभा चुनाव में करारा हार का सामना करना पड़ा था, फिलहाल मई को वापस अपने साथ जोड़ने के उदेश्य से लालू भी ऐड़ी चोटी का दम लगाए हुए है. यादव और मुसलमान वोट के समीकरण के बुते ही लालू राबड़ी 15 सालों तक बिहार को अपने कब्जे में किए रहें. इसके परे यदि बात करें लोजपा की तो हालही में हुए लोकसभा चुनाव में नेस्तनाबूत पासवान ने तो यहां तक कह दिया है कि सत्ता में आए तो उपमुख्यमंत्री एक मुसलमान को ही बनायेंगे. ऐसे तो बिहार की राजनीति पर किसी प्रकार का कोई टिप्पणी देना मुश्किल है कि अबकी सत्ता किसके पक्ष में जा रहीं हैं. लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि विकास के बल पर सरकार का निर्माण होगा तो एक बार फिर नीतीश ही दिखेंगे. यहां की राजनीतिक सरजमी पर विकास कम जाति फेक्टर ज्यादा अहम होता है, इसलिए तो उम्मीवारों की सूची भी इलाकों की आबादी और जाति की बाहुलता को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं. जाति की दृष्टिकोण से बात रखी जाए तो सीमांचल क्षेत्रों में मुसलमान की संख्या अधिक है साथ ही इस इलाके में यदि कोई बाहुबल है जो सारे समीकरण का फेरबदल कर सकते है तो वह है भूमिहार जो बिहार की सत्ता के असल मालिक होते हैं. ब्राह्मण भी सक्रिय है लेकिन वे आपसी रस्सा-कशी में ही मशगूल रहते हैं. राजपूत की रणनीति कभी भी साफ तौर पर सामने नहीं उभर पाती है कि वे किसके साथ है. कुल मिलाकर बिहार विधानसभा चुनाव में दिग्गजों का सम्मान दांव पर लगा हुआ है. पासवान चारों खाना चीत होने के बाद एक बार फिर खड़ा होना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर लालू मई को वापस हासिल करने के लिए कुछ भी करने को तैयार डटे हुए है. नीतीश के साथ उनका विकास दौड़ रहा है तो भाजपा इमेज सुशील मोदी और सीपी ठाकुर खुद को असल निर्णायक सिद्ध करने में जुटे हुए है.
एक नजर बिहार विधानसभा चुनाव के असल सफलता के मानकों पर......
चुनाव छह चरणों में होंगे –पहला चरण 21 अक्तूबर को 47 सीटों के लिए, दूसरा चरण 24 अक्तूबर को 45 सीटों के लिए, तीसरा चरण 28 अक्तूबर 48 सीटों के लिए, चौथा चरण 1 नवंबर को 42 सीटों के लिए, पांचवा चरण 35 सीटों के लिए, छटा और अंतिम चरण 26 सीटों के लिए, इसके साथ ही 24 नवंबर को परिणाम सामने आएंगे.
कुल विधानसभा सीट - ( 243 ), रिर्जव एस सी - 38, रिर्जव एस टी - 02, कुल मतदाता - 5.5 करोड़, वर्तमान जंनसख्या - 8,28,78,796, इसमें से पुरूष जंनसख्या - 4,31,53,964, महिला जंनसख्या - 3,97, 24, 832,
साक्षरता – 47.52 प्रतिशत
प्रकाश पाण्डेय

गुरुवार, 14 अक्टूबर 2010


दीदी की दुर्गा झांकी

कोलकाता , रेल मंत्री न एक प्रखर राजनेता हैं बल्कि एक गायिका व चित्रकार भी हैं और कविता पाठ भी करती हैं। दुर्गा पूजा का समय नजदीक आ रहा है और अब उन्होंने दुर्गा की मूर्तियां गढ़ने और उनकी सजावट के लिए समय निकाल लिया है।तृणमूल प्रमुख ममता 'बाकुल बागान सार्बोजनिन दुर्गा उत्सव' में शामिल हो गई हैं। यह संस्था उनके दक्षिणी कोलकाता के कालीघाट स्थित घर के समीप दुर्गोत्सव का आयोजन करेगी। उत्सव के आयोजनकर्ताओं ने उनका नाम सजावट के लिए पेंटिंग करने वाले चित्रकारों की सूची में शामिल किया है।
आयोजनकर्ताओं का कहना है कि ममता पूजा स्थल की सजावट और मूर्तियों के लिए पेंटिंग बना रही हैं। उनके साथ कुछ ऐसे लोग भी हैं जो उनके विचारों को कार्यरूप दे सकें। 'बाकुल बागान सार्बोजनिन दुर्गा उत्सव' के अध्यक्ष असित घोष ने बताया, "अरुण कुमार, दीदी (ममता बनर्जी) के बनाए डिजाइंस के आधार पर मूर्तियां बनाएंगे। उन्होंने खुद अरुण को चुना है क्योंकि वह कालीघाट में उनके घर के नजदीक ही रहते हैं।"घोष ने बताया, "हमने एक स्थानीय कलाकार को उनके बनाए डिजाइंस के आधार पर दुर्गा की झांकी सजाने का काम सौंपा है। झांकी के लिए अंडाकार शामियाना बांस और तिरपाल से बनाया जाएगा और उसे दीदी की पेंटिंग्स से सजाया जाएगा।"ममता के नजदीकी एक नेता ने बताया, "पूजा का विषय 'महाकाल' (एक पौराणिक काल जो जीवन की उत्पत्ति के पहले शुरू हुआ था और अब तक जारी है।) की अवधारणा पर आधारित होगा।" ममता 11 अक्टूबर को इस संस्था के दुर्गा उत्सव की शुरूआत करेंगी। यह शुरुआत देवी दुर्गा की वार्षिक 5 पूजा आरंभ होने से तीन दिन पहले ही हो जाएगी।

क्लिक----- क्लिक

आज सुबह जब घर से निकला तो कोई खबर नही मिल रही थी...... नजर दीवार पर लगे इस बोर्ड की महान विभूतियों पर गई .....यह सभी हमारा हाथ आम आदमी के साथ जैसे नारों का प्रतिनिधित्व करते नही थकते..... आज आम आदमी हाशिये पर है..... महंगाई ने उसका जीना मुहाल कर लिया है ..... यह स्केच भी इसी की बानगी दिखा रहा है ..........

नव दुर्गा के अवसर पर अपने मोहल्ले की गलियों में इसे सजा रखा है अभिषेक नाम के एक युवक ने... आज जब मेरी नजर इस बोर्ड पर गई तो सारा मोहल्ला कैमरे के सामने आने लगा ....टी वी में अपनी तस्वीरे देखने का मन किसे नही होता.... आज नजारा देखकर लगा मीडिया से लोग चमत्कार की उम्मीदे क्यों करते है ....


स्केच है यू पी ऐ और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी का जिनको चोर उच्चका गठबंधन का अध्यक्ष बताया गया है....... शायद यह महंगाई का डंक है........

यह मनमोहन नही कुम्भकरण सिंह है........इनके पास बर्बादी विभाग है...... गरीबो को नही जीने देने की कसम इन्होने खायी है.........

इससे नीचे की तस्वीर में यह है हमारे देश के दुलारे कृषि कम क्रिकेट मंत्री शरद पवार जिनको अनाज की कोई परवाह नही है.....वह कहते है न मैं कोई ज्योतिष तो नही हूँ जो कह सकू महंगाई कम हो जाएगी..................

छमा प्रार्थी हू ..... पिछले एक महीने से ब्लॉग पर कुछ नया नही लिख पाया...... आज से नई पोस्ट की शुरुआत कर रहा हू......आशा है आप निराश नही होंगे..... बीते एक महीने से बहुत व्यस्त लाइफ चल रही है....दिन हो या रात हो फुर्सत ही नही हो पा रही थी.... प्रोपर ६ घंटे नीद भी नही ले पा रहा था....ऊपर वाले से दुआ करूँगा ऐसी व्यस्त लाइफ वह किसी को भी न दे..... व्यस्त होने की वजह पर फिर कभी बात होगी.......
"अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा " बचपन में हिंदी के अध्यापक कालोनी जी ने राहुल सांकृत्यायन की लेखन शैली के बारे में पदाया था .... इसका असली महत्व अब समझ में आ रहा है जब पत्रकारिता के फील्ड में रहकर खबरों की खोज खबर कर रहा हूँ.....पत्रकारिता में एक फंडा है किसी भी व्यक्ति के पास नोज फॉर न्यूज़ होनी चाहिए ....लेकिन कट , कॉपी ,पेस्ट के जमाने में आज खबरे दम तोड़ रही है....
आजकल तो फील्ड में जाने से पत्रकार कतराने लगे है ... एयर कंडिशनर रूमों में बैठकर खबरे चुराने का चलन चल पड़ा है ...डोट कॉम की अधिकतर पत्रकार यही सब कर रहे है... आम आदमी उनके भी हाशिये पर है...पेज थ्री वाली खबरों से फुर्सत मिल सके तब तो आम आदमी की बात हो पायेगी....... ऐश्वर्या के प्रेग्नेंट होने को तरजीह देने से आम आदमी से जुडाव रखने वाली खबरे अटकी रह जाएँगी ॥

अभिषेक के पडोसी तो इस काम की सराहना कर ही रहे थे साथ ही उसके मोहल्ले में दुर्गा जागरण के अवसर पर महंगाई डायन का जागरण हो रहा है.... कीमते इतनी तेजी से बदती जा रही है कि लोगो का जीना मुश्किल होता जा रहा है .... एक देवी ने मुझे बताया अगर यही सब रहा तो लोगो का अगले चुनाव में कांग्रेस से भरोसा उठ जायेगा......
वैसे लोगो का भरोसा सरकार से उठने लगा है ॥ तभी एक महिला ने मुझसे बातचीत करते हुए कहा कि सरकारे कीमते कम करने की दिशा में कोई ठोस कदम नही उठा रही है.... अगर यह सब होता तो आज दैनिक उपभोग की चीजे इतनी महंगी नही होती......कालाबाजारी और वायदा का कारोबार ही इतना ज्यादा है कि सरकार जमाखोरों पर अंकुश नही लगा सकती......
शरद पवार जैसे मंत्री तो पूरे साल के ३६५ दिनों में से ३६ दिन अपने मंत्रालय को दे पाते है ... बचे दिन वह क्रिकेट की यात्राओं में लगा दिया करते है .....ऐसे में क्या होगा हमारे किसान का.... ? वह तो आत्महत्या करेगा ही.......बेचारी पीपली लाइव भी लोगो को आत्महत्या करने से नही रोक पा रही है .... मध्य प्रदेश में भी अब किसान आत्महत्या की मामले बढ़ते ही जा रहे है॥ कल ही एक गाव के मेहनती किसान से बात हो रही थी... उसने कहा साहब खेती बाड़ी में अब कुछ बचा नही है.... बस हम सब जैसे तैसे अपने दिन काट रहे है.....
कुछ समय पहले पीपली लाइव के "नत्था " से मिलना हुआ .... उसकी तकदीर फिल्म आने के बाद भी नही बदल पायी है.....आज भी उसके पास रहने को खुद का मकान नही है... उसने एक बहुत अच्छी बात कही जो मेरे दिल को छू गई..... उसने कहा मैं नही चाहता कोई नत्था देश में फिर से आत्महत्या करे........लेकिन क्या करे किसान का दर्द आज कोई समझ नही सकता ......उनकी जमीनों को कोडियो के भाव या तो बेचा जा रहा है या उन पर सेज बने जा रही है ... ऐसे में देश की कृषि विकास दर फीसदी फिसड्डी से आगे बद पानी मुश्किल दिखाई देती है ...

(लेखक युवा पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक है .... आप बोलती कलम ब्लॉग पर जाकर इनके विचारो को पढ़ सकते है)

शनिवार, 2 अक्टूबर 2010

पूर्व छात्रो के जमा होने से खुशनुमा हुआ माखनलाल के परिसर का माहौल

एक तो एम ० फिल० की परीक्षा दूसरे ई ० टीवी ० का कैम्पस , आज दिनभर माखनलाल चतुर्वेदी पत्रिकारिता विश्वविद्यालय में पुराने छात्रो का जमावड़ा रहा । पिछले कुछ दिनों तक विवादों में रहने के बाद आयी शून्यता को दूर करने के लिए इतना काफी था , खास तौर पर बड़ी संख्या में केव्स के छात्रों ने आकर माहौल को काफी खुशनुमा बना दिया छुट्टी का दिन होने के बाद भी विश्वविद्यालय में कोलाहल रहा ।
पिछले दिनों के माहौल ने परिसर की खुशी छीन ली थी , हार कोई ऊब रहा था कुछ लोगो ने तो घर जाने का मन बना लिया था , एक तो रूखा मौसम ऊपर से परिसर के रूखे माहौल से मन में एक अजीब तरह की अशांती थी लेकिन आज एक बार फिर लोग एकदूसरे के गले लगकर एक दूसरे का हल पूछते नजर आये, कैंटीन के बहार पूरा दिन छात्रो का जमावड़ा रहा और शाम कब हो गयी पता ही नहीं चला , आज फिर विभिन्न मुद्दों पर विचार विमर्श हुआ जिसमे कुछ देर तो पिछली बाते केंद्र में रही लेकिन फिर अयोध्या मामले से लेकर बिहार चुनाव तक कई विषयो पर बहस हुयी , अयोध्या मामले के निर्णय को स्वागत योग्य बताते हुए लोगो ने निष्कर्ष निकला की अब मीडिया को इस विषय को छोड़ देना चाहिए , लोगो ने कहा की रोज रोज इस विषय पर बहस सामाजिक सोहार्द को विगड़ सकता है । कुछ लोगो ने तो यह भी कहा कि अब इस विषय पर कुछ भी न तो लिखा जाने चाहिए न ही दिखाया जाना चाहिए । विभिन्न विषयों पर सार्थक बहस के बीच बीच में लोग उन लोगो के बारे में भी जानकारी जुटते रहे जो नहीं आये थी या कही काम कर रहे थे । अयोध्या मामले पर लोगो ने आपना अनुभव बताते हुए कहा कि निर्णय के बाद वो कहा कहा गए और लोगो कि क्या प्रतिक्रिया रही ? कुलमिलाकर परिणाम यह निकला कि देश का आम आदमी इस निर्णय से खुश है वाह चाहे जिस समुदाय का हो।
आज कि इस सार्थक बहस ने हमारे खोये मनोबल को फिर वापस लाने का काम किया और एक बार फिर पढाई के ओर मन आकर्षित हुआ । लेकिन दुःख इस बात की है कि लोग अभी तक एक अच्छी नौकरी के लिए प्रयासरत ही है लेकिन खुसी कि बात यह है कि उनका मनोबल बढ़ा हुआ है और अपने पर पूरा भरोसा है ,आज नहीं तो कल लेकिन अच्छी शुरुवात करेंगे ।
हमारे लिए यही सब काफी था, और एक बार फिर पुराना माहोल बनाने में हमारे अग्रजो की जो भूमिका रही उसके लिए वो धन्यबाद के पात्र है । परिसर में दिग्गजों के जमावड़े ने माहौल तो खुशनुमा तो किया ही साथ ही छुट्टी के दिन भी राजू की काम से काम १०० चाय बिक गयी लगभग हार १५ मिनट के बाद कोई न कोई नया सीनियर आता था और आते ही सबसे पहले चाय का आदेश देता था ।
कहते है बीता हुआ दिन लौट कर नहीं आता लेकिन हमलोगों के लिए एक बार फिर बीता दिन लौट आया , हा कुछ अग्रज जो नहीं आये उनकी कमी जरूर खली लेकिन यह सुनकर संतोष हो गया की काम कर रहे है ।

गुरुवार, 30 सितंबर 2010

D- day very smoothly and peacefully passed away
Its not fear, it is the respect that come from true soul
The day of verdict passed very smoothly and peacefully, rumour was whatever spreading that could not get the place. Past three from I can not have to understand what is going to be happen on D – day, but finally thanks to god nothing is happen else in between the society where I am and other live afar away home , Some people said that am very scared about decision may be or may be not. How I can speak ?
I am not talked anybody to this D- day ……why ? ? ….. only I was looked the atmosphere where was I staid. Many and more met me in tea stall whom into some Muslim and some Hindu. Just I was go sit and take tea and after finishing without looking here and there again come into the room and a few second spent with book then after again turned there where from I was got meal of everyday. ( for myself my head everywhere bend, its does not matter temple or mosque……). Whatever you can understand. But in my word, a respect I have for the both religion so…….today really I feel good because my India is not living with 1992 incident it believe in build power and every community has a good and finest mind so that, The day of verdict passed very smoothly and peacefully. Its not fear, it is the respect that come from true soul

Media prakash
Lokmat Maharastra
Aurangabad

मंगलवार, 28 सितंबर 2010

केवल नौ दिन की मैया....???

केवल नौ दिन की मैया....???

अदबी और इल्मी माहौल का शहर कहा जाने वाला कोलकता अपने एक और चीज के लिए पूरे हिदुस्तान में शुमार हैं. खैर आप इसमें इतिहास को टटोलेंगे तो भी मुझे गुरेज नहीं होगा, क्योंकि आप अपने तरीके से इस शहर के बारे में जानते हो और मैं जरूर आप से कुछ ज्यादा जानता मालुमात रखा हूंगा क्योंकि भाई मेरी पैदाइस ही यहां कि है.लेकिन जिस विषय को मैं केंद्रित कर रहा हूं मेरा दावा है कि आप उससे सौ फीसदी रू-ब-रू होंगे. कोलकाता शहर का ब्रिटेन स्ट्रीट, कुछ कदम यहां से आगे ब‹ढेंगे तो उसी राह से होती हुई दाहिने मु‹डाव से एक और स‹डक दिखेगी, जिसे लोग बी के पाल के नाम से जानते हैं इसका दूसरा नाम नूतन बाजार भी यहां पीतल की बर्तनों एवं मूर्तियों का बाजार लगता है और इन दुकानों के चबुतरों पर ख‹डे होकरजरा बाये ओर नजरे दौ‹डाएंगे तो दिखेगी, केवल सकरी-सकरी कइयों गलियां और जब इन गलियों में प्रवेश करेंगे तो कोलकाता का लाजवाब पान आप का इंतजार कर रहा होगा. दो रुपए दीजिए पान चबाइए और फिर इसी राह से आगे ब‹ढजाइएं. यही असल काम की मंजिल और अदबी रूह जो आपके रूह तक उतरने को व्याकुल दिखेंगी, और मेरा विश्वास है कि आप भी बिना दिमागी कसरत किए आगे की प्रक्रिया में खुद ब खुद मसरूफ हो जाएंगे. खमा चाई..... लेकिन हुजूर कोई परहेज नहीं करता है. जो भी आते है, बडे इत्मेनान से कार्य का संपादन करते है. जैसे किसी अखबार का आखरी अंक जाने वाला हो.अब तक सारा दृश्य अपके दिमागी धरातल पर साफ उतर गया होगा. मगर आप जो भी समझे होंगे चीजे लगभग वहीं होगी पर सोच जरा सकारात्मक और सृजनात्मक हो तो उसमें भी हर रिश्ते नजर आएंगे. लेकिन सुअरबारे की नजर से नहीं इंसान की नजर से और वह भी इमान को पाक रखकर, भाई मेरा यकीन मानों दुर्गा का स्वरुप यहां भी दिखता और वह भी मां जैसी.यकिन मानिएगा कुछ चीजे ऐसे ही लोगबाग समझते हैं.दुर्गा पूजा बंगाल का एक ऐसा पर्व हैं जो पूरे बंगाल को इस समय मम-मय अर्थात माँ के लिए समर्पित कर देता हैं. चारो ओर बंगाली बा‹िडयों से लेकर भव्य पंडालों की तैयारियां महिनों से चलती हैं. माँ की मूर्तियां कुंभारटोली से लेकर नदियां और नदियां से लेकर हाव‹डा के गपतल्ला गली तक मूर्तियों का निर्माण कार्य चलता हैं. लेकिन पूजा मंडप के लेप हेतूं मिट्टी और शुद्ध जल या फिर मां की मूर्ति को आखरी रूप अर्थात चोख (आंख) बनाने के लिए भी शुद्ध मिटटी और शुद्ध जल की आवश्यकता प‹डती है. जो आखिरकार उस वैश्यालय से प्राप्त होता है जिसे हमारे तहजीबी लोग गलत कहते है, जी ह मैं सोनागाछी के वैश्याई चौखट की बात कर रहा हूं बंगाल की मान्यता रही है कि बिना इसके पूजा अधूरी रहेगी. केवल उन्हें चंद दिनों के लिए माँ स्वीकार करना समझ में नहीं आता मेरा मानना है कि वह सर्वथा से माँ रही है. उनके भीतर झांक कर देखीए, हर रिश्ते नजर आएंगे. चीजों को परोसने को लेकर आप जरूर अटपटा अनुभव किए होंगे......खैर (खमा चाई) (फितरते इंसान से वकिफ हूं मैं इसलिए सोचा ऐतमात के साथ समझा ले जाऊंगा. )गुनजाइश हो तो लिखिए.....आपका ही सभी का फैज है कि लिख रहा हूं....
प्रकाश पाण्डेय लोकमत समाचार महाराष्ट्र औरंगाबाद.....

रविवार, 26 सितंबर 2010

बुढापे ने लाचार किया मांगने को अधिकार....

बुढापे ने लाचार किया मांगने को अधिकार.... (प्रकाशपाण्डये)लोकमतसमाचार(औरंगाबाद महाराष्ट्र)कुछ दिन पहले मैंने इस विषय पर काम किया है सो अपने अनुभव को अपने अंदाज में बयां कर रहा हूं. जरा गौर फरमाइगा..........इस सिलसिले में मैं औरंगाबाद के कई वृद्धा आश्रमों में भी गया था..जिसका निचो‹ड लिख रहा हूं....पूरा संदर्भ शायद सम्भव नहीं हैं. इसके पहले भी अंग्रेजी में एक ऑर्टिकल लिख चुका हूं लेकिन दुख है कि आप दोस्तों संबंधित विषय पर कोई टिका टिप्पणी नहीं करते हैं.. जीवित रहने दो मारों मत...........कैव्स प्रणाम आपकोयहां से प‹ढे..... .................
आंखों की झुरियां, बालों का सफेदपन यह बयां करता है कि जवानी की छटा हुजूर ढल गई है, बु‹ढापे ने दस्तक देना शुरू कर दिया है. खुद को सम्भलों और चलों आराम करों जो बीज तुमने अभी तक लगाया था उसका असल भोग करने का सही वक्त आ गया हैं. तन जाओं दोहन शुरू करों. यह तो पम्परागत हमारा अधिकार कहता है लेकिन जिस बीज को आपने पानी दिया है वह सत प्रतिशत फूला चुका हैं परंतु दुख इस बात की है कि आप ने कुछ ज्यादा ही पानी पीला दिया. यही कारण है कि वह आज आप से अधिक दिमागदार हो चुका है और आपको ही अस्वीकार करना शुरू कर दिया है. आप इस समय लाचार हो गए है, सारी क्षमताएं स्थिर और सिमटने लगी हैं.स्वावलंबी तो आप कतई नहीं रह सकते है. इसका भली भाति एहसास आपको अब तक हो ही गया होगा. खैर ऐसे वक्त में औलाद ही मुंह मो‹ड लिया है तो आप क्या कर सकते है. आपके दिल पर क्या गुजर रही होगी समझ सकते हंै. आपने अपनी हर इच्छाओं की तिलांजलि देकर अपने जिगर के टुक‹डे को उसकी पसंदीदा वस्तुएं समय-दर-समय मुहैया कराया, आज जब आप पर ही संकट के बादल मंडराने लगे है तो बेटे जनाब ने मुंह मो‹डना शुरू कर दिया. वाह खुदा तुने कैसे वक्त में ऐसे बच्चों को जन्म दिया था. सारी मशांए मानों खोखली मात्र रह गई हैं. बेटा जनाब क्या आपके बु‹ढापे का सहारा बनेंगे. लेकिन इस मॉडन दौर के कुछ दिमागदार सपूतों ने खुद को प्रमाणित कर दिया है कि वो औलाद नहीं धरती के अनचाहे अवसाद है जिसे इस धरती पर आने का कोई हक ही नहीं था. खैर आ ही गए है तो विषाद जरूर फैलाएंगे और आप बचकर कहा जाएंगे.जिम्मेदारियों का उन्हें कोई एहसास नहीं होता क्योंकि स्कूल से लेकर कॉलेज जाने तक आपने बच्चा हैं कहकर उसे जिम्मेदारी सौंपी ही नहीं. दायित्व को इन नवाबजादों ने पंचतत्व में विलीन कर दिया हैं. आज सबकुछ खोकर आप लोग स्वयं अपने अधिकार के लिए गि‹डगि‹डा रहे हैं तो क्या होगा. चलिएं दोहरे अर्थों को छो‹डकर साफ-साफ बात करते है. हालही में दिल्ली हाई कोर्ट में ७३ साल के एक बुजुर्ग ने अपने बेटे के खिलाफ अर्जी दाखिल कर अपने प्रोटेक्शन की मांग की. खैर यह पहला मामला नहीं होगा,ऐसे बहुतायत मामले हैं, जिसमें बुजुर्ग कभी प्रोटेक्शन की मांग करता है तो कभी गुजारा-भत्ते की गुहार लगाता हंै. लेकिन धन्यवाद भारतीय संविधान और न्यायालय का जिसने इस पूरे मसले पर ध्यान केद्रित करते हुए औलाद की कानूनी जिम्मेदारी को तय कर, इस संदर्भ विशेष के लिए निर्मित कानून के अंतर्गत नियम कायदों को बनाया. न्यायालय ने बुजुर्गों के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए कुछ नियम कायदे बनाए जो उनके बुरे दिनों में संकट मोचन का काम करती हंै.नियम कायदे :औलाद अपने माता पिता को किसी भी रूप से परेशान कर रहा हो, चाहे वो शारीरिक उत्पी‹डन हो या मानसिक ऐसे स्थिति में बुजुर्ग को अपने हक के मद्देनजर स्थानीय थाने में पहुंच अपने बेटे के खिलाफ केस फाइल कर कार्रवाई की मांग कर सकता हंै. भारतीय संविधान में व्यक्ति विशेष की स्वतंत्रता के मद्देनजर कुछ मौलिक अधिकार बनाए गए हैं. अनुच्छेद-२१ के कहता है कि सभी को जीवन जीने की स्वतंत्रता दी गई हैं. किसी कारण वस व्यक्ति को यह लगे कि उसके इस स्वतंत्रता पर कोई किसी प्रकार का बंदिश लगा रहा हैं तो संबंधित स्थानीय पुलिस थाने में पहुंच प्रोटक्शन की मांग कर सकता हैं. अगर ऐसे में पुलिस सहयोग नहीं करती हैं तो बुजुर्ग कोर्ट में मामले को दर्ज करा कर प्रोटक्शन की मांग रख सकता हैं तथा उक्त पुलिस अधिकारी जिसने केस फाइल नहीं किया था के खिलाफ भी मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग कर सकता हैं. इसके अलावा भी बुजुर्ग कानून की सहायता लेकर अपने बच्चों को कानूनी रूप से मजबूर कर गुजारा भत्ता की मांग कर सकता है. संतान नहीं होने की स्थिति में जो भी व्यक्ति उसके जायदाद का वारिस बनता हैं, वह व्यक्ति उनका ख्याल रखेंगा. साथ ही उसके स्वास्थ्य एवं भरण पोषण पर ध्यान देगा. कुछ केस ऐसे भी सामने आते है जिसमें बुजुर्ग प्रॉपर्टी स्वयं के पास अर्जित रखता है और वह इसे विल के जरिए किसी शख्स के नाम कर देता है, तो उस शख्स जिम्मेदारी होती है कि वह उसका देखभाल करें. द मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पैंरेंट्स एंड सीनियर सिटिजन एक्ट २००७ के तहत ट्रिब्यूनल का गठन किया गया. इस ट्रिब्यूनल में एडीएम लेवल का अधिकारी बैंठता है. सेक्शन-१७ के मुताबिक इस मामले में किसी वकील की आवश्यकता नहीं होती है. इसके अंतर्गत दोनों पक्षों को अपनी बात स्वयं रखनी प‹डती हैं. सेक्शन-५ कहता है कि अगर किसी कारण वस बुजुर्ग कोर्ट आने की अवस्था में नहीं है तो वह इस काम के लिए किसी अन्य को नियुक्त कर सकता है.
‘‘बु‹ढापा वृद्धा बचपन का पूर्ण आगमन हुआ करता है. कहा जाता है कि इस अवस्था में प्रवेश करने बाद व्यक्ति की इच्छाए एक बार फिर से जागृत होती हंै, और उसके बर्ताव में एक नटखटी बच्चे का स्वरुप दिखने लगता हैं. ऐसे में वह सोचता हैं कि कोई उसका ख्याल रखे पालन पोषण करें.ङ्कङ्क प्रेमचंद (बु‹ढी काकी )...............

गुरुवार, 23 सितंबर 2010




Mother pain calling out inside the orphan

Time never says that what is going on tomorrow with us. But our basic problem is some one does not want to accept this true, because they realize” they will always get them young, never they are not going to face older age”. Dear at once accept and try to make out nature changes which time by time swirling such as a form of ecosystem. A many time ago, when I was read in class five, our teacher Mr Bhattacharjee was taught us a lesson , I am not more confirmed about the name of that chapter but as far as I think may be there name was “respect of parents”. there in between we got a central idea of whole about the respect how to deliver pleasure before our mother and father that he feels both of them built a solid wall not mould of molder. This meditation speech of respect I got through my teacher and that writer who wrote that lesson for understanding us the real defination of relationship between child and their parents. now what I am feel guilty myself do not know for ?. yesterday I was reached a orphan for reporting purpose there were found some old age suffered loveable mother and father who had been unwanted for her and his childs that’s due to they spent there time here and everyday pray to god & demand to them death nothing else. RUKHNANI DEVI KHEDKAR is a name of mother who love all one but this loveable mother could not get protection of their child between this stage, when really she deserves it for herself. Sorrow not sorrow great heart pain I feel yesterday ………………brother do not sees yourself as DOCTOR, ENGINEER, and other professionals only need is do respect her & his parents and prepare self as a good son…..(PRAKASH PANDEY)

मंगलवार, 21 सितंबर 2010

हम ही है हिंदुस्तान

हिन्दू कटे या कटे मुसलमान ,सबसे पहले दोस्तों कटेगा हिंदुस्तानसंगम से बना है देश हर धर्म इसकी जान , कई धर्मो , भाषाओ ,संस्कृतियों से मिलकर बना है हिंदुस्तान ।हिंदुस्तान शरीर है धर्म इसकी भुजाये एक भी भुजा कटी तो अधुरा रहेगा हिंदुस्तानहै उदारहण पडोशी देशो की पहचान , कट कट कर जो बने है और लगते है बेजानकहते है इनका या उनका है हिंदुस्तान ,वो खुद ही नहीं जानते क्या चीज है हिंदुस्तानचंद स्वार्थियो के चक्कर में हम अगर पड़ जायेंगे, स्वार्थी स्वार्थ निकालेंगे और हम खड़े पछतायेंगेनेता कुर्सी की तलाश में अपने घोड़े दौड़ाएंगे, इन घोड़ो के पैरो से बस मानव रौंदे जायेंगेमानवता होगी शर्मशार और नेता खुशी मनाएंगे, विश्व पटल पर भारत की संकीर्ण छवि बनायेंगेवो घूमेंगे ए० सी 0 में और हम फुटपाथ पर रात बिताएंगे,कभी कभी कुछ जलशो में वो हम पर रहम दीखायेंगे ,पीछे मुड़ते ही हमारी गरीबी लाचारी का मजाक उड़ायेंगे हमसे ही बने है वो और वी ० वी ०आई० पी ० कहलायेंगे , अब हम उनके दरवाजे के अन्दर नहीं घुसने पाएंगे इसलिए दोस्तों कहता हू लो खुद को पहचान ,इससे पहले फिर एक बार जल उठे हिंदुस्तानबेनकाब करो इन अलगाववादी ताकतों को और बता दो ,न हम हिन्दू है न है हम मुसलमान , हम जान गए है की हम ही है हिंदुस्तान हम ही है हिंदुस्तान ............

हम ही है हिंदुस्तान

हिन्दू कटे या कटे मुसलमान ,सबसे पहले दोस्तों कटेगा हिंदुस्तान
संगम से बना है देश हर धर्म इसकी जान , कई धर्मो , भाषाओ ,संस्कृतियों से मिलकर बना है हिंदुस्तान ।
हिंदुस्तान शरीर है धर्म इसकी भुजाये एक भी भुजा कटी तो अधुरा रहेगा हिंदुस्तान
है उदारहण पडोशी देशो की पहचान , कट कट कर जो बने है और लगते है बेजान
कहते है इनका या उनका है हिंदुस्तान ,वो खुद ही नहीं जानते क्या चीज है हिंदुस्तान

चंद स्वार्थियो के चक्कर में हम अगर पड़ जायेंगे, स्वार्थी स्वार्थ निकालेंगे और हम खड़े पछतायेंगे
नेता कुर्सी की तलाश में अपने घोड़े दौड़ाएंगे, इन घोड़ो के पैरो से बस मानव रौंदे जायेंगे
मानवता होगी शर्मशार और नेता खुशी मनाएंगे, विश्व पटल पर भारत की संकीर्ण छवि बनायेंगे
वो घूमेंगे ए० सी 0 में और हम फुटपाथ पर रात बिताएंगे,
कभी कभी कुछ जलशो में वो हम पर रहम दीखायेंगे ,पीछे मुड़ते ही हमारी गरीबी लाचारी का मजाक उड़ायेंगे
हमसे ही बने है वो और वी ० वी ०आई० पी ० कहलायेंगे , अब हम उनके दरवाजे के अन्दर नहीं घुसने पाएंगे
इसलिए दोस्तों कहता हू लो खुद को पहचान ,इससे पहले फिर एक बार जल उठे हिंदुस्तान
बेनकाब करो इन अलगाववादी ताकतों को और बता दो ,
न हम हिन्दू है न है हम मुसलमान , हम जान गए है की हम ही है हिंदुस्तान
हम ही है हिंदुस्तान ............ जो

सोमवार, 13 सितंबर 2010

क क

विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे " पर्वत पुत्र "


भारत रत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त का नाम आज भी राष्ट्रीयराजनीती में बड़े गर्व के साथ लिया जाता है... पन्त जी के अतुलनीय योगदान के कारण वह पूरे राष्ट्र के लिए युगपुरुष के समान थे जिसने अपने ओजस्वी विचारो के द्वारा राष्ट्रीय राजनीती में हलचल ला दी थी.... उनके व्यक्तित्व में समाज सेवा, त्याग, दूरदर्शिता का बेजोड़ सम्मिश्रण था... समस्त भारत में वे उनकी १२३ वी जयंती पर बीते दिनों याद किये गए...पन्त जी का जन्म १० सितम्बर १८८७ को उत्तराखंड के अल्मोड़ा से तीस किलोमीटर दूर हवालबाग विकासखंड के खूट नामक गाव में हुआ था... प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा अपने जिले में पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा पाने के लिए ये इलाहाबाद चले गए...जनमुद्दो की वकालत करने की तीव्र जिज्ञासा ने इनको इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एल एल बी की डिग्री लेने को विवश किया ... १९०५ में इस उपाधि के मिलने के बाद इन्होने अपना जीवन न्यायिक कार्यो में समर्पित कर दिया....पन्त जी के जीवन पर महात्मा गाँधी का विशेष प्रभाव पड़ा....गाँधी के कहने पर ये वकालत को छोड़कर राजनीती में चले आये.... उस समय समाज में दो तरह की विचार धाराएं थी... पहली विचारधारा में प्रगतिशील लोग हुआ करते थे, वही दूसरी विचार धारा में स्वदेश प्रेमी लोग थे... पन्त जी ने दोनों विचार धारा में समन्वय कायम कर उत्तराखंड के कुमाऊ में राष्ट्रीय चेतना फ़ैलाने में अपनी महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाई....उन्होंने गरीबो के विरोध में आवाज उठाते हुए कुली बेगार के खिलाफ विशाल आन्दोलन चलाया ... १९१६ में अपने प्रयासों से कुमाऊ परिषद की स्थापना की और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य चुने गए.....१९१६ का वर्ष पन्त जी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ ... इस वर्ष पन्त जी अपने असाधारण कार्यो के कारण किसी के परिचय के मोहताज नही रहे...यही वह वर्ष था जब वे राष्ट्रीय राजनीती में धूमकेतु की तरह चमके... १९२० में गाँधी जी के सहयोग से असहयोग आन्दोलन में इन्होने अपना सक्रिय सहयोग दिया... १९२७ में सर्व सम्मति से कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए गए... १९ नवम्बर १९२८ को लखनऊ में जब साईमन कमीशन आया तो नेहरु की साथ इन्होने भी उनका विरोध किया.... देश की आजादी में पन्त के योगदान को कभी नही भुलाया जा सकता है.... जंगे आजादी की दौर में हिमालय पुत्र की द्वारा प्रत्येक आन्दोलन चाहे वह सत्याग्रह हो या असहयोग आन्दोलन ,अपना पूरा योगदान दिया ... आजादी की दौर में अपनी सक्रिय भूमिकाओं की चलते पन्त जी को कई बार जेल की यात्राये भी करनी पड़ी...१५ अगस्त १९४७ को वह आज़ाद भारत में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाये गए ...इस पद पर वह १९५२ तक काम करते रहे... १९५२ में देश की संविधान बनाये जाने के बाद जब प्रथम आम चुनाव हुए तो उनका सञ्चालन पन्त जी की प्रयास से हुआ..इन चुनावो में कांग्रेस ने विजय पताका लहराई...१९५४ में जवाहर लाल नेहरु की आग्रह पर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में गृह मत्री का ताज पहना ... अपने कार्यकाल में पन्त जी ने विभिन्न कामो को पूरा करने का भरसक प्रयत्न किया....२६ जनवरी का दिन कुमाऊ के इतिहास में बड़ा महत्वपूर्ण रहा ...इस तिथि को भारत सरकार ने उन्हें "भारत रत्न" की उपाधि से विभूषित किया....७ मार्च १९६१ को पन्त जी की ह्रदय गति रुक जाने से मौत हो गई.... पन्त जी ने अपने प्रयासों से राष्ट्र हित के जितने काम किये उसके कारण भारतीय इतिहास में उनके योगदान को नही भुलाया जा सकता ...कुछ दिन पहले हमने उनकी १२३ वी जयंती मनाई .... पन्त जी को सच्ची श्रद्धांजलि तब मिले पाएगी जब हम उनके द्वारा कहे गए विचारो और सिद्धांतो पर चले .......
( लेखक युवा पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक है..... आप बोलती कलम ब्लॉग पर जाकर समसामयिक विषयो पर इनके विचार पढ़ सकते है)

रविवार, 12 सितंबर 2010

भला हिजड़ों के राज में भी राम मंदिर का निर्माण हो सकता है क्या...........हाँ कोशिश करना पड़ेगा इसलिए सभी राम भक्तों से निवेदन है की हनुमान चालीसा पढ़े....जिससे हमारे सभी भाइयों को सदबुद्धि आये ......और राम जी का भव्य मंदिर अयोध्या में बने......जय श्री राम......



२२ जुलाई २००८ को भरी लोकसभा में अशोक अर्गल, फगन सिंह कुलस्ते और  महावीर भगौरा द्वारा  नोटों की गद्दी उछाली गयी थी ....बीजेपी वालों का कहना था की कांग्रेस और सपा वालों ने उनके सांसदों को मनमोहन सरकार के पक्ष में वोट डालने के लिए ये नोट भेजे थे...जबकि कांग्रेस और सपा ने आरोप लगाया की ये नोट खुद बीजेपी के सांसदों  ने ही लाये हैं ...और एक सीडी के बारे में भी चर्चा चली थी की स्ट्रिंग आपरेशन हुआ है और सबूत इसी सीडी में है....जिसे सांसदों के विशेषाधिकार के कारण जनता को नही दिखाया गया .....सब कुछ जनता के सामने हुआ...टीवी...पे लाइव दिखाई दिया ....मगर संसद में कुछ हिजड़े जरुर हैं वे चाहें कांग्रेस में हो चाहें किसी अन्य दल  में ...जिन्होंने....दोषियों  को बचा लिया.....ऐसे हिजड़ों के राज में राम मंदिर का निर्माण कैसे सम्भव है........इस लिए राम मंदिर का निर्माण हनुमान जी की कृपा से ही सम्भव है....इसलिए सभी राम भक्तों से निवेदन है की हनुमान चालीसा पढ़े....जिससे हमारे सभी  भाइयों को सदबुद्धि आये ......और राम जी का भव्य मंदिर अयोध्या में बने......जय श्री राम......

मंगलवार, 7 सितंबर 2010

छुप छुप के पिया हम अंधेरो में मिलते रहे
सामने आये तो शर्मागाये
खैर जाओ तुम भी भूल जाओ
और चलो हम भी भूल जाते
पर याद रखना अबकी कुछ किये तो
मास खसोट लूँगा
जीते जी जावा हसरतो पर माघ भर देसी लाल पारी डालुगी।
ये ही है नजराए हिंदुस्तान का फलसफा .......राजनीती की निति बिस्तर से शुरू होती.....

सोमवार, 6 सितंबर 2010

चुप रहो , सब चुप रहो, कोई नही बोलेगा , इस देश में सबसे होशियार मेरी माँ है ----और सबसे योग्य मै..


जी हाँ कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर फिर से सोनिया गाँधी  विराजमान हो गयी हैं और देश का अगला प्रधानमंत्री भी अघोषित रूप से राहुल गाँधी ही माने जा रहे है....बाकि इस देश में कोई न तो युवा है न ही योग्य ......और तो और खुद तो परिवारवाद की मिशाल कायम कर  रहे हैं..और युवाओं को बेवकूफ बनाने के लिए .युवक कांग्रेस में संगठन  चुनाव कराकर युवाओं को आगे लाने की बात कर रहे हैं......आगे और लिखूंगा अभी  टाइम नही है..

रविवार, 5 सितंबर 2010

माखनलाल वि.वि. के कुलपति श्री बी.के कुठियाला जी की रीवा यात्रा (४ सितम्बर २०१०)


 



कैमरामैन---रामचंद्र दैनिक जागरण -रीवा

रामचन्द्र rewa me  एक एन जी ओ भी चला रहे हैं जिसमे पत्रकारों की भागीदारी सर्वाधिक है ...ये जनता के सहयोग से जनता की सेवा की मिशाल कायम कर रहे हैं...

वाह रे जी मान गए...

विवेक  मिश्र -गाँव-टोला ब्लॉग पर भी पढ़ सकते हैं

वाह रे !शीला जी मान गए
दिल्ली वाले सब जान गए
अब क्या बहाना मारेंगी
कलमाड़ी का कहा और मानेंगी
अब तो दुनिया सारी जानेगी
मीडिया भी है खूब डट गया
मजदूर बेचारा खट गया
वेल्थ ही वेल्थ बट गया
बचा है सब कॉमन-कॉमन
अब कौन थामेगा तुम्हारा दामन
वाह रे !शीला जी मान गए
दिल्ली वाले सब जान गए
अब दिल्ली भी है सोचती
बेकार में ही क्यूँ मै उजड़ गयी
चारो और ठसाठस भर गयी
टम्प्रेरी व्यवस्था में बस जायेगी
वर्ल्ड क्लास मेट्रो भी शर्माएगी
यात्री उठेंगे या सामान उठेगा
गेम्स में यह सवाल बनेगा
और किस-किस को खिलाएँगी
आखिर मंहगाई कब घटाएंगी
अन्न-पानी को जब सब तरसेंगे
तब मणिशंकर जैसे तुम पर बरसेंगे
वाह रे !शीला जी मान गए
दिल्ली वाले सब जान गए
कलमाडी जी कुछ ध्यान धरो
राष्ट्र का पैसा यूँ न बर्बाद करो
उधर गिल जी की अलग राग सुनो
"अफसर नहीं खिलाडी चुनो"
आप तो गिल साहब केवल दाना चुनो
आप ने ही तो कहा है
"भगवान् खेल करवाएगा"
फिर ज़रा सोचिये राष्ट्र क्यूँ शर्मायेगा
मनमोहन जी आप क्यूँ शांत हैं ?
आपकी समितियों के तो खूनी दांत हैं
अब तक इस "मनमोहन कॉमनवेल्थ"में
खर्च हुआ है बेवजह का फाईनेन्स
देख सके तो देख ले
नहीं तो लगा ले लेंस
रकम आपको भी बड़ी दिखेगी
वित्त में आपकी समझ बढ़ेगी
हे! मनमोहन, शीला और कलमाडी जी
कुछ तो दया करो इस जनता पर
है सावन होगा कॉमन
जनता की हेल्थ पर भी ध्यान दो
सबको दिया हम लोगो को भी कुछ वेल्थ दान दो
फिर हम कहेंगे
वाह रे ! जी मान गए.....